भाजपा के वरिष्ठ नेता गुलाब चंद कटारिया ने पंजाब के राज्यपाल के रूप में शपथ ली, समर्पण का संकल्प लिया
भाजपा के वरिष्ठ नेता गुलाब चंद कटारिया ने बुधवार को पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक के रूप में शपथ ली। 79 वर्षीय कटारिया इस पद पर बनवारीलाल पुरोहित का स्थान लिया।
शपथ लेने के बाद कटारिया ने राष्ट्रपति के प्रति आभार व्यक्त किया और लोगों की सेवा करने का संकल्प लिया।

कटारिया की सार्वजनिक सेवा के प्रति प्रतिबद्धता
कटारिया ने एक सवाल के जवाब में कहा, "मैं एक अच्छे लोक सेवक की तरह इसे निभाने का पूरा प्रयास करूंगा। ये पद कोई सजावट के लिए नहीं हैं। ये लोगों की सेवा के लिए हैं। मैंने अपने राजनीतिक जीवन के 40 से 45 वर्षों में सेवा को ही अपना धर्म मानकर काम किया है। यहां भी मैं कोशिश करूंगा कि आम आदमी की समस्याओं के समाधान में मैं कैसे मददगार बन सकूं। मैं उनकी बात सुनूंगा और कोई भी यहां आ सकता है।"
कटारिया ने जनता के हित के लिए सभी दलों के साथ मिलकर काम करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "शुरू से ही मेरा स्वभाव सभी के साथ समन्वय बनाकर काम करने का रहा है। मुझे लगता है कि हम भले ही अलग-अलग दलों से चुनाव लड़ रहे हों, लेकिन हमारा एकमात्र उद्देश्य लोगों की सेवा करना है। मैं उस धर्म का पालन करने का प्रयास करूंगा।"
शासन और विकास की योजनाएँ
कटारिया से जब उनकी योजनाओं के बारे में पूछा गया तो उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा करने और केंद्र और राज्य सरकार द्वारा जिला स्तर पर किए जा रहे कार्यों की समीक्षा करने की अपनी मंशा बताई। उन्होंने कहा, "निश्चित रूप से मैं सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा करूंगा, हर जिले में जाऊंगा और केंद्र और राज्य सरकार के कार्यों की समीक्षा भी करूंगा। उन्हें (कार्यों को) आगे बढ़ाने के लिए संबंधित जिला कलेक्टर को सुझाव भी दूंगा ताकि हम सामूहिक रूप से लोगों के काम को कुशल तरीके से कर सकें।"
पंजाब के राज्यपाल बनने से पहले, कटारिया ने फरवरी 2023 से असम के राज्यपाल के रूप में कार्य किया। उनकी राजनीतिक यात्रा में आठ बार विधायक रहना और शिक्षा, लोक निर्माण पंचायती राज, ग्रामीण विकास और आपदा प्रबंधन मंत्री जैसे विभिन्न मंत्री पद शामिल हैं।
13 अक्टूबर 1944 को जन्मे कटारिया ने उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय से भूगोल में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की, जहां उन्होंने कानून की भी पढ़ाई की। नये राज्यपाल के व्यापक अनुभव से पंजाब और चंडीगढ़ के लिए शासन और विकास पहलों में बहुमूल्य अंतर्दृष्टि मिलने की उम्मीद है।












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