राजस्थान में BJP ने इस वजह से हारी 11 सीटें, दलित-मुस्लिम गठबंधन और जाटों ने बिगाड़ा जीत का गणित
Rajasthan Lok Sabha Elections Result 2024 Analysis: लोकसभा चुनाव 2024 में राजस्थान में भाजपा को तगड़ा झटका लगा है। इस बार भाजपा ने 25 में से 11 सीटें खो दी। राजस्थान में कांग्रेस ने दस साल न केवल खाता खोला बल्कि कांग्रेस-इंडिया गठबंधन ने 11 सीटों पर कब्जा जमाया है। साल 2014 व 2019 के चुनाव में सभी 25 सीटों पर कमल खिला था।
लोकसभा चुनाव 2024 में राजस्थान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी हुई थी। मंगलवार को सामने आए नतीजों के बाद से सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कुछ समय पहले ही राजस्थान में कांग्रेस को हराकर सत्ता में आने वाली भाजपा अपना साल 2014 और 2019 वाला प्रदर्शन क्यों नहीं दोहरा सकी?

कांग्रेस ने जीती ये 11 सीटें
1 बाड़मेर में उम्मेदाराम बेनीवाल
2 भरतपुर में संजना जाटव
3 चूरू में राहुल कस्वां
4 दौसा में मुरारी लाल मीणा
5 श्रीगंगानगर में कुलदीप इंदौरा
6 झुंझुनूं में बृजेन्द्र सिंह ओला
7 करौली-धौलपुर में भजनलाल जाटव
8 नागौर में हनुमान बेनीवाल
9 सीकर में अमराराम
10 टोंक-सवाई माधोपुर में हरीश चंद्र मीणा
11 बांसवाड़ा में राज कुमार रोत
जानिए राजस्थान में भाजपा की हार के कारण
राजस्थान में जातीय समीकरण
राजस्थान में भाजपा वाली 11 सीटें कांग्रेस के हाथ में आ जाने पर दोनों ही पाटियों के नेता और 'सियासी पंडित' कई वजह बता रहे हैं। विधानसभा में हारने वाली कांग्रेस में लोकसभा चुनाव में नई जान आ जाने कारणों में ये भी महत्वपूर्ण है कि राजस्थान में शासन का केंद्रीकरण, दलित-मुस्लिम गठबंधन और जाटों को भाजपा भांप नहीं पाई। इन्होंने भाजपा उम्मीदवारों के खिलाफ जमकर वोट दिए।
पूर्व सीएम वसुंधरा राजे सिंधिया
वसुंधरा राजे को नेतृत्व की भूमिका से बेदखल करना एक बात थी। एक नए चेहरे को आगे लाना और उसे राजनीति में शामिल करना और अनुभवी नेताओं को दरकिनार करना दूसरी बात थी। राजस्थान में अनुभवहीन शर्मा को उम्मीदवार बनाकर उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण समुदाय को खुश करने की मोदी की चाल उल्टी पड़ गई। शर्मा की हार यह हुई कि वे राजे की छाया से बाहर नहीं निकल पाए। शर्मा न तो राजे की राजनीतिक सूझबूझ को धोखा देते हैं और न ही उनके कट्टर प्रतिद्वंद्वी अशोक गहलोत की।
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा
लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों ने राजस्थान में दिग्गज भाजपा नेता डॉ. किरोड़ी लाल मीना जैसे वरिष्ठ नेताओं के पैरों तले जमीन खिसका दी, जो भजनलाल शर्मा सरकार में डिप्टी सीएम पद के लिए लालायित थे, लेकिन उन्हें कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालय मिला। मीणा ने दौसा में भाजपा की जीत के लिए अपना मंत्री पद तक दांव लगा दिया था। चुनाव प्रचार में कहा था कि भाजपा हारी तो पद से इस्तीफा दे देंगे।
दलितों का गढ़
राजस्थान के सीएम भजनलाल शर्मा गृह जिले और भरतपुर संभाग में पार्टी की पूरी तरह से हार हुई। कांग्रेस ने दलितों के कई गढ़ जीते। भाजपा की गलत समझ सचिन पायलट के लिए विनाशकारी और अप्रत्याशित लाभ साबित हुई, जिन्हें इस दलितों के क्षेत्र में सम्मान और वोट दोनों मिलते हैं। चुनाव में कांग्रेस ने अपने पत्ते अच्छे से खेले। प्रियंका गांधी के समर्थन से संजना जाटव को विधानसभा चुनाव हारने के बाद भी दूसरा मौका मिला भजन लाल जाटव ने भी कांग्रेस के टिकट पर करौली धौलपुर व कांग्रेस के कुलदीप इंदौरा ने गंगानगर सीट जीती।
जाट गढ़ में कांग्रेस ने हर सीट जीती
अगर दलितों ने कांग्रेस को शीर्ष पर पहुंचाया, तो जाटों ने उन्हें राजस्थान में ड्राइविंग सीट पर बिठा दिया। कांग्रेस ने राज्य के जाट गढ़ में लगभग हर सीट पर कब्जा कर लिया, जिसमें 10 साल बाद झुंझनू और चूरू को फिर से हासिल किया। उनके भारतीय सहयोगियों ने सीकर और नागौर की शेष सीटों पर कब्जा कर लिया और बेशकीमती शेखावाटी क्षेत्र में क्लीन स्वीप किया। सीकर सीट पर सीपीएम के टिकट पर उम्रदराज अमरा राम ने जीत दर्ज की है। वे राज्य में वामपंथी पार्टी के अकेले उम्मीदवार हैं। नागौर में कांग्रेस इंडिया गठबंधन के हनुमान बेनीवाल व बाड़मेर-जैसलमेर से कांग्रेस उम्मीदवार उम्मेद राम बेनीवाल जीते।












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