बीजेपी यूसीसी पर अड़ी, तो अकाली दल की एनडीए में वापसी नहीं?
पिछले कुछ महीनों में कम से कम तीन ऐसे मौके आए हैं, जिससे लगा कि बीजेपी और उसकी पूर्व सहयोगी शिरोमणि अकाली दल एक बार फिर से करीब आ रहे हैं। लेकिन, जबसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूनिफॉर्म सिविल कोड की आवश्यकता पर जोर दिया है, दोनों की बढ़ती नजदीकियों पर फिर से मानो ब्रेक लग गया है।
वैसे अकाली दल (एसएडी) के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने उनकी पार्टी के एनडीए में वापसी की चर्चाओं से इनकार किया है। उन्होंने इसको लेकर लग रहे कयासों को सिर्फ मीडिया की अटकलें करार दिया है।

आधिकारिक तौर पर गठबंधन की संभावना से किया जा रहा है इनकार
बादल ने चंडीगढ़ में पत्रकारों के सवाल के जवाब में कहा कि, 'हमारा बीएसपी के साथ गठबंधन है। इसलिए सवाल ही नहीं उठता।' दरअसल, उन्होंने पार्टी के जिलाध्यक्षों की बैठक बुलाई थी, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि यह स्थानीय मुद्दों से जुड़ी हुई बैठक थी। जिस तरह से बादल भाजपा के साथ जाने की अटकलों को नकारने की कोशिश कर रहे हैं, उसी तरह भाजपा के पंजाब प्रभारी विजय रुपाणी भी परोक्ष तौर पर अपनी अमृतसर यात्रा के दौरान इन संभावनाओं को नकारने की कोशिश कर चुके हैं।
अंदर चर्चा बाहर इनकार!
रुपाणी ने तो यहां तक कहा कि बीजेपी पंजाब की सभी 13 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी और जीतेगी। लेकिन, टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक अकाली दल के अंदर के लोगों का कुछ और ही कहना है। उनके मुताबिक पार्टी कोर ग्रुप ने एनडीए में वापसी पर चर्चा की है, लेकिन नेताओं ने 'सावधानी' बरतने की सलाह दी है।
अकाली और बीजेपी की ओर से बार-बार मिले हैं गठबंधन के संकेत
दरअसल, पिछले कुछ महीनों में कम से कम तीन बार ऐसे मौके आए हैं, जिससे संकेत मिला है कि बीजेपी और अकाली दल में फिर से बात बन सकती है। पहले पूर्व सीएम और सुखबीर बादल के पिता प्रकाश सिंह बादल के निधन पर पीएम मोदी उन्हें श्रद्धांजलि देने चंडीगढ़ पहुंचे। फिर 28 मई को नए संसद भवन के उद्घाटन के मौके पर विपक्षी दलों के बायकॉट अभियान को नकारते हुए अकाली दल उसमें शामिल हुआ और पिछले महीने पटना में हुई विपक्षी दलों की बैठक से भी इसने दूरी बनाए रखी।
यूसीसी की वजह से ही फंस सकता है पेच!
अकाली दल के अंदर के लोगों का यह भी कहना है कि प्रकाश सिंह बादल के निधन के बाद सारे संस्कार पूरे हो जाने पर सुखबीर बादल ने पीएम मोदी से हाल ही में मुलाकात भी की थी। उनका कहना है कि अकाली दल यूनिफॉर्म कोड का विरोध कर रहा है और इसपर आश्वासन मांग सकता है। इसके अलावा सिख कैदियों की रिहाई की भी मांग कर सकता है। इसी के बाद एनडीए में शामिल होने पर कोई फैसला लिया जा सकता है।
यूसीसी पर अकाली दल ने बनाई समितिे
इस बीच यूनिफॉर्म सिविल कोड पर सबकी राय लेने के लिए गुरुवार को पार्टी ने एक सब-कमेटी बनाई है। यह कमेटी लॉ कमीशन को यूसीसी पर अपने सुझाव देगा। पार्टी के आधिकारिक प्रवक्ता के मुताबिक, 'चार-सदस्यीय सब-कमेटी में प्रेम सिंह चंदूमाजरा, महेशिंदर सिंह ग्रेवाल, सिकंदर सिंह मालुका और दलजीत सिंह चीमा शामिल हैं। समिति को संविधान विशेषज्ञों, बुद्धिजीवियों और सिख समुदाय के नेताओं से बातचीत करने की जिम्मेदारी दी गई है।'












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