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पंजाब में भाजपा की राजनीति का टर्निंग प्वाइंट बनेगा फिरोजपुर !

चंडीगढ़, 06 जनवरी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की फिरोजपुर रैली रद्द हो कर भी भाजपा के लिए माहौल बना गयी। पीएम की रैली जिन परिस्थितियों में रद्द हुई उस पर तीन तरफा विवाद शुरू हो गया है। भाजपा का आरोप है, "पीएम मोदी को हुसैनीवाला जाने से रोकना, शहीदे आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के सम्मान को कम करना है। फिरोजपुर सभा के लिए प्रतिकूल स्थिति बनाना, सारागढ़ी के 21 अमर शहीदों की शान में गुस्ताखी है। इसके लिए कांग्रेस सरकार जिम्मेदार है।

security lapse of pm in Firozpur will become turning point of BJPs politics in Punjab

चन्नी सरकार ने जानबूझ कर पीएम की सुरक्षा में चूक की। वह पीएम की रैली के संभावित असर से डर गयी थी इसलिए उसने इस सभा के खिलाफ साजिश की।" दूसरी तरफ कांग्रेस का कहना है कि मौसम खराब होने की वजह से सभा में कम लोग जुटे थे। इसलिए उसने पीएम का काफिला रोके जाने का बहना बना कर रैली रद्द कर दी। तीसरी तरफ किसानों का दावा है कि उनके विरोध के चलते प्रधानमंत्री मोदी को वापस लौटना पड़ा।

शहीदों को नमन करने जा रहे थे मोदी, रास्ता रोका

शहीदों को नमन करने जा रहे थे मोदी, रास्ता रोका

बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की फिरोजपुर में सभा थी। प्रधानमंत्री बुधवार की सुबह बठिंडा एयरपोर्ट पर उतरे थे। बठिंडा से उन्हें हुसैनीवाला और फिर वहां से फिरोजपुर जाना था। पीएम को बठिंडा से हेलीकॉप्टर के जरिये हुसैनीवाला जाना था। हुसैनीवाला फिरोजपुर जिले का एक कस्बा है जो पाकिस्तान की सीमा के पास है। यहां शहीदे आजम भगत सिंह,राजगुरु और सुखदेव का ऐतिहासिक स्मारक है। लेकिन बारिश और थोड़ा अंधेरा होने की वजह से हेलीकॉप्टर उड़ान भरने की स्थिति में नहीं थे। प्रधानमंत्री ने करीब बीस मिनट तक इंतजार किया। लेकिन मौसम साफ नहीं हुआ। तब उन्होंने सड़क मार्ग से हुसैनीवाला जाने का निश्चय किया। पंजाब के डीजीपी से सड़क यात्रा की सुरक्षा पर बात हुई। पंजाब पुलिस की सहमति मिलने के बाद पीएम का काफिला सड़क मार्ग से हुसैनीवाला की तरफ रवाना हुआ। बठिंडा से हुसैनीवाला की दूरी करीब 104 किलोमीटर है। जाने में करीब दो घंटे लगने वाले थे। पीएम का काफिला अभी हुसैनीवाला से करीब 30 किलोमीटर दूर था कि यात्रा में अवरोध उत्पन्न हो गया। कारकेड जब एक फ्लाईओवर पर पहुंचा तो आगे रास्ता जाम था। किसानों ने रास्ता रोक रखा था। यह प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक थी। करीब 20 मिनट तक प्रधानमंत्री फ्लाईओवर पर फंसे रहे। एक पीएम का कारकेड पहली बार ऐसी स्थिति में फंसा था। तब सुरक्षा कारणों से प्रधानमंत्री की हुसैनीवाला यात्रा स्थगित कर दी गयी। इसी आधार पर फिरोजपुर का कार्यक्रम भी रद्द कर दिया गया। पीएम वहीं से बठिंडा एयरपोर्ट लौट गये। भाजपा ने इस घटना को प्रधानमंत्री की जान पर खतरा बता कर चन्नी सरकार के खिलाफ गंभीर आरोप लगाये।

सीएम चन्नी की सफाई

सीएम चन्नी की सफाई

पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने इस मामले में सफाई दी। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री के यात्रा कार्यक्रम में अचानक बदलाव की वजह से ऐसा हुआ। हमें मालूम था कि वे हेलीकॉप्टर से जाएंगे। उनके सड़क मार्ग से जाने का कार्यक्रम आनन-फानन में बना। किसान अचानक सड़क पर आ कर बैठ गये। ट्रालियां लगा कर सड़क रोक दी। किसान शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। प्रधानमंत्री की जान पर खतरे जैसी कोई बात नहीं थी। किसानों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर मैं लाठियां नहीं चलवा सकता था। किसानों से प्रधानमंत्री को कोई खतरा नहीं था। इसलिए इस घटना को पीएम की सुरक्षा में चूक से नहीं जोड़ा नहीं जाना चाहिए। अगर पीएम को वापस लौटना पड़ा तो यह अफसोस की बात है। लेकिन चुनाव के समय ऐसा होता है। कल रात जब मैं चंढ़ीगढ़ में अपने घर लौट रहा था तब कुछ नौजवान मेरी गाड़ी के आगे बैठ गये। उन्हें अपनी नौकरी को लेकर कुछ समस्याएं थीं। मैंने उन्हें समझाया। लेकिन जब नहीं माने तो गाड़ी घुमा कर दूसरे रास्ते से लौट गया। यह लोकतंत्र है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर बल प्रयोग नहीं किया जा सकता। कभी-कभी लौटना भी पड़ता है। भाजपा के नेता इस मसले पर राजनीतिक कर रहे हैं।"

पीएम मोदी ने रैली के लिए क्यों चुना फिरोजपुर को ?

