नेपाल की कारस्तानी से बिहार में बाढ़ के खतरे पर गरमाई सियासत, परेशान नीतीश सरकार ने केंद्र से मांगी मदद
पटना। बिहार में मोतिहारी के सीमावर्ती क्षेत्र में गंडक बांध के तटबंध की मरम्मत के काम को नेपाल के अधिकारियों ने रोक दिया और दो सप्ताह से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद यह मामला अभी तक सुलझ नहीं पाया है। बाढ़ को रोकने के लिए मानसून से पहले मरम्मत का काम हो जाना चाहिए था लेकिन वह नहीं सका है। मानसून बिहार में प्रवेश कर चुका है और तटबंध का काम पूरा नहीं होने से प्रदेश में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। नीतीश सरकार इस मामले को लेकर परेशानी में फंस गई है। प्रदेश के जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा ने कहा कि स्थानीय इंजीनयरों और डीएम ने नेपाल के अधिकारियों से बात की लेकिन विवाद का समाधान नहीं निकल पाया है। इस हालात के बारे में केंद्रीय विदेश मंत्रालय को मैं पत्र लिख रहा हूं। अगर यह विवाद समय से नहीं सुलझाया गया तो बिहार का बड़ा इलाका बाढ़ में डूब सकता है।
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गंडक बांध के रखरखाव के काम को नेपाल ने रोका
मंत्री संजय कुमार झा ने कहा कि नेपाल गंडक बांध पर चल रहे तटबंध की मरम्मत के काम को होने नहीं दे रहा है। यह बांध लाल बकिया नदी पर है जो नो मैंस लैंड में आता है। यही नहीं, नेपाल ने कुछ अन्य इलाकों में भी तटबंध की मरम्मत के काम को रोका है। पहली बार नेपाल की तरफ से ऐसी समस्या पैदा की गई है। इस वजह से मरम्मत के लिए लोग और सामग्री को तटबंध तक ले जाने में बाधा हम झेल रहे हैं। अगर हमारे इंजीनयरों तक बाढ़ को रोकने वाली सामग्री नहीं पहुंचाई गई तो बांध की मरम्मत का काम प्रभावित होगा। मंत्री ने कहा कि नेपाल में भारी बारिश की वजह से अगर गंडक नदी का जलस्तर ऊपर उठा तो इससे प्रदेश में बाढ़ की गंभीर समस्या पैदा हो जाएगी। गंडक बांध में 36 गेट हैं जिनमें से 18 नेपाल में हैं। जहां तटबंध मरम्मत की सामग्री हैं उस क्षेत्र में नेपाल ने बैरियर लगा दिए हैं। पहले कभी भी ऐसा नहीं हुआ।

मानसून से पहले नहीं हो सकी तटबंध की मरम्मत
नेपाल ने लाल बकिया नदी पर तटबंध मरम्मत के काम को रोक दिया, इसका खुलासा तब हुआ जब मोतिहारी के डीएम शीर्षत कपिल अशोक ने इस विवाद को सुलझाने के लिए जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और बिहार सरकार को लिखा। मानसून से पहले हर साल गंडक बांध की मरम्मत का काम होता है। इस साल भी लाल बकिया नदी पर भारत नेपाल सीमा पर यह काम चल रहा था कि नेपाल के अधिकारियों ने यह कहते हुए काम को जबर्दस्ती रुकवा दिया कि वह इलाका उनके देश के क्षेत्राधिकार में आता है। डीएम ने यह भी बताया कि विवाद पर नेपाल के अधिकारियों के साथ बैठक भी हुई जिसका कोई नतीजा नहीं निकला और यह काम रुका पड़ा है। इस बारे में डीएम ने बिहार सरकार को भी अवगत कराया और विवाद को जल्द से जल्द सुलझाने को कहा।

राजद नेता तेजस्वी यादव ने की आलोचना
इसके बाद बिहार सरकार के मंत्री संजय कुमार झा ने बताया कि इस बारे में देश के विदेश मंत्रालय को पत्र लिख रहे है और अगर तटबंध की मरम्मत का काम नहीं हुआ तो बिहार के एक बड़े इलाके के पानी में डूबने का खतरा है। प्रदेश सरकार के कदम की आलोचना करते हुए राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि नीतीश सरकार सारी जिम्मेदारी केंद्र पर डालने की कोशिश कर रही है। सरकार ने विदेश मंत्रालय को मानसून के आने के बाद पत्र लिख रही है। बिहार के पूरे उत्तरी क्षेत्र में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।

नो मैंस लैंड पर नेपाल कर रहा विवाद
नेपाल ने जिस इलाके में लाल बकिया नदी के तटबंध के काम को रुकवाया है वह मोतिहारी डिस्ट्रिक्ट हेडक्वार्टर से 45 किलोमीटर दूर उत्तर-पश्चिम की तरफ भारत-नेपाल सीमा पर है। लाल बकिया नदी नेपाल में स्थित हिमालय से निकलती है और पूर्वी चंपारण के बलुआ गुबाड़ी पंचायत से होकर बिहार में प्रवेश करती है। जब नेपाल के पहाड़ों में भारी बारिश होती है तो लाल बकिया नदी में उफान आ जाता है इसलिए हर साल मानसून से पहले इसके तटबंध के रखरखाव और मजबूती के लिए मरम्मत का काम होता है। नेपाल ने इस बार मानसून आने से पहले ही इस काम को रुकवा दिया। मानसून बिहार में आ चुका है और अभी तक नेपाल के अड़ंगे की वजह से तटबंध का काम पूरा नहीं हो सका है। नेपाल पहली बार सीमा पर नो मैंस लैंड के इलाके में अपना दावा कर रहा है। इसी महीने नेपाल ने संसद से एक ऐसे विवादित राजनीतिक नक्शे को पास किया है जिसमें उसने भारत के तीन क्षेत्रों को अपने अधिकार में दिखाया है। सीमा पर चीन के साथ बढ़े तनाव के बीच नेपाल के साथ भी भारत का रिश्ता मधुर नहीं रह गया है।












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