छत्तीसगढ़ का पहला प्रवासी पक्षी विहार गिधवा में

एसएफआरटीआई के संचालक के.सी. यादव ने बताया कि राज्य सरकार को पक्षी विहार बनाने के लिए प्रस्ताव दे दिया गया है। गिधवा बांध का पूरी तरह से सर्वेक्षण कर लिया गया है। पक्षी विहार बनाने के लिए गिधवा बांध सबसे उपयुक्त है। सूबे का यह पहला पक्षी विहार होगा।
एसएफआरटीआई ने अक्टूबर 2012 में 'छत्तीसगढ़ के प्रवासी पक्षी 'एक अध्ययन' परियोजना की शुरुआत की। इस परियोजना के तहत 52 झीलों का सर्वेक्षण किया गया। वहीं पक्षी प्रेमियों सहित कई संस्थाओं से पक्षियों के संबंध में पूरी जानकारी जुटाई गई।
सर्वेक्षण में गिधवा बांध को पक्षी विहार बनाए जाने को लेकर यहां की मिट्टी और वानस्पतिक स्थिति की जानकारी ली गई। सर्वेक्षण टीम ने पीपल, बरगद, पलास, बबूल के पेड़-पौधे और पानी को पक्षी विहार के लिए काफी बेहतर पाया। सर्वेक्षण में यह भी पता चला कि प्रवासी पक्षियों के लिए मछली की अच्छी आपूर्ति भी हो सकती है। यही वजह है कि एसएफआरटीआई ने यहां पक्षी विहार बनाने का फैसला लिया है।
गिधवा बांध में गैडवाल, मार्श, सेंडपाईपर, कामन सेंडपाईपर, कामन ग्रीन शैक, कामन रेड शैक प्रवासी पक्षी हैं। इनके अलावा, 50 तरह के स्थानीय पक्षी भी इस बांध में पाए जाते हैं। इस क्षेत्र में प्रवासी और स्थानीय पक्षियों की करीब 143 प्रजातियां हैं।
बताया जा रहा है कि बेमेतरा जिले के नवागढ़ में नांदघाट से लगभग 8 किलोमीटर दूर मुंगेली रास्ते पर 400 साल पुराना 51 एकड़ का गिधवा तलाब है। इसके पास ही 200 एकड़ का गिधवा बांध है, जहां पर प्रवासी पक्षी आते हैं। यह राजधानी से करीब 70 किलोमीटर की दूरी पर है। पक्षी विहार बनने से यह एक बड़ा पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications