'आप' सरकार को कुछ गैर पेशेवर, चापलूस और नकारे अधिकारियों द्वारा गुमराह किया जा रहा है: सोनी
पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार पर विपक्ष लगातार हमलावर है। इसी कड़ी में आज पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री ओ पी सोनी ने भी मान सरकार पर निशाना साधा। उ
चंडीगढ़, 24 जून 2022। पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार पर विपक्ष लगातार हमलावर है। इसी कड़ी में आज पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री ओ पी सोनी ने भी मान सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पंजाब की आप सरकार के पास विकास को लेकर कोई एजेंडा नहीं है, क्योंकि मुख्यमंत्री के आसपास काम करने वाले अधिकारी उन्हें गुमराह कर रहे हैं। ये अफसर पूरी तरह से गैर पेशेवर, चापलूस और नकारे हैं। मीडिया में सैनिटाइजर की खरीद और मुख्यमंत्री सेहत बीमा योजना को लेकर चल रही कुछ खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए, सोनी ने कहा कि वह पहले ही अपने वकीलों से मीडिया को सरकारी दस्तावेज लीक करने वाले सभी अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने के लिए कह चुके हैं, तो उनके बेदाग राजनीतिक कैरियर को खत्म करने की साजिश है।

'पूर्व मंत्रियों के खिलाफ झूठे और निराधार आरोप लगा रहे हैं'
पंजाब के पूर्व उप मुख्यमंत्री ओपी सोनी ने सीएम भगवंत मान से सेहत विभाग के ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्य करने को कहा है जो बीते 3 महीनों से कुछ नहीं कर रहे और सिर्फ अपने राजनीतिक आकाओं के सामने नंबर बनाने के लिए पूर्व मंत्रियों के खिलाफ झूठे और निराधार आरोप लगा रहे हैं। पांच बार विधायक, उप मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्री रहे सोनी ने कहा कि मीडिया के एक के एक वर्ग की खबर के विपरीत इस सम्बंध में कोई भी अनियमितता नहीं हुई। सेहत विभाग द्वारा सैनिटाइजर 160 रुपये के हिसाब से खरीदे गए थे, जिस कॉन्ट्रैक्ट के रेट की स्पेसिफिकेशन कंट्रोल ऑफ़ स्टोर्स, उद्योग विभाग द्वारा दी गई थी। इन स्पेसिफिकेशनों को सेहत विभाग के माहिरों की तकनीकी कमेटी द्वारा मंजूरी दी गई थी।

'महामारी कानून 2020 के मद्देनजर ऑर्डर देने पड़े थे'
महामारी कानून 2020 के मद्देनजर हमें हेल्थ वर्करों और डॉक्टरों के लिए अति जरूरत के मद्देनजर ऑर्डर देने पड़े थे। जबकि चुनाव विभाग के लिए सैनिटाइजरों की खरीद ओपन टेंडर प्रणाली के तहत मेरे निर्देशन में हुई थी। यह इसलिए किया गया, क्योंकि स्पेसिफिकेशन अलग-अलग थी और इस दौरान कोई एमरजैंसी भी नहीं थी और चुनाव होने में 1 महीने से ज्यादा का वक्त था। फिर भी मैंने प्रयास करते हुए सरकारी खजाने को बचाया और 54 रुपए का न्यूनतम रेट हासिल किया। इसके अलावा, उनके कार्यकाल में हेल्थ वर्कर्स और डॉक्टरों के लिए तीसरी लहर के मद्देनजर पूरे पंजाब में करीब 2.5 करोड रुपए से अधिक की सेनेटाइजर की खरीद नहीं हुई। इस दिशा में 200 करोड़ रुपये या 500 करोड़ रुपये का जिक्र करते हुए दिखाई जा रही खबरें पूरी तरह से गलत हैं। खरीद को लेकर विभागीय जांच भी हो चुकी है, जिसमें कोई भी पक्षपात नहीं पाया गया व इसमें से एक जांच नई सरकार द्वारा भी की गई थी।

