Rajasthan: कोटपुतली में बोरवेल में गिरी साढ़े तीन साल की चेतना, 72 घंटे बाद भी बचाव अभियान में सफलता नहीं
Rajasthan News: राजस्थान के कोटपुतली में एक दर्दनाक घटना सामने आई है। जहां 23 दिसंबर को साढ़े तीन साल की मासूम चेतना बोरवेल में गिर गई। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल, स्थानीय प्रशासन और उत्तराखंड के रैट माइनर्स की कड़ी कोशिशों के बावजूद 72 घंटे बीतने के बाद भी चेतना को बचाने में सफलता नहीं मिली है।
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72 घंटे बाद भी कोई गतिविधि नहीं, बढ़ी चिंता
बचाव दलों की अथक मेहनत के बावजूद चेतना की ओर से किसी भी प्रकार की गतिविधि के संकेत नहीं मिले हैं। यह स्थिति न केवल बचाव अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल उठाती है। बल्कि परिवार और समुदाय की चिंता को भी बढ़ा रही है।

दोहरी रणनीति पर उठे सवाल
चेतना को बचाने के लिए प्लान ए और प्लान बी के तहत पारंपरिक और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया। हालांकि दोनों रणनीतियों से कोई सकारात्मक नतीजा सामने नहीं आया। खुदाई और तकनीकी प्रयासों में हुई देरी से बचाव दल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं।
आर्यन मामले से सबक न लेने की आलोचना
कोटपुतली में चेतना के बचाव अभियान ने दौसा में आर्यन बचाव मामले की याद दिला दी है। आर्यन को बचाने में 57 घंटे लगे थे। लेकिन दुखद रूप से उसे बचाया नहीं जा सका। सवाल उठ रहे हैं कि क्या एसडीआरएफ और एनडीआरएफ ने पिछली घटना से सबक नहीं लिया और क्या वे समय पर उचित निर्णय लेने में विफल रहे।
बच्चों की सुरक्षा को लेकर राज्य में सख्ती
राजस्थान सरकार ने इस घटना के बाद बोरवेल को खुला छोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का ऐलान किया है। मानवाधिकार आयोग ने भी राज्य सरकार और पुलिस को नोटिस जारी कर ऐसे मामलों को रोकने के लिए जवाब मांगा है।
समुदाय की उम्मीद और प्रशासन की चुनौती
चेतना को बचाने के लिए सामूहिक प्रयास जारी हैं। स्थानीय लोगों के साथ-साथ पूरे देश में उसकी सुरक्षित वापसी की प्रार्थना हो रही है। यह घटना बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाने और बचाव अभियानों में त्वरित व प्रभावी तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता पर जोर देती है।
चेतना की सुरक्षा को लेकर प्रशासन के प्रयास जारी हैं। लेकिन यह घटना बच्चों की सुरक्षा के लिए कड़े नियम लागू करने की आवश्यकता का एक दर्दनाक सबक बनकर सामने आई है।












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