नीतीश कुमार के करीबी विधायक पर नियुक्ति घोटाले का आरोप
पटना। बिहार में जब से महागठबंधन की सरकार बनी है। तबसे गठबंधन में शामिल तीन दल जेडीयू-आरजेडी और कांग्रेस के विधायकों द्वारा की गई कुछ ऐसी काली करतूतें सामने आ रही हैं। जिसमें सरकार का सर शर्म से नीचे झुक गया है। तो कई पर पार्टी के द्वारा कार्रवाई भी की गई है। इसी शृंखला में एक और विधायक का नाम सामने आया है, जिन पर नियुक्ति घोटाले का अरोप है।

ये आरोप है जदयू विधायक मेवालाल चौधरी पर, जो सबौर कृषि विश्वविद्यालय में बतौर कुलपति के पद पर कार्यरत थे। उनके कार्यकाल में वर्ष 2011 में व्याख्याता के पद पर न्युक्ति निकाली गई थी। जिसमें विश्वविद्यालय नियुक्ति के नाम पर गड़बड़ घोटाला करते हुए 80% से ज्यादा नौकरियां बिहार के बाहर के छात्रों को दे दी गईं।
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नियुक्ति को देखते हुए पक्ष विपक्ष की दोनों पार्टियो के बीच घमासान होने लगा। जिसने यह आरोप लगाया गया की पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेशन के नाम पर छात्रों के साथ शोषण किया गया है। पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के आधार पर जिन छात्रों की ऐकेडमिक अंक कम थे उन्हें पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन और साक्षात्कार में 100% अंक दिया गया। जबकि पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन आयोजित की नहीं कराया गया। जिन छात्रों का ऐकेडमिक क्वॉलिफ़िकेशन बढ़िया थी उन्हें साक्षात्कार और पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन में 1% से भी कम अंक मिले।
वहीं इस साक्षत्कार में ऐसे लोगों को रखा गया था, जिनके रिश्तेदार अभ्यार्थी थे। वहीं नियुक्ति में इस तरह की धांधली को देखते हुए छात्रों ने आरटीआई के जरिए कॉलेज से जानकारी मांगी तो कॉलेज के द्वारा 3 वर्षों तक टालमटोल करते हुए आधी अधूरी जानकारी दी गई।
इस नियुक्ति घोटाले को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने आरोप लगाया है कि इसमें जमकर पैसे का खेल तत्कालीन कुलपति के द्वारा किया गया है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि सबौर कृषि विश्वविद्यालय के साथ-साथ पटना स्थित अरबी फारसी विश्वविद्यालय और संस्कृत विश्वविद्यालय में भी नियुक्ति के दौरान जमकर घोटाला हुआ है।
हालांकि इन घोटालों पर सरकार अब तक चुप बैठी है। इस घोटाले के बारे में जब जदयू के विधायक मेवालाल चौधरी से बातचीत की गई तो उन्होंने इन सभी बातों को टाल मटोल करते हुए फाईल एकत्रित कर मामले की जानकारी देने की बात कही।












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