पंजाब विधानसभा चुनाव: कांग्रेस का नया चुनावी फॉर्मूला, जानिए क्या है 111 के पीछे की सियासी गणित
चुनाव आयोग की ओर से विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद चुनावी राज्यों में आचार संहिता लागू हो गई है। पंजाब कांग्रेस अब पूरी तरह से विधानसभा चुनाव की रणनीति तय करने में जुट गई है।
चंडीगढ़, 8 जनवरी 2022। चुनाव आयोग की ओर से विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद चुनावी राज्यों में आचार संहिता लागू हो गई है। पंजाब कांग्रेस अब पूरी तरह से विधानसभा चुनाव की रणनीति तय करने में जुट गई है। अब कांग्रेस ने नया चुनावी फ़ॉर्मूला अपनाया है, इसी के तहत अब पंजाब कांग्रेस चुनावी रणनीति तैयार कर रही है। विधानसभा चुनाव के तारीखों के ऐलान का पंजाब के मख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने इस्तकबाल किया है। उन्होंने चुनाव आयोग के निर्देशों का स्वागत किया है, अभी तक सिर्फ जनता के लिए काम कर रहे थे। अब चुनावों की तैयारियों में जुटेंगे। चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा कि 111 दिनों के लिए मुख्यमंत्री क़ाबिल समझने के लिए पंजाब के लोगों और कांग्रेस का शुक्रगुज़ार हूं।

कांग्रेस का नया चुनावी फॉर्मूला
पंजाब कांग्रेस के चुनावी फॉर्मुला कुछ इस तरह तैयार किया गया है, चरणजीत सिंह चन्नी ने बतौर मुख्यमंत्री 111 दिन का कार्यकाल रहा। अब कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी 111 का सियासी समीकरण तैयार किया है, उन्होंने कहा कि पंजाब में चरणजीत सिंह चन्नी सीएम हमारा चेहरा हैं। वहीं पंजाब में बतौर संगठन के मुखिया के नवजोत सिंह सिद्धू हमारा चेहरा हैं। चरणजीत सिंह चन्नी एक (1) और नवजोत सिंह सिद्धू एक (1) दोनों मिलाकर 1 और 1 मिलकर 11 हो गए। कैंपेन कमेटी प्रमुख के तौर पर सुनील जाखड़ हमारा चेहरा होंगे। इन तीनों मिलाकर 111 हो गए। पंजाब कांग्रेस विधानसभा चुनाव में नेता और कार्यकर्ताओं को एक साथ लेकर चलने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस आलाकमान सीएम चन्नी, पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धू और कांग्रेस के कैंपेन कमेटी के अध्यक्ष सुनील जाखड़ को साथ लेकर चलना चाहती है।
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तीन नेताओं के सहारे कांग्रेस
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू लगातार मांग कर रहे हैं कि सीएम पद के दावेदार की घोषणा की जाए। हालांकि कांग्रेस आलाकमान ने चुनाव के बाद सीएम पद की घोषणा करने की बात कही है, पार्टी आलाकमान का मानना है कि विधायकों के समर्थन के मुताबिक सीएम चुनने में आसानी होगी। सियासी जानकारों के मुताबिक कांग्रेस अलाकमान इसलिए सीएम पद के दावेदार की घोषणा नहीं करना चाहती है। क्योंकि पार्टी में गुटबाज़ी नहीं हो और जातीय समीकरण बना रहे। क्योंकि चरणजीत सिंह चन्नी दलित वोट बैंक का नेतृत्व कर रहे हैं। वहीं नवजोत सिंह सिद्धू सिख मतदाताओं का नेतृत्व कर रहे हैं। 38 फ़ीसदी हिंदू वोट बैंक का नेतृत्व सुनील जाखड़ कर रहे हैं। ऐसे किसी एक को सीएम उम्मीदवार घोषित करने पर पार्टी में गुटबाज़ी हावी हो सकती है। कांग्रेस फिलहाल किसी भी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहती है।

सिद्धू दिला रहे उम्मीदवारों को भरोसा
नवजोत सिंह सिद्धू अपने चुनावी दौरे के दौरान कुछ विधानसभा सीटों पर बिना किसी से चर्चा किए हुए उम्मीदवारों को टिकट दिलाने का भरोसा भी करते हुए नज़र आ रहे हैं। सिद्धू पूरी प्लानिंग के तहत सीएम चन्नी पर सवालिया निशान लगाते आ रहे है ताकि वह खुद को उनसे (चन्नी) ज्यादा काबिल बता सके। खुद को सीएम चेहरा घोषित कराने की कोशिश कर रहे हैं। नवजोत सिंह सिद्धू ज़्यादा से ज़्यादा टिकट अपने क़रीबी उम्मीदवारों को दिलाने की कोशिश में ताकि चुनाव के बाद उन्हें ज़्यादा विधायकों का समर्थन ले कर खुद को सीएम के तौर पर प्रोजेक्ट कर सकें। बतौर प्रदेश अध्यक्ष वह अपने क़रीबी उम्मीदवारों को टिकट दिलाने के लिए आलाकमान पर दबाव भी बना रहे हैं।
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