Chhattisgarh News: आदिवासी आरक्षण बना बड़ा सियासी मुद्दा, भाजपा पहुंची राजभवन, कांग्रेस जाएगी सुप्रीम कोर्ट
छत्तीसगढ़ में चुनाव से लगभग एक साल पहले सियासत आदिवासियों के इर्द गिर्द घूमने लगी है। शनिवार को आदिवासी आरक्षण के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी बेहद मुखर नजर आई।
रायपुर, 15 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ में चुनाव से लगभग एक साल पहले सियासत आदिवासियों के इर्द गिर्द घूमने लगी है। शनिवार को आदिवासी आरक्षण के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी बेहद मुखर नजर आई। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भाजपा के बड़े नेता इसी मुद्दे पर सड़क पर नजर आये। बीजेपी नेताओं ने भूपेश बघेल पर आदिवासी आरक्षण में कटौती किये जाने का आरोप लगाया है।

आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा का राजभवन मार्च
शनिवार को भारतीय जनता पार्टी के सांसदों और विधायको ने भाजपा कार्यालय से राजभवन तक पैदल मार्च करते हुए भूपेश बघेल सरकार के खिलाफ राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा। इसके बाद छत्तीसगढ़ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सांसद अरुण साव ने भाजपा कार्यालय एकात्म परिसर में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि कांग्रेस सरकार ने प्रदेश के जनजाति समाज के साथ एक बड़ा धोखा किया है जनजाति आरक्षण कटौती के लिए कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराते उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार ने एकमुश्त 12 फीसदी आदिवासी आरक्षण बढ़ाया और सत्ता में रहते इस व्यवस्था का रक्षण करते हुए आदिवासी समाज का हित संरक्षण किया।
कांग्रेस की सरकार ने सुनियोजित षड्यंत्र के तहत आदिवासी हितों पर कुठाराघात किया है। जिसके लिए जनजाति समाज उसे कभी माफ नहीं करेगा। साव ने आगे कहा कि हमारी मांग है जिन भी अधिकारियों ने लापरवाही की है उनके ऊपर तुरंत कार्रवाई की जाए और आदिवासियों को उनके हक 32 प्रतिशत आरक्षण जो कांग्रेस सरकार की घोर लापरवाही की वजह से छीन लिया गया है उन्हें जल्द से जल्द वापिस मिलना सुनिश्चित किया जाए।

पीसीसी चीफ मोहन मरकाम ने दिया BJP को जवाब
इधर छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मोहन मरकाम ने बयान जारी करके कहा कि आदिवासी आरक्षण में कटौती पर भाजपा का पैदल मार्च घड़ियाली आंसू है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के षड़यंत्र और पूर्ववर्ती रमन सरकार के द्वारा जानबूझकर बरती गयी लापरवाही के कारण हाईकोर्ट ने आरक्षण की सीमा को घटाकर 58 से 50 फीसदी किया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने भाजपा नेताओं से सवाल पूछा कि जब आरक्षण की सीमा को 50 से बढ़ाकर 58 करने के खिलाफ अदालत में याचिका लगी तो रमन सरकार ने कोर्ट को आरक्षण बढ़ाने के तर्कसंगत कारणों को कोर्ट के समक्ष क्यों नहीं रखा? प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि आदिवासी समाज को उनका हक दिलाने के लिये कांग्रेस पार्टी प्रतिबद्ध है। बिलासपुर हाईकोर्ट फैसले के खिलाफ कांग्रेस सरकार उच्चतम न्यायालय गयी है। इसके साथ अन्य संवैधानिक मार्गो को तलाशा जा रहा, आदिवासी समाज सहित सभी वर्गों को उनका पूरा हक मिले इसको सुनिश्चित किया जायेगा।

नाराज आदिवासी समाज लड़ेगा चुनाव ?
इधर एससी-एसटी और पिछड़ा वर्ग को मिलने वाले 32 प्रतिशत आरक्षण में 12 फीसदी की कटौती किए जाने से नाराज पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओ में शुमार रहे आदिवासी नेता अरविंद नेताम ने अपनी राजनितिक पृष्ठभूमि के खिलाफ जाते हुए बड़ा बयान दिया है। अरविंद नेताम ने कहा है कि अगर भूपेश बघेल सरकार आदिवासियों को आरक्षण देने के मसले में गंभीर नहीं होती है तो बस्तर में आदिवासी समाज की तरफ से छत्तीसगढ़ में होने वाले विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ वालों के लिए भाजपा और कांग्रेस से अलग चौथा विकल्प तैयार किया जाएगा, क्योंकि आरक्षण को लेकर दोनों ही दलों के विरुद्ध जनता में प्रति काफी नाराजगी है।

यह है मामला? सुप्रीम कोर्ट जाएगी भूपेश सरकार
दरअसल छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम् फैसला सुनाते हुए राज्य में आदिवासियों के आरक्षण को कम कर दिया है। पहले प्रदेश में 32 % आरक्षण था, जिसे 20 %कर दिया गया है। इसलिए आदिवासी समाज ख़फ़ा है और बीजेपी इस मुद्दे को भुनाने की कोशिश में है। भारतीय जनता पार्टी समेत अन्य विरोधियों को जवाब देते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का आरक्षण पर कहना है कि आदिवासियों को उनके अधिकार मिलकर रहेंगे , हमारी सरकार हाईकोर्ट के निर्णय को चुनौती देने सुप्रीम कोर्ट गई है।
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