पीएम मोदी ने रैली के लिए क्यों चुना फिरोजपुर को ?

फिरोजपुर रैली होने पर जितनी भाजपा की चर्चा नहीं होती उससे अधिक अब हो रही है। सीएम चन्नी की सफाई का मतलब है कि कांग्रेस इस घटना से दबाव में आ गयी है। भाजपा ने बहुत सोच समझ कर फिरोजपुर रैली की योजना बनायी थी। फिरोजपुर, पंजाब की शौर्यगाथा की ऐतिहासिक भूमि है। यहां सारागढ़ी युद्ध के 21 अमर शहीदों का स्मारक है। सारागढ़ी की लड़ाई 12 सितम्बर 1897 में लड़ी गयी थी। सारागढ़ी उस समय भारत का हिस्सा था। अब यह गांव पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के कोहाट जिले में है। सितम्बर 1897 में अंग्रेजों ने खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र कब्जा कर लिया था। यह क्षेत्र अफगानिस्तान की सीमा से मिला हुआ है। कई अफगानी कबिलों ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ विद्रोह कर दिया। सारागढ़ी में तब ब्रिटिश भारत की सेना के रूप में 36 वीं सिख रेजिमेंट की टुकड़ी तैनात थी। इस मोर्चे पर सिर्फ 21 सिख सैनिक तैनात थे। उन्होंने करीब दस हजार अफगानी सैनिकों के खिलाफ बहादुरी से लड़ाई लड़ी। यह भारतीय इतिहास की अविस्मरमीय शौर्य गाथा है। केवल 21 सैनिकों ने दस हजार अफगानी सैनिकों को एक दिन तक आगे नहीं बढ़ने दिया। उन्होंने करीब 600 अफगानी सैनिकों को मार गिराया। वे अंतिम सांस तक लड़ते रहे और शहीद हो गये। जब ये खबर ब्रिटिश संसद में पहुंची तब सभी सांसदों ने खड़े होकर वीर सपूतों को सम्मान दिया था। (इसी घटना पर फिल्म 'केसरी' बनी है) इन शहीदों की स्मृति में अंग्रेजों ने फिरोजपुर छावनी में एक गुरुद्वारा बनवाया था जिसे सारागढ़ी गुरुद्वारा कहा जाता है। पीएम मोदी की रैली तो नहीं हुई लेकिन उन्होंन सारागढ़ी के शहीदों के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ने की कोशिश की।

हुसैनीवाला क्यों जाना चाहते थे पीएम मोदी ?

हुसैनीवाला क्यों जाना चाहते थे पीएम मोदी ?

हुसैनीवाला फिरोजपुर जिले का एक गांव है। यह फिरोजपुर से दस किलोमीटर दूर उत्तर पश्चिम में सतलुज नदी के किनारे अवस्थित है। सतलुज नदी के उस पार पाकिस्तान का 'गंडा सिंह वाला' गांव है। गंडा सिंह वाला पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के कसूर जिले का एक गांव है। पाकिस्तानी पंजाब की राजधानी लाहौर है। 23 मार्च 1931 को अंग्रेजों ने सरदार भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को लाहैर जेल में फांसी दे दी थी। भारतीय लोगों में इस बात के खिलाफ बहुत गुस्सा था। अंग्रेजों को डर था कि अगर इन शहीदों का अंतिम संस्कार सार्वजनिक रूप से किया गया तो क्रांति हो सकती है। इसलिए वे रात के अंधेरे में तीनों शहीदों के पार्थिव शरीर को लेकर हुसैनीवाला गांव आये। फिर उन्होंनो सतलुज नदी के किनारे चोरी-छिपे उनका अंतिम संस्कार कर दिया। तब यह स्थान आजादी की लड़ाई का तीर्थस्थान बन गया।

हुसैनीवाला के लिए 12 गांव देने पड़े थे पाकिस्तान को

हुसैनीवाला के लिए 12 गांव देने पड़े थे पाकिस्तान को

मुल्क बंटवारे के बाद हुसैनीवाला पाकिस्तान में पड़ गया। भारत यह पवित्र भूमि वापस पाना चाहता था। लेकिन पाकिस्तान टालमटोल करता रहा। वह बदले में अधिक जमीन चाहता था। तब भारत ने पाकिस्तान को 12 गांव दे कर हुसैनीवाला को अपने नाम कर लिया। 1968 में हुसैनीवाला को रास्ट्रीय स्मारक घोषित किया गया। फिर इस स्थान को शहीद स्मारक के रूप में विकसित किया गया और यहां सरदार भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की प्रतिमा स्थापित की गयी। इसी स्थान पर बटुकेश्वर दत्त और शहीद भगत सिंह की माता जी, विद्यावती देवी का भी अंतिम संस्कार किया गया है। हुसैनीवाला हर भारतीय के लिए पवित्र भूमि है। पीएम मोदी यहां पहुंचे तो नहीं सके लेकिन उन्होंने संवेदनाओं के तार जरूर झंकृत कर दिया। फिरोजपुर भाजपा की राजनीति के लिए टर्निंग प्वाइंट बन सकता है।

यह भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट पहुंचा पीएम मोदी की सुरक्षा में चूक का मामला, CJI से जांच की मांग

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