Farmers Protest: आंदोलन में गई 220 किसानों की जान, पंजाब सरकार ने दिए आंकड़े

नई दिल्ली, जुलाई 24: केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन 8 महीने से लगातार जारी चल रहा है। किसान संगठन तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने और एमएसपी पर कानून बनाने की मांग पर अड़े हुए हैं। इस बीच केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने शुक्रवार को बताया कि कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन के दौरान केंद्र के पास किसानों की मौत का कोई रिकॉर्ड नहीं है, लेकिन पंजाब सरकार ने राज्य के किसानों और मजदूरों की 220 मौतों की पुष्टि की है। वहीं राज्य सरकार अब तक इन किसानों और मजदूरों के परिजनों को 10.86 करोड़ रुपये मुआवजे के तौर पर दे चुकी है।

Farmers Protest

203 लोग मालवा क्षेत्र के थे, जबकि 11 (5%) मौतें माझा से और छह (2.7%) दोआबा से हुई थीं।पंजाब सरकार के आंकड़ों के हवाले से लिखा है कि 20 जुलाई तक 220 किसान और खेती करने वाली मजूदरों की मौत हो चुकी है। इनमें से 203 मालवा, 11 माझा और छह दोआबा क्षेत्र के रहने वाले थे। वहीं दूसरी तरफ संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने दावा किया है कि विरोध के दौरान 400 किसानों की मौत हुई है। पंजाब सरकार के सूत्रों ने खुलासा किया कि अधिक मौतों का सत्यापन चल रहा है।

संगरूर जिले में सबसे ज्यादा मौत

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    राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा किसान/खेत मजदूरों की मौत संगरूर जिले में हुई है, जहां पिछले आठ महीनों में ऐसी 43 मौतें हुई हैं। सरकार ने प्रत्येक मामले में 5 लाख रुपये मुआवजे की मंजूरी दी है। जिले में परिवारों को कुल 2.13 करोड़ रुपये पहले ही दिए जा चुके हैं। इसी तरफ मौतों की दूसरी सबसे बड़ी संख्या बठिंडा जिले से सामने आई, जहां 33 ऐसी मौतें हुईं और सरकार ने इन मृतक किसानों के परिजनों को कुल 1.65 करोड़ रुपये मंजूर किए।

    अब तक 10.86 करोड़ का दिया मुआवजा

    इसके अलावा मोगा में 27, पटियाला में 25, बरनाला में 17, मानसा में 15, मुक्तसर साहिब में 14, लुधियाना में 13 मामलों की पुष्टि हुई है। वहीं लगभग दो दर्जन और मृतक किसानों और खेत मजदूरों का विभिन्न जिलों में सत्यापन चल रहा है और उनमें से लगभग सभी को इस सूची में शामिल किया जा सकता है। आपको बता दें कि लगभग आठ महीनों से पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश राज्यों के हजारों किसान दिल्ली की सिंघू, टिकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन करते हुए पिछले साल पारित तीन कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। वहीं अब तक किसानों और सरकार के बीच 11 दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन कोई हल नहीं निकला है।

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