छत्तीसगढ़ विद्युत संविदा कर्मचारी कर रहे हैं हड़ताल, जानिए इन युवा कर्मचारियों की पीड़ा
जानिए विद्युत संविदा युवा कर्मचारियों की पीड़ा
रायपुर,20 अप्रैल। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बीते कई महीनो से बिजली विभाग में काम करने वाले 2500 युवा अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। हाल ही में कुछ दिनों के लिए वह काम पर वापस लौट गए थे, लेकिन बीते 11 मार्च से यह फिर एक बार अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। छत्तीसगढ़ राज्य संविदा विद्युत कर्मचारी संघ के बैनर तले आंदोलनकर रहे बिजली कर्मचारियों हर दिन अलग-अलग तरीके से अपनी बातें सरकार तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। वन इंडिया संवाददाता धीरेंद्र गिरि गोस्वामी ने रायपुर के बूढ़ा तालाब स्थित धरनास्थल जाकर उनकी पीड़ा जानने का प्रयास किया।
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ना सरकार सुन रही है, ना बिजली कंपनी
रायपुर में प्रदर्शन कर रहे इन विद्युत संविदा कर्मियों के मुताबिक उनको नियमित करने के साथ ही विद्युत दुर्घटनाओं के कारण जान गंवाने वाले कर्मियों के परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति दी जानी चाहिए । हड़ताल कर रहे विद्युत संविदा कर्मियों का कहना है कि लम्बे समय से वह अपनी मांगों को लेकर कई तरह के प्रदर्शन करके अपनी बात शासन तक पहुचाने का प्रयास कर चुके हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार और पॉवर कंपनी प्रबंधन उनकी बातों को अनुसना कर रहा है।

26 बिजली कर्मी दिवंगत हो चुके हैं, 100 दिव्यांग
आंदोलन कर रहे उमेश पटेल का कहना है कि छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर कंपनी में लाइन परिचारक संविदा कर्मियों को दो वर्ष संविदा की परिवीक्षा अवधि पुरनी करने के बाद नियमित करने की परंपरा रही है। किन्तु राजनीतिक कारणों से विद्युत संविदा कर्मियों का नियमितीकरण नहीं किया जा रहा है। हम दूसरे आंदोलनों की तरह सरकार के घोषणापत्र को याद नहीं दिला रहे हैं। हमारे 26 साथी विद्युत् दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवा चुके हैं,जबकि 100 दिव्यांग हो चुके हैं। इससे हमने 22 दिनों तक कार्य बहिष्कार किया था, 41 दिनों तक धरना प्रदर्शन किया ,लेकिन हमारी बातें नहीं सुनी जा रही हैं।

नई भर्तियों निकालने की जगह किया जाये नियमित
राहुल चौबे का कहना है कि सरकार हम युवाओं के साथ छल कर रही है। विद्युत् विभाग में 2 साल के बाद कर्मचारियों को नियमित कर दिया जाता है, लेकिन 6 साल बाद भी हमे नियमित नहीं किया गया है,बल्कि उसी योग्यता पर 3200 नए पदों पर नई भर्ती निकाली जा रही है। हम नई भर्तियों के खिलाफ नहीं हैं, यह चाहते है कि हमारे 2500 साथियो की मांगे पहले सुनी जानी चाहिए और विद्युत संविदा कर्मियों के नियमितीकरण और अनुकंपा नियुक्ति का मांग को मानना चाहिए।
इस मामले में पूर्व सीएम डॉ रमन सिंह का कहना है कि 3 हजार संविदा कर्मचारी धरने पर बैठे हैं,जिनकी केवल दो मांगे हैं, नियमितीकरण और काम के दौरान दिवंगत हुए हुए कर्मचारियों के स्वजनों को अनुकंपा नियुक्ति दी जाये है, लेकिन भूपेश बघेल सरकार की प्रताड़ना, दबाव और विभिन्न नोटिस मिलने के बाद भी इतनी गर्मी में युवा आंदोलन में डटे हुए हैं। इन सभी को अभी ड्यूटी में होना था, पर छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार की गलत नीतियों के कारन इन्हे संघर्ष का रास्ता चुनना पड़ा है ।
रमन सिंह का कहना है कि भाजपा के कार्यकाल में संविदा कर्मचारियों को कोई दिक्क्त नहीं हुई थी ,लेकिन कांग्रेस सरकार अपने ही जनघोषणा पत्र को भूल चुकी है। इसलिए आंदोलनकारी और विपक्ष सरकार को नींद से जगाने का प्रयास कर रहे हैं ।












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