FB फ्रेंड से मिलने 46 सौ KM दूर राजस्थान के गांव सेगवा चली आई रूस की अनास्ता, खुद बनाई मक्के की रोटी
चित्तौड़गढ़। कहते हैं दोस्ती को ना सरहद रोक पाती है ना ही मजहब। दो दोस्तों के बीच दूरियां भले ही हजारों किलोमीटर की हो, मगर वे तय कर लें तो उन्हें मिलने से कोई नहीं रोक सकता। कुछ ऐसी ही कहानी राजस्थान के चित्तौड़गढ़ के गांव सेगवा के कन्हैया लाल गाडरी की है।

रूसी पर्यटकों ने दो दिन गुजारे सेंगवा में
कन्हैया लाल गाडरी का घर इन दिनों पूरे राजस्थान में चर्चा का विषय बना हुआ है। वजह यह है कि इनके घर विदेशी दोस्तों का दल पहुंचा है, जो कन्हैया के घर, गांव-गुवाड़ और खेत-खलियानों में घूमता देखा गया। दल ने गांव में दो दिन गुजारे।

तीन साल पहले एफबी पर हुई दोस्ती
दरअसल, पूरी कहानी राजस्थानी लड़की और रूसी लड़की दोस्ती की है। दोस्ती भी फेसबुक पर हुई। एक दूसरे से 46 सौ किलोमीटर दूर रहने वाली रूस की अनास्तासिआ और चित्तौड़गढ़ के कन्हैया लाल गाडरी की तीन साल पहले फेसबुक पर मुलाकात हुई। फिर एक-दूसरे के बारे में चैट पर बातें होनी। धीरे-धीरे कन्हैया लाल और अनास्ता के बीच अच्छी दोस्ती हो गई। शनिवार को अनास्ता रूस और नीदरलैंड के आठ सदस्यीय पर्यटक दल के साथ भारत भ्रमण पर आई।

चित्तौड़गढ़ से 10 किमी दूर है गांव सेंगवा
इसी दौरान अनास्ता अपने हिन्दुस्तानी दोस्त कन्हैया लाल से मिलने की ठानी और कार में सवार होकर साथी पर्यटकों के साथ शनिवार को चित्तौड़गढ़ जिला मुख्यालय से 10 किलोमीटर दूर स्थित के गांव सेगवा पहुंच गई। रात्रि विश्राम भी यहीं पर किया। अनास्ता और उसके साथ आए पर्यटकों के स्वागत को कन्हैया लाल और उनके परिवार व ग्रामीणों ने पलक पांवड़े बिछा दिए। बड़ी आत्मीयता से उनका स्वागत किया। फेसबुक दोस्त के घर और गांव में ऐसा सत्कार देख विदेशी सैलानी भाव विभोर हो गए।

चखा मक्की की रोटी का स्वाद
विदेशी पर्यटक अपने दोस्त कन्हैया लाल के घर कच्चे चूल्हे पर बनी मक्के की रोटी खाई। इस दौरान उन्हें देसी भोजन काफी भाया। उन्होंने सर्दी से बचने के लिए अलाव का भी सहारा लिया। दूसरे दिन रविवार को उसके खेतों का भ्रमण किया। ग्रामीण परिवेश को भी जाना और समझा। इसके अलावा इन विदेशी मेहमानों ने ग्रामीणों बच्चों से भी बातचीत की।है।

दोस्त की दोस्त भी आईं मिलने
कन्हैया लाल ने बताया कि फेसबुक पर रूस की अनास्तासिआ से बातचीत करते करते उसके परिवार और दोस्तों के बारे में भी जाना। यही वजह है कि अनास्ता सिंहा के साथ उसकी दोस्त योगिनिज एवं ऑक्साना भी कन्हैया से मिलने उसके घर आई हैं।

घर पर बनाने लगी रोटी
रूस के ये पर्यटक कन्हैया के पर उसके परिजनों से घुल मिल गए। ऐसा लगा कि मानों इनका कन्हैया के परिवार से वर्षों पुराना रिश्ता है। रूसी पर्यटक के दल में शामिल एक युवती तो कन्हैया के परिवार की महिला के साथ खाना तक बनानी लगी।

पहली बार 2018 में आई
कन्हैया ने बताया कि अनास्ता को घूमना पसंद है। हमारी फेसबुक पर दोस्ती होने के बाद वह 2018 में भारत घूमने आई तब भी उससे मिलने सेंगवा आई थी। यहां एक रात ठहरी थी। दूसरी बार वर्ष 2019 में आई। अबकी बार अनास्ता का अपने दोस्त के घर तीसरी बार आना हुआ।












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