कौन हैं सुखजिंदर सिंह रंधावा, जो पंजाब के नए सीएम बनते-बनते चरणजीत सिंह चन्नी से पिछड़ गए
चंडीगढ़, 19 सितंबर: कांग्रेस विधायक सुखजिंदर सिंह रंधावा के पंजाब के अगले मुख्यमंत्री बनने की संभावना फिलहाल खत्म हो गई है। पार्टी ने आखिरकार चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम बनाने का ऐलान कर दिया है। इससे पहले खबरें थीं कि रंधावा का नाम लगभग फाइनल हो चुका है और कांग्रेस आलाकमान के पास से सिर्फ हरी झंडी मिलने का इंतजार है। इससे पहले वरिष्ठ नेता अंबिका सोनी को भी पंजाब की कुर्सी संभालने का ऑफर मिला, लेकिन उन्होंने सिख मुख्यमंत्री की वकालत करके अपना पांव पीछे खीच लिया। इनके अलावा कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ का नाम भी आगे चल रहा था, लेकिन शायद उनके भी सिख नहीं होने के चलते बात बन नहीं पाई। उधर नवजोत सिंह सिद्धू को इस समय गांधी परिवार में जितना सम्मान मिल रहा है, उससे उनके सीएम बनने की अटकलें सबसे ज्यादा थीं, लेकिन शायद पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह की और ज्यादा नाराजगी झेलने का साहस कांग्रेस आलाकमान नहीं दिखा पाया और फिलहाल उनका पत्ता कट गया।

कौन हैं सुखजिंदर सिंह रंधावा ?
इससे पहले पंजाब के मुख्यमंत्री के तौर पर कांग्रेसियों की रेस में सबसे आगे चल रहे सुखजिंदर सिंह रंधावा कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार में जेल और सहकारित विभाग के मंत्री थे। रंधावा का परिवार काफी लंबे वक्त से कांग्रेस से जुड़ा रहा है। वे प्रदेश में कांग्रेस के उपाध्यक्ष और पार्टी के प्रदेश महासचिव भी रह चुके हैं। उनके सीएम बनने की बात लगभग तय लग रही थी, लेकिन आखिरकार उनके नाम पर आलकमान से हरी झंडी नहीं मिल पाई। 2017 के विधानसभा चुनाव में वह गुरदासपुर के डेरा बाबा नानक से विधायक चुने गए थे। वह तीन बार के एमएएल हैं और 2002, 2007 के बाद 2017 में विधायक चुने गए हैं। हालांकि, जब रंधावा को सीएम बनाने के कयास शुरू हुए थे और मीडिया वालों ने उनसे इसके बारे में पूछा था कि क्या वे भविष्य के सीएम से बात कर रहे हैं तो उन्होंने कहा था- 'आप एक कांग्रेसी से बात कर रहे हैं।'(पहली तस्वीर-रंधावा के फेसबुक पेज से)

पेशे से खुद को किसान बताते हैं रंधावा
62 वर्षीय सुखजिंदर सिंह रंधावा पंजाब के गुरदासपुर जिले के डेरा बाबा नानक तहसील के धरौली गांव के रहने वाले हैं। 2017 के चुनावी हलफनामे में संतोख सिंह रंधावा के बेटे सुखजिंदर सिंह रंधावा ने खुद को किसान बताया था और अपनी पत्नी के हाउस वाइफ होने की जानकारी दी थी। रंधावा चंडीगढ़ के एसडी कॉलेज के छात्र रहे हैं और उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से ग्रैजुएशन पूरा किया था।

सिद्धू के समर्थक बनकर कैप्टन से बगावत किया है
जब पंजाब कांग्रेस में नवजोत सिंह सिद्धू का प्रभाव बढ़ने लगा तो रंधावा ने खेमा बदल लेने में ही भलाई समझी और उन्होंने भी सिद्धू की तरह ही अपनी सरकार की नाकामियां उजागर करके उसे निशाना बनाना शुरू कर दिया था। अमरिंदर सरकार में मंत्री रहते हुए उन्होंने कांग्रेस सरकार पर 2017 के चुनावों में जनता से किए गए वादे नहीं पूरे करन का आरोप लगाना शुरू कर दिया था। पिछले कुछ समय से जबसे पंजाब कांग्रेस में विधायकों की ओर से पूर्व सीएम अमरिंदर के खिलाफ बगावत सार्वजनिक रूप से शुरू हो गया था तो वह कैप्टन के खिलाफ उस विद्रोह के सबसे मुखर विद्रोहियों में शामिल हो गए।
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अकाली दल के खिलाफ भी रहे हैं आक्रामक
इससे पहले रंधावा शिरोमणि अकाली दल के बादल परिवार और उनकी पुरानी अकाली दल-भाजपा गठबंधन सरकार के खिलाफ भी आक्रामक रुख अपना चुके हैं। 2015 में पंजाब में पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब के साथ बेअदबी का जो मामला तूल पकड़ा था और पुलिस फायरिंग में दो युवकों की मौत हुई थी, उसमें भी केस नहीं चलाने के खिलाफ इन्होंने मुद्दा उठाया था।

कितनी संपत्ति के मालिक हैं सुखजिंदर सिंह रंधावा ?
पांच साल पहले के चुनावी हलफनामे के मुताबिक सुखजिंदर सिंह रंधावा के पास अपनी 29,39,894 रुपये की चल संपत्ति थी। जबकि, उनकी पत्नी के पास 13,56,804 रुपये की चल संपत्ति थी। इसके अलावा वे 2,55,00,000 रुपये की अचल संपत्ति के मालिक थे और उनकी पत्नी के पास 60 लाख रुपये की अचल संपत्ति थी।












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