टॉपर घोटाला: SIT ने नाबालिग रूबी को बनाया अपराधी?
पटना। शिक्षा विभाग में हुए घोटाले और स्टेट टॉपर बनाए जाने वाले रैकेट में शामिल सभी लोगों को एसआईटी टीम ने उजागर कर दिया है। पर रैकेट में शामिल लोगों का नाम भले ही चर्चा में रहे या न रहे लेकिन आर्ट्स टॉपर रूबी राय का नाम सबसे चर्चित रहा।
टॉपर बनाने के लिये रूबी से की गई थी बड़ी डिमांड

और इसी चर्चित नामों की वजह से एसआईटी की टीम ने उसे एक खूंखार अपराधी बनाते हुए बेउर जेल पहुंचा दिया। लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिरकार रूबी को जेल क्यों भेजा गया जबकि वह नाबालिग लड़की है। उसे जुवेनाइल कोर्ट के सामने पेश करना चाहिए था लेकिन पुलिस के द्वारा ऐसा नहीं किया गया।
कम उम्र के जाल में फस सकती है एसआईटी
जिस तरह से एसआईटी टीम द्वारा रूबी राय को गिरफ्तार करते हुए पूछताछ किया गया और फिर जेल भेज दिया गया इस पर अब कई तरह के सवाल उठने लगे हैं। अब लोग इसे जुवेनाइल एक्ट का उल्लंघन बता रहे हैं। तो इस मामले को लेकर प्रयास संस्था ने एक संवाददाता सम्मेलन करते हुए कहा कि रूबी राय की गिरफ्तारी मामले में बाल अधिकार के साथ-साथ जेजे एक्ट का भी उल्लंघन हुआ है।
स्टेट टॉपर घोटाले मामले में पटना पुलिस के काम करने के तरीके को लेकर प्रयास राष्ट्रीय बाल संरक्षण को भी सूचित करने जा रही है। साथ ही प्रयास के एस्टेट प्रोग्राम डायरेक्टर सुरेश कुमार ने यह कहा कि वह जल्द ही इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर करेंगे।
जानिए क्या कहता है जेजे एक्ट
- सेक्शन 74 के अंतर्गत किसी भी अवस्था में किशोरी की पहचान उजागर नहीं की जानी चाहिए।
- पुलिस प्रशासन और निगरानी के हाथ में किशोरी का मामला नहीं जाना चाहिए था।
- धारा 10 (1) के तहत किशोरी को जेल में नहीं भेजा जा सकता है।
- किशोरी के नाम से वारंट जारी नहीं किया जा सकता है और ना ही गिरफ्तारी जैसे शब्द का इस्तेमाल किया जा सकता है।
पटना पुलिस के द्वारा जे जे एक्ट का उल्लंघन करते हुए यह किया गया
- किशोरी की पहचान उजागर की गई।
- किशोरी से महिला पुलिस इकाई के बजाए एसआईटी ने मामले को हैंडल किया।
- बाल संरक्षण गृह के बजाए किशोरी को जेल भेज दिया गया।
- किशोरी के नाम अरेस्ट वारंट जारी किया गया।












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