भैंस ने जन्मा सफेद पाड़ा, नाक-कान पिंक कलर के, दूर-दूर से देखने आ रहे लोग, देखिए वायरल वीडियो
झुंझुनूं, 21 जनवरी। राजस्थान के झुंझुनूं जिले में एक भैंस ने सफेद रंग का पाड़ा जन्मा है। लोग इसे कुदरत का करिश्मा बता रहे हैं। पशु चिकित्सक भी अचम्भित हैं, क्योंकि भैंस काले रंग के पाड़े-पाड़ी ही जन्मती हैं।
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संभवतया झुंझुनूं का पहला मामला
झुंझुनूं जिले में संभवतया यह पहला मामला है कि किसी भैंस के सफेद पाड़ा हुआ है। गाय-बकरियों में तो अक्सर सफेद रंग के बच्चे अक्सर देखने को मिलते हैं, मगर भैंस का सफेद पाड़ा चर्चा का विषय बना हुआ है।

खरींटा की ढाणी में है सफेद पाड़ा
वन इंडिया हिंदी से बातचीत में झुंझुनूं जिले के गुढ़ागौड़जी पुलिस थाना इलाके में गांव केड के पास खरींटा की ढाणी निवासी राकेश खरींटा ने बताया कि उनके घर भैंस ने सफेद पाड़ा जन्मा है। इसे दखने के लिए आस-पास के गांवों से भी लोग आते हैं।

27 अक्टूबर को जन्मा था सफेद पाड़ा
भैंस मालिक राकेश खरींटा के अनुसार 27 अक्टूबर 2022 को उनके घर भैंस का प्रसव हुआ था। सफेद पाड़ा देखकर एक बारगी तो परिजन भी हैरान हो गए। बाद में इस पाड़े को कुदरत को करिश्मा मान लिया। पाड़ा पूरी तरह से स्वस्थ्य है। पौने माह का हो चुका है।

सफेद पाड़ा के उगने लगे करीम कलर के सींग
राकेश कहते हैं कि उनकी भैंस का पाड़ा पूरा कलर सफेद है। हालांकि नाक, कान पिंक कलर के हैं। अब तो छोटे छोटे सींग भी उग आए है, जो करीम कलर हैं। वहीं, आंखें भूरी हैं। बाकी यह पाड़ा भी सामान्य पाड़ों की तरह ही है।

धूप में नहीं खुलती आंखें
राकेश की पत्नी प्रियंका भैंस की देखभाल करती हैं। वे कहती हैं कि पाड़ा किसी अजूबे से कम नहीं। वह उसकी छोटी-छोटी बातें भी नोटिस करती हैं। मसलन, तेज धूप होने पर पाड़े की आंखें कम खुलती हैं।

अन्य जानवरों से ज्यादा सर्दी लगती है
सफेद पाड़े के बालों के साथ-साथ इसकी चमड़ी भी सफेद है। हालांकि चमड़ी काले पाड़ों की तुलना में पतली है। शायदी यही वजह है कि इसे सामान्य पाड़ों से ज्यादा सर्दी लगती है। सांझ ढलती ही यह रंभाने व धूजने लगता है। फिर उसे पशुओं के कमरे में बांधकर पर्दे लगा देते हैं। तब इसका रंभाना व धूजणी बंद होती है।

भैंस को सबसे ज्यादा पसंद है सफेद पाड़ा
प्रियंका खरींटा के अनुसार उनकी भैंस के यह तीसरा प्रसव है। इससे पहले दो बार काली पाड़ी लाई थी। तीसरे बार में पाड़ा। वो भी सफेद। खास बात यह है कि भैंस का इस सफेद पाड़े से खासा लगाव है, क्योंकि पहले दो पाड़ी हुई थीं उनका भैंस ने सिर्फ 15-20 दिन लगाव रखा था। जबकि सफेद पाड़ा तीन माह का होने का आया, मगर भैंस इसके पास नहीं होने पर दूध तक नहीं देती।

क्या कहते हैं पशु चिकित्सक
झुंझुनूं जिले के ही गांव झाझड़ के पशु चिकित्सक डॉ. बीरबल सिंह बताते हैं कि ऐसा संभव है। गुजरात में जाफरा नस्ल की भैंस भी भूरी होती हैं। काली भैंस के सफेद पाड़ा या पाड़ी का जन्म अनुवांशिक कारणों से संभव है। उनमें भैसें के भी गुण आते हैं।
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