हिंदुओं ने रखा रोजा, मुस्लिमों ने की कांवड़ियों की सेवा

Hindu Muslim
महासमुंद। देश का कोई भी कोना हो रोजा और व्रत की बात आते ही कहीं न कहीं लकीरें खिंच जाती हैं। क्योंकि धारणा यह है कि रोजा सिर्फ मुसलमान रखते हैं और व्रत हिन्दू। छत्तीसगढ़ के महासमुंद में हिंदू-मुसलमान की एकता का एक अलग ही नजारा देखने को मिलता है।

यहां रमजान के पावन महीने में मुसलमान तो रोजा रखते ही रहे, लेकिन कुछ हिंदू भी पूरे नियम-कायदों के साथ रोजा रखकर खुदा की इबादत करते रहे। ऐसा पहली बार नहीं, हर साल होता है।

मुसलमान करते हैं कावड़‍ियों की सेवा

यहां पर रमजान के साथ ही अभी सावन महीने में बोलबम कांवड़ियों की पदयात्रा चल रही है। इसमें किए जा रहे कांवड़ सेवा में सिर्फ हिंदू ही नहीं, बल्कि मुस्लिम युवा भी तन-मन व धन से जुट रहे हैं। महासमुंद नगर देश को आपसी भाईचारे का मिसाल शुरू से देता आया है। लिहाजा, यहां हर धर्म का पर्व प्रत्येक नागरिक का पर्व होता है।

वार्ड 9 के स्टेशन रोड निवासी विनोद गुप्ता पिछले 31 वर्षो से रोजा रख रहे हैं। विनोद ने बताया कि रमजान में 27वां रोजा का खास महत्व है। इसलिए वह महीने में केवल एक दिन ही रोजा रखते हैं। 26वें रोजे की शाम से इनकी तैयारी पूरी हो जाती है। 27वें रोजे की सुबह समय पर उठकर सहरी करते हैं। इसके बाद पूरे कायदे के साथ दिनभर रोजा रखते हैं।

बचपन के दोस्त के घर खोलते हैं रोजा

विनोद ने बताया कि रोजे का दिन भी वह सामान्य दिन की तरह ही अपना कामकाज निबटाते हैं। रोजा खोलने के समय वह अपने बचपन के मित्र शोएब अहमद के घर जाते हैं। उन्होंने कहा कि वह नमाज अता करने के बाद ही रोजा खोलते हैं।

विनोद बताते हैं कि दोस्तों के घर इफ्तार का पूरा प्रबंध रहता है। 32 साल पहले अपने मित्रों के साथ ही उन्होंने रोजा रखना शुरू किया था। इसके बाद से हर साल वह 27वां रोजा रखते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह संयम और ईश्वर की इबादत का पर्व है।

घर के लोग विनोद की भावना का पूरा सम्मान करते हैं। विनोद की पत्नी सहरी के लिए सारे इंतजाम करती हैं। हिंदू धमार्नुसार पूजा-पाठ और व्रत रखने के साथ ही रमजान में रोजा रखने से विनोद को सुखद अनुभूति होती है। विनोद का कहना है कि ईश्वर कहो या खुदा, दोनों एक ही हैं।

सभी धर्म इंसानियत सिखाते हैं

दूसरी तरफ, वार्ड 3 निवासी नवाब भाई आपसी भाईचारे को मजबूती देते हुए कांवड़ियों की सेवा करते हैं। सावन के महीने में बम्हनी से सिरपुर जाने वाले कांवड़ यात्रियों की सेवा में नवाब भाई का पूरा समय बीतता है। नवाब ही नहीं, इनके भाई भी कांवड़ियों की सेवा में तन-मन और धन से जुटते हैं।

हर साल अंबेडकर चौक में कांवड़ियों की सेवा का प्रबंध होता है, जहां नवाब भाई सेवा देते नजर आते हैं। उन्होंने बताया कि कांवड़ियों को भोजन परोस कर, पानी पिलाकर उन्हें खुशी मिलती है। नवाब का कहना है कि खुदा और ईश्वर एक है और सभी उसी के बंदे हैं। सभी धर्म इंसानियत की सीख देते हैं। इंसानियत से बढ़कर कोई धर्म नहीं है।

नवाब भाई जैसे कई शख्सियतों के चलते अंबेडकर चौक क्षेत्र में चाहे किसी भी धर्म संबंधी आयोजन हो, हर धर्म के लोग तन्मयता के साथ अपनी सेवाएं देते हैं।

इनपुट- इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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