'कानून के मुताबिक हर कदम उठाने को कहा गया'
वरिष्ठ कांग्रेस नेता ओपी सोनी ने आयुष्मान भारत - मुख्यमंत्री सेहत बीमा योजना को लेकर कहा कि एसबीआई के अधिकारियों और आईएमए के नुमाइंदों के साथ कई स्तर पर विचार विमर्श किया गया। बीमा कंपनी द्वारा निजी अस्पतालों के दावों को सेटल करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया जा रहा था। 24 दिसंबर को सीएमओ से आधिकारिक मंजूरी मिलने के बाद निजी अस्पतालों ने नए मरीजों को दाखिल करना पूरी तरह बंद कर दिया था। इस दिशा में आदेश वापस लिए गए और स्टेट हेल्थ एजेंसी को ब्लैक लिस्ट करने, दवाओं के नुकसान को रिकवर करने के लिए नोटिस देने और योजना जारी रखने के लिए बनते कदम उठाने व पंजाब के लोगों को और समस्या ना झेलनी पड़े, इसके लिए कानून के मुताबिक हर कदम उठाने को कहा गया।

27 दिसंबर को जारी किया गया कारण बताओ नोटिस
नोटिस देने और योजना जारी रखने के बाद राज्य के स्वास्थ्य सचिव ने भी 27 दिसंबर को ब्लैक लिस्टिंग व बनती कार्रवाई करने का कारण बताओ नोटिस जारी किया। जिसके बाद 29 दिसंबर को स्टेट हेल्थ एजेंसी के सीईओ द्वारा टर्मिनेशन के आदेश जारी कर दिए गए। अब अचानक तत्कालीन वित्त सचिव केएपी सिन्हा ने सीधे तौर पर कंपनी के साथ बातचीत शुरू की और उन्हें कई लालच दिया, लेकिन कंपनी ने आगे कोई भी इच्छा नहीं जताई। सीधे तौर पर उन्होंने पूरा प्रोजेक्ट हाईजैक कर लिया और स्टेट हेल्थ एजेंसी के सीईओ को एक तोता बना लिया। तत्कालीन वित्त सचिव केएपी सिन्हा ने कंपनी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की और उन्होंने एसएचए के सीईओ को भी उनके आदेशों का पालन नहीं करने दिया, जो सख्त कार्रवाई की सिफारिश करते थे।

ओपी सोनी ने लगाए गंभीर आरोप
सोनी ने पंजाब के मौजूदा स्वास्थ्य सचिव पर पूरी तरह से लापरवाही और कुप्रबंधन करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नेशनल हेल्थ अथॉरिटी ने 15 जून, 2022 के अपने पत्र में सीधे तौर पर एसबीआई जनरल को टर्मिनेट करने संबन्धी कार्रवाई की प्रशंसा की थी और विभाग की आलोचना की थी, जिसमें राज्य द्वारा विश्वास के तहत बीमा प्रदाता के बगैर इस स्कीम को लागू करने के बावजूद अभी तक स्कीम के प्रदर्शन में कोई सुधार नहीं हुआ व निजी अस्पतालों में सप्ताहिक दाखिले 9000 से 1000 पहुंच गए।

'खामियां ढूंढने में समय बर्बाद कर रही सरकार'
ओपी सोनी ने कहा कि ऐसे में पिछली सरकार में खामियां ढूंढने के लिए समय बर्बाद करने की बजाय स्वास्थ्य सचिव को बताना चाहिए कि इन मुद्दों पर उन्होंने क्या किया। सरकार ने क्लेम क्यों नहीं सेटल किए और निजी अस्पतालों को अदा किया क्यों नहीं की। यह अधिकारी आप सरकार की नकारी संपत्ति है, सोनी ने सेनेटाइजर व मुख्यमंत्री सेहत बीमा योजना की किसी केन्द्रीय एजेंसी से समयबद्ध जांच करवाए जाने की मांग की, जो कुछ अधिकारियों द्वारा स्केंडल प्रतीत होता है, जिसके जरिए वे राज्य के खजाने को करीब 100 करोड़ रुपये का चूना लगा रहे हैं।
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