Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

पोलैंड में नरसंहार पीड़ितों की संपत्तियां लौटाने के खिलाफ कानून से तनाव

नई दिल्ली, 03 अगस्त। होलोकास्ट और कम्युनिस्ट सरकारों के दौरान जिन लोगों की संपत्तियों को छीन लिया गया था, उन्हें वापस पाने की राह में बड़ी बाधा माना जा रहा एक कानून पोलैंड की संसद से जल्दी ही पास हो सकता है.

Provided by Deutsche Welle

पिछले हफ्ते अमेरिका ने कहा कि यूरोप में पोलैंड ही ऐसा देश है जो नात्सी नरसंहार के दौरान यातनाएं झेलने वाले परिवारों की संपत्तियां लौटाने या मुआवजा देने की प्रतिबद्धता से पीछे हट रहा है. हालांकि पोलिश नेता इन आलोचनाओं को खारिज करते हैं.

क्या है कानून?

प्रस्तावित कानून इसी महीने से लागू हो सकता है. इस कानून को इस्राएल भी खारिज कर चुका है. यदि यह कानून पास होता है तो संपत्ति पर दावा करने पर 30 वर्ष की सीमा लागू हो जाएगी.

इसका अर्थ होगा कि कम्युनिस्ट शासन के दौरान जो संपत्तियां छीनी गई थीं, उन पर मौजूदा दावे भी खारिज हो जाएंगे. यह कानून पोलिश, यहूदी और अन्य कई तबकों को प्रभावित करेगा.

पोलैंड का कहना है कि यह कानून इसलिए बनाया जा रहा है क्योंकि संपत्तियों के दावों में कई फ्रॉड और अनियमितताएं पाई गई हैं. अधिकारियों के मुताबिक कई बार मकानों में रह रहे लोगों को निकालना पड़ा या वे प्रॉपर्टी डीलरों के हाथों में चले गए.

अधिकारियों का कहना है कि संपत्ति पर अधिकार के दावे अब भी संभव होंगे, बस उसके लिए अदालत के जरिए दावा करना होगा और किसी भी राष्ट्रीयता के लोग ये दावे कर सकेंगे.

पोलैंड के दावे अधूरे

अमेरिका और इस्राएल इन तर्कों से सहमत नहीं हैं. इस्राएल ने तो यहां तक कहा है कि यह कानून पोलैंड के साथ उसके संबंधों को प्रभावित कर सकता है.

एक अमेरिकी अधिकारी ने पिछले हफ्ते समाचार एजेंसी एपी को बताया, "हम इस बात से निराश हैं कि पोलैंड की सरकार और विपक्ष दोनों ही जानबूझकर संपत्ति की वापसी से अक्सर पीछे हटते दिखते हैं. हम चाहेंगे कि पोलिश अधिकारी कम से कम इतना संशोधन कानून में जरूर करे कि जो मौजूदा दावे हैं, वे जारी रहें और उनकी प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी हो."

तस्वीरों मेंः हिमलर की खूनी डायरी

वर्ल्ड जूइश रेस्टीट्यूशन ऑर्गनाइजेशन और वर्ल्ड जूइश कांग्रेस ने भी पोलैंड की सरकार से मांग की है कि एक ऐसा कानून या प्रक्रिया बनाई जाए जो समस्या को समग्र दृष्टि से देखे और मुआवजे के मामलों को समय पर हल करे.

अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने छह ऐसे देशों की पहचान की है जहां मुआवजों के दावों को अब भी पूरी तरह निपटाया नहीं गया है. लेकिन अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक उन छह देशों में से सिर्फ पोलैंड ही है जो पीछे हट रहा है. बाकी देश हैं क्रोएशिया, हंगरी, लातविया, लिथुआनिया और रोमानिया.

विवाद का इतिहास

दूसरे विश्व युद्ध से पहले पोलैंड में यूरोप की सबसे बड़ी यहूदी आबादी रहती थी, जिनकी संख्या लगभग 35 लाख थी. नात्सी जर्मनी के दौरान हुए नरसंहार में इस आबादी का बड़ा हिस्सा मारा गया था. जर्मनी के पोलैंड पर कब्जे के दौरान बड़ी संख्या में यहूदी लोगों की संपत्तियों को उनसे छीन लिया गया था.

युद्ध के बाद जब देश में कम्युनिस्ट सरकार बनी तो उसने भी वॉरसा और अन्य शहरों में यहूदियों से इतर दूसरे लोगों की संपत्तियां भी छीनीं. 1989 में जब कम्युनिस्ट शासन का अंत हुआ तो संपत्तियों पर दोबारा दावे के रास्ते खुले. इनमें से ज्यादातर पोलिश लोगों ने ही किए थे.

देखिएः ऐन फ्रैंक की कहानी

यूरोप में पोलैंड ही एक ऐसा देश है जिसने सरकार द्वारा छीनी गई निजी संपत्ति के बदले कोई मुआवजा नहीं दिया है. सिर्फ सामुदायिक यहूदी संपत्तियों जैसे यहूदी धर्मस्थलों, प्रार्थना स्थलों और कब्रिस्तानों को या तो लौटाया गया या फिर उनके लिए मुआवजा दिया गया.

अब भी देश में बड़ी संख्या में ऐसे दावे शेष हैं जिनका निपटारा नहीं हो पाया है. यह मुद्दा अक्सर देश में राजनीतिक रंग भी लेता रहा है. इसके अलावा अमेरिका और इस्राएल से तनाव का कारण भी बनता रहा है.

रिपोर्टः विवेक कुमार (एपी)

Source: DW

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+