लोग प्लास्टिक न इस्‍तेमाल करें, इसलिए कपड़े के थैले बना रहीं ये बालिकाएं, 5000 फ्री बांटेंगी

बरनाला। देशभर में सिंगल यूज प्लास्टिक के प्रयोग पर पाबंदियों की खबर आ चुकी है। हालांकि, अब भी बहुत-से लोग अपने कामों में सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्‍तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में लोगों को जागरुक करने के लिए बरनाला के गांधी आर्य स्कूल में एक सराहनीय पहल शुरू की गई है। यहां छात्राएं कपड़े के थैले तैयार कर रही हैं। ऐसे लिफाफा-नुमा थैलों को स्‍कूल-प्रबंधन लोगों में मुफ्त बंटवाएगा।

प्लास्टिक छुड़ाने के लिए कपड़े के थैले

प्लास्टिक छुड़ाने के लिए कपड़े के थैले

गांधी आर्य स्कूल की शिक्षिका ने बताया कि, थैले बनाने के लिए पर्दे लगाने वाला कपड़ा पर्यावरण प्रेमियों और समाज सेवियों के सहयोग से खरीदा गया, और उसी कपड़े से यहां सिलाई सीख रही छात्राएं थैले तैयार कर रही हैं। आने वाले चार-पांच दिनों में पहले चरण के थैले बांटे जाएंगे। शिक्षिका ने कहा कि, चूंकि, सरकार ने सिंगल यूज प्लास्टिक के लिफाफों पर 1 जुलाई से प्रतिबंध लगा दिया है। ऐसे में लोग प्लास्टिक के लिफाफों का प्रयोग अब न करें, इसलिए हमने यह पहल शुरू की।

सिलाई के साथ-साथ समाजसेवा भी हो रही

सिलाई के साथ-साथ समाजसेवा भी हो रही

छात्राओं ने कहा कि, अभी 5000 थैले बनाए जाएंगे, फिर वे बाजार में सामान लाने वाले लोगों मुफ्त बांटे जाएंगे। गांधी आर्य स्कूल के प्रबंधन के मुताबिक, उन्‍होंने एक लाख थैले बांटने का लक्ष्य रखा है। एक थैला करीब 35 रुपए का पड़ रहा है।

ऐसे 1 लाख थैले बांटने का टारगेट रखा है

ऐसे 1 लाख थैले बांटने का टारगेट रखा है

एक पर्यावरणविद ने कहा कि, इस पहल के लिए गांधी आर्य स्कूल बधाई का पात्‍र है। हमें खुशी है कि पर्यावरण को बचाने के लिए गांधी आर्य स्कूल के शीला रानी सिलाई सेंटर में छात्राओं द्वारा थैले बनाए जा रहे हैं, जिन्हें मुफ्त बांटा जाएगा। स्कूल के प्रबंधन और लड़कियों की कोशिश वाकई सराहनीय की है।

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