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जब युद्ध में हिन्दुस्तान के खूंखार डाकू बलवंत सिंह ने जमाया पाकिस्तान के 100 गांवों पर कब्जा

Barmer News, बाड़मेर। जम्मू कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी को सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले के बाद चंबल के दस्यू सरगना डाकू मलखान सिंह ने सरकार से मांग की कि उन्हें बिना वेतन दिए बॉर्डर पर भेज दो। वे और उनका गिरोह पाकिस्तान को धूल चटा सकता है।

Balwant Singh Bakhasar was Indo Pak war 1971 Hero

डाकू मलखान सिंह की यह मांग भले ही पाक से बदला लेने के गुस्से में कही लगती हो, मगर ऐसा हो चुका है। एक डाकू युद्ध में सरहद पर सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ चुका है। हम बात कर रहे हैं राजस्थान के बाड़मेर जिले के गांव बाखासर निवासी डाकू बलवं​त सिंह की, जिसने भारत-पाक युद्ध 1971 में पाकिस्तान को धूल चटाने के साथ ही पाक के सौ से ज्यादा गांवों पर कब्जा भी जमा लिया था।

सरहद के चप्पे-चप्पे से वाकिफ थे डाकू बलवंत सिंह

सरहद के चप्पे-चप्पे से वाकिफ थे डाकू बलवंत सिंह

दरअसल, 1971 में भारत-पाक युद्ध (Indo Pak war 1971) के दौरान राजस्थान बॉर्डर पर बाड़मेर क्षेत्र की कमान बिग्रेडियर कर्नल भवानी सिंह के पास थी। वे बाखासर इलाके में पहुंचे थे। इस रण भूमि में थार का मरूस्थल होने के कारण रास्तों को खोजना और पाक की तरह आगे बढ़ पाना आसान नहीं था। ऐसे मौके पर कर्नल भवानी सिंह ने बाखासर के डकैत बलवंत सिंह (Balwant Singh Bakhasar) को याद किया। उनसे मदद मांगी। उस समय बलवंत सिंह का भारत-पाक सरहद के दोनों के तरफ के लगभग 100 किलोमीटर के दायरे में खौफ था। डाकू बलवंत सिंह मिट्टी के समंदर में बने हर रास्ते और पंगडडियों से अच्छी तरह वाकिफ थे। वे पाकिस्तान के छोछरो क्षेत्र तक आया-जाया करते थे।

जोंगा जीप को साइलेंसर निकाल के बनाया टैंक

जोंगा जीप को साइलेंसर निकाल के बनाया टैंक

भारत पाक के बीच चल रहे युद्ध के दौरान बिग्रेडियर कर्नल भवानी सिंह द्वारा मदद मांगे जाने पर देशभक्ति व वीरता दिखाते हुए डाकू बलवंत सिंह ने हिन्दुस्तान की रक्षा के लिए हथियार उठाए और सेना के साथ-साथ पाकिस्तान की ओर कूच कर दिया। भारतीय सेना ने एक बटालियन और 4 जोंगा जीप डाकू बलवंत सिंह को सौंप दी। इस बटालियन के पास टैंक नहीं थे, मगर सामने पाक की टैंक रेजिमेंट थी। बलवंत सिंह व बटालियन ने चतुराई से काम लिया और जोंगा जीप के साइलेंसर निकाल लिए ताकि आवाज सुनने पर पाक सेना को लगे कि भारतीय सेना टैंक लेकर आगे बढ़ रही है। इसी दौरान मौका पाते ही बलवंत सिंह व भारतीय सेना ने पाक सेना के छक्के छुड़ा दिए और पाकिस्तान की छोछरो चौकी समेत आस-पास के 100 गांवों को अपने कब्जे में ले लिया।

सारे केस वापस लेकर दो हथियारों का लाइसेंस दिया

सारे केस वापस लेकर दो हथियारों का लाइसेंस दिया

1971 के युद्ध में अदम्य साहस दिखाने पर डाकू बलवंत सिंह हीरो बन गए थे। राजस्थान सरकार ने बलवंत सिंह के खिलाफ दर्ज हत्या, लूट, डकैती के सारे मुकदमों को वापस ले लिया और उनको दो हथियारों को लाइसेंस दिया। बाड़मेर का बाखासर इलाके गुजरात के कच्छ भुज से सटा हुआ है। ऐसे में बाड़मेर जैसलमेर और कच्च भुज क्षेत्र में डाकू बलवंत सिंह की बहादुरी के चर्चे आज भी होते हैं। बलवंत सिंह की छवि यहां डाकू नहीं बल्कि रॉबिन हुड की है।

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