राजस्थान में दुश्मन बने दोस्त : BJP ने कांग्रेस से हाथ मिलाकर बनाया जिला प्रमुख, वजह बना-BTP का नक्सली कनेक्शन

जयपुर। राजनीति में सब कुछ संभव है। सियासी दुश्मन मौका मिलते ही दोस्त बनने में देर नहीं लगाते। ऐसा राजस्थान के डूंगरपुर जिले में हुआ है। यहां हाल ही सम्पन्न हुए राजस्थान पंचायतीराज चुनाव 2020 में डूंगरपुर जिला प्रमुख बनाने के लिए भाजपा कांग्रेस के बीच गठजोड़ हो गया और भाजपा समर्थित प्रत्याशी डूंगरपुर का नया जिला प्रमुख बन गया।

बीटीपी ने गहलोत सरकार से वापस लिया समर्थन

बीटीपी ने गहलोत सरकार से वापस लिया समर्थन

डूंगरपुर जिला परिषद सदस्यों के चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई भारतीय ट्राइबल पार्टी (‌BTP) को मात देने के लिए भाजपा-कांग्रेस एक हो गए और अपना जिला प्रमुख बना लिया। इससे नाराज दो विधायकों वाली पार्टी बीटीपी ने राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया है।

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     क्या है डूंगरपुर पंचायत चुनाव की गणित ?

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    बता दें कि डूंगरपुर जिला परिषद सदस्यों के चुनाव में 27 में से 13 सदस्य बीटीपी समर्थित सदस्य जीते। जबकि भाजपा के 8 और 6 के कांग्रेस सदस्य जीतकर आए। यानी डूंगरपुर जिला प्रमुख बनाने के लिए बीटीपी, भाजपा और कांग्रेस में से किसी के पास बहुमत का आंकड़ा 14 सदस्य नहीं थे। ऐसे में बीटीपी को लग रहा था कि वह कांग्रेस के समर्थन से अपना जिला प्रमुख बनाने में सफल हो जाएगी, मगर भाजपा और कांग्रेस ने हाथ मिलाकर भाजपा समर्थित जिला प्रमुख बनाया है।

     बीटीपी का भाजपा कांग्रेस पर आरोप

    बीटीपी का भाजपा कांग्रेस पर आरोप

    डूंगरपुर जिला प्रमुख बनाने के लिए कांग्रेस व भाजपा के गठजोड़ पर बीटीपी ने गहरी नाराजगी जताई और गहलोत सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया। भारतीय ट्राइबल पार्टी (‌BTP) के संस्थापक छोटूभाई वसावा ने इस संबंध में ट्विटर हैंडल पर लिखा कि ‘भाजपा-कांग्रेस एक है। BTP राजस्थान सरकार से समर्थन वापस लेगी।'

     समर्थन वापस लेने से गहलोत सरकार पर असर

    समर्थन वापस लेने से गहलोत सरकार पर असर

    बीटीपी द्वारा राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार से समर्थन वापस लेने से खास असर नहीं पड़ेगा। इसी साल जुलाई में अशोक गहलोत सरकार गिराने की कोशिशें हुई तब डूंगरपुर के सागवाड़ा व चौरासी से बीटीपी के विधायकों ने गहलोत सरकार को समर्थन दिया था। राजस्थान में 200 विधायकों में से कांग्रेस के पास 105 हैं। इनके अलावा 2 CPIM, एक राष्ट्रीय लोक दल (RLD) और 10 से ज्यादा निर्दलीय विधायकों का समर्थन प्राप्त है। ऐसे में बीटीपी विधायकों के समर्थन वापस लेने से गहलोत पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।

     बीटीपी का नक्सलियों से रिश्ता-सतीश पूनिया

    बीटीपी का नक्सलियों से रिश्ता-सतीश पूनिया

    इधर, डूंगरपुर जिला प्रमुख चुनने में कांग्रेस से हाथ मिलाने के सवाल पर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि बीटीपी के नक्सलियों से रिश्ते की बात पता चली थी। इसलिए कांग्रेस के साथ गठबंधन करके डूंगरपुर जिला प्रमुख बनाया गया है।

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