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'राज्यपाल को विधेयकों पर काम करना चाहिए...', पंजाब सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख

पंजाब की भगवंत मान सरकार और राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित के बीच जारी टकरार अब सुप्रीम कोर्ट में भी नजर आने लगी है। पंजाब विधानसभा में पास बिलों को मंजूरी देने में देरी करने को लेकर राज्यपाल के खिलाफ मान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। सोमवार यानी आज (06 नवंबर) को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि राज्यपालों को संबंधित राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों पर मामला पहुंचने से पहले ही कार्रवाई करनी चाहिए।

वहीं, सॉलिसीटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि राज्यपाल ने सभी 7 बिलों पर फैसला ले लिया है। जल्द ही सरकार को इसकी जानकारी दे दी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि राज्यपालों को थोड़ा आत्मावलोकन करने की जरूरत है। उन्हें पता होना चाहिए कि वे जनता के निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं हैं। राज्यपालों को मामला कोर्ट में आने से पहले ही कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं, मामले की अगली सुनवाई मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने 10 नवंबर तक टाल दी है।

Supreme Court

क्या है पूरा मामला?
दरअसल, राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने मौजूदा आम आदमी पार्टी (आप) के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल के दौरान पंजाब विधानसभा द्वारा पारित 27 विधेयकों में से 22 को अपनी मंजूरी दे दी है। पुरोहित और मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार के बीच हालिया विवाद तीन धन विधेयकों से संबंधित है, जिन्हें राज्य द्वारा 20 अक्टूबर को चौथे बजट सत्र के विशेष सत्र के दौरान पेश करने का प्रस्ताव था।

1 नवंबर को, पुरोहित ने मान को पत्र लिखने के कुछ दिनों बाद तीन धन विधेयकों में से दो को अपनी मंजूरी दे दी, जिसमें कहा गया था कि वह विधानसभा में पेश करने की अनुमति देने से पहले योग्यता के आधार पर सभी प्रस्तावित कानूनों की जांच करेंगे। धन विधेयक को सदन में पेश करने के लिए राज्यपाल की मंजूरी की आवश्यकता होती है।

हालांकि, 19 अक्टूबर को पंजाब के मुख्यमंत्री को लिखे अपने पहले पत्र में, राज्यपाल ने तीन धन विधेयकों को अपनी मंजूरी रोक दी थी। पुरोहित ने पंजाब राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (संशोधन) विधेयक 2023, पंजाब गुड्स एंड सर्विस टैक्स (संशोधन) विधेयक 2023 और भारतीय स्टांप (पंजाब संशोधन) विधेयक, 2023 की अपनी मंजूरी रोक दी है, जिन्हें सदन में 20-21 अक्टूबर सत्र के दौरान विधानसभा पेश किया जाना था।

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