सहनी ने BJP ही नहीं अमित शाह को किया टारगेट, पार्टी नेताओं की बढ़ी बेचैनी, क्या होगा अगला कदम ?
बिहार मचे सियासी घमासान में विकासशील इंसान पार्टी के सुप्रीमो मुकेश सहनी का सबकुछ दांव पर लग गया।
पटना, 26 मार्च 2022। बिहार मचे सियासी घमासान में विकासशील इंसान पार्टी के सुप्रीमो मुकेश सहनी का सबकुछ दांव पर लग गया। भारतीय जनता पार्टी ने मुकेश सहनी को ऐसा झटका दिया कि सहनी की सियासी नांव डूबने की कगार पर आ गई है। ग़ौरतलब है कि 21 जुलाई को मुकेश सहनी का टर्म भी ख़त्म हो रहा है। इसी कड़ी में मुकेश सहनी की बयानबाज़ी से बिहार में सियासी पारा चढ़ गया है। इसके साथ ही भाजपा नेताओं की बेचैनी भी बढ़ गई है कि सहनी क्या पोल खोलने वाले हैं। भाजपा-वीआईपी विवाद के बीच अमित शाह के बिहार दौरे को लेकर भी सियासी हलचल बढ़ी हुई है। अटकलों का बाज़ार गर्म है, कई तरह के क़यास लगाए जा रहे हैं।

अमित शाह पर सहनी ने साधा निशाना
बिहार सरकार के मंत्री और विकासशील इंसान पार्टी के सुप्रीमो मुकेश सहनी के दावे से भाजपा नेताओं में हलचल मची हुई है। सहनी ने ना सिर्फ भाजपा सीधे अमित शाह को ही टारगेट पर ले लिया है। उन्होंने कहा कि एनडीए गठबंधन का हिस्सा बन्ने से पहले मेरी भाजपा से जो डील हुई थी इसका खुलासा कर दिया तो देश के लिए ठीक नहीं होगा। अमित शाह से डील हुई थी उन्हें पता है, इसका ख़ुलासा अभी नहीं करूंगा। इसके साथ ही सहनी ने कहा कि हमारे बीच 11 सीटों को लेकर डील के बारे में किसी को जानकारी नहीं है। इस डील के वक़्त कमरे के बाहर की दीवारों के पास भी किसी को खड़ा रहने की इजाज़त नहीं थी। उनहोंने कहा कि निषाद समाज के लिए एससी या एसटी कैटेगरी में आरक्षण और जातीय जनगणना की मांग की वजह से भाजपा नाराज़ हुई है। मेरे पीछे बड़ा जन समर्थन है यह भारतीय जनता पार्टी को पता चल जाएगा।

बोंचहा सीट की वजह से हुई तकरार
विकासशील इंसान पार्टी के सुप्रीमो मुकेश सहनी के पार्टी के तीनों विधायक भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो जाएंगे यह किसी ने भी नहीं सोंचा था। लेकिन तीनों पार्टी के भाजपा में शामिल होने से मुकेश सहनी को तगड़ा झटका लगा है। आपको बता दें कि 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान सहनी ने 11 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे जिनमें से सिर्फ़ चार प्रत्याशियों को कामयाबी मिल पाई थी। विकासशील इंसान पार्टी के एक विधायक मुसाफिर पासवान की मौत के बाद वीआईपी के पास तीन विधायक (राजू सिंह, मिश्रीलाल यादव और स्वर्णा सिंह), जो कि अब भाजपा का हिस्सा बन चुके हैं। बोंचहा विधानसभा सीट पर उपचुनाव में अपने उम्मीदवार को उतारना मुकेश सहनी के लिए ताबूत में आखरी कील ठोकना साबित हो गया।

भाजपा ने दिया VIP को झटका
भारतीय जनता पार्टी मुकेश सहनी को पहले ही किनारा करना चाह रही थी। उन्होंने बोंचहा विधानसभा सीट पर उम्मीदवार उतारने के बाद भाजपा को मौक़ा भी दे दिया। एनडीए गठबंधन में मुकेश सहनी की वजह से फूट पड़नी शुरू हो गई थी। इसलिए भाजपा ने बिहार में कुर्सी बचाने के लिए मास्टर स्ट्रोक खेलते हुए वीआईपी के तीनों विधायकों को ही अपनी पार्टी में शामिल कर लिया। ग़ौरतलब है कि मुकेश सहनी खुद विधान परिषद के सदस्य बने और नीतीश सरकार में उन्हें पशुपालन विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई। लेकिन उन्होंने ज़्यादा की चाह में अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार ली। अब उनके मंत्री पद पर ख़तरा बादल मंडरा रहे हैं।

3 साल पहले रखी गई थी VIP की नींव
मुकेश सहनी ने तीन साल पहले अपनी सियासी पार्टी वीआईपी की नींव रखी थी। पहली बार बिहार विधानसभा के चुनाव में उन्हें चार सीटों पर कामयाबी मिली थी। इस पर भी उन्हें संतोष नहीं हुआ तो उन्होंने पार्टी के विस्तार की चक्कर में उत्तर प्रदेश में 53 सीटों पर भाजपा के ख़िलाफ़ ही चुनावी मैदान में उम्मीदवार उतार दिए। भाजपा से पंगा लेने के बावजूद सहनी को यूपी में एक भी सीट पर कामयाबी नहीं मिली। ग़ौरतलब है कि उन्होंने यूपी चुनाव में मतदाताओं को भाजपा को वोट नहीं देने की अपील तक कर डाली थी। सहनी ने जब ही यूपी में भाजपा के खिलाफ़ उम्मीदवार की घोषणा की तब से ही बिहार में उनके सियासी सफ़र की उलटी गिनती शुरू हो गई थी।

भाजपा के ख़िलाफ़ उम्मीदवारों की घोषणा
मुकेश सहनी को सियासी झटका लगने की एक और वजह यह भी है कि उन्होंने अपनी ग़लतियों से सबक नहीं लिया और अपने सहयोगी दल के ख़िलाफ़ ही क़दम उठाते चले गए। यूपी चुनाव में कामयाबी नहीं मिलने के बाद सहनी को अपने क़दम रोक लेने चाहिए थे। संगठन को मजबूत करने के बाद पार्टी के विस्तार के लिए रणनीति तैयार करनी चाहिए थी। लेकिन उन्होंने पहली गलती यूपी चुनाव में भाजपा के ख़िलाफ़ उम्मीदवार उतार कर की, दूसरी ग़लती बिहार में बोंचहा सीट पर उपचुनाव में भाजपा के ख़िलाफ़ प्रत्याशी की घोषणा की। तीसरी ग़लती बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए भाजपा के ख़िलाफ़ उम्मीदवारों की घोषणा करना रही।

क्या होगा सहनी की अगला क़दम ?
बिहार में 2020 विधानसभा चुनाव के दौरान मुकेश सहनी की पार्टी (विकासशील इंसान पार्टी) महागठबंधन का हिस्सा थी। जब सीटं के बंटवारे पर सहमति नहीं बनी तो वह भाजपा के साथ मिलकर एनडीए गठबंधन का हिस्सा बन गए थे। अब बिहार में इस तरह के सियासी समीकरण बन गए हैं कि मुकेश सहनी के सियासी भविष्य पर ही ख़तरा मंडराने लगा है। फिलहाल उनके विधान परिषद का कार्यकाल 21 जुलाई को ख़त्म होने वाला है तब तक वह मंत्री पद पर बने रह सकते हैं। क्योंकि उनके साथ अति पिछड़ा जाती का वोट बैंक है। ऐसे में भाजपा मंत्री पद से सहनी को हटाकर उस वोट बैंक को खोना नहीं चाहेगी। बिहार के सियासी गलियारों में यह चर्चा है कि मुकेश सहनी अपने टर्म से पहले ही मंत्री पद से इस्तीफ़ा दे कर नए सिरे से सियासी सफर का आगाज़ कर सकते हैं वहीं दूसरा विकल्प राजनीति से संन्यास लेना ही बचा है।

ओवौसी की पार्टी का मिल सकता है सहारा
भारतीय जनता पार्टी के बिहार अध्यक्ष संजय जायसवाल ने कहा कि वीआईपी सुप्रीमो मुकेश सहनी में नैतिकता बची है तो वह इस्तीफा दे दें। वह एनडीए का हिस्सा नहीं होने के बाद भी सत्ता के लोभ में अपने पद पर हैं। जिस इंसान केपास एक भी विधायक बचे उसका राजनीतिक स्तर क्या होगा यह आप समझ सकते हैं। भारतीय जनता पार्टी के कोटे की सीट से ही मुकेश सहनी पद पर बन हुए हैं। इसके साथ ही राबड़ी देवी ने भी मुकेश सहनी को झटका दिया है। उन्होंने कहा कि सहनी को अब लालू प्रसाद की याद आ रही है, राष्ट्रीय जनता दल में उन्हें बिल्कुल भी नहीं बुलाया जाएगा। राबड़ी देवी ने जिस तरह से साफ़ लफ्ज़ों में मुकेश सहनी को साथ लाने से मना कर दिया है। इससे यही ज़ाहिर है कि सहनी को कोई और आसरा ढ़ूंढना पड़ेगा। ऐसे में ओवौसी की पार्टी का साथ सहनी के लिए संजीवनी साबित हो सकता है। क्योंकि एआईएमआईएम के विधायकों ने सहनी के साथ खड़ा रहने का आश्वासन दिया है।
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