पाकिस्तान के ट्रांसजेंडर ऐक्टिविस्ट मांग रहे अधिकार

कराची में रविवार 20 नवंबर को सैकड़ों ट्रांसजेंडर ऐक्टिविस्टों और उनके समर्थकों ने बराबरी के अधिकारों की मांग करने और समुदाय के खिलाफ भेदभाव को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए प्रदर्शन किया.

प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए और हाथों में पोस्टर लेकर गीत गाए. इन पोस्टरों पर ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों के लिए अधिकारों की मांगें लिखी हुई थीं. एक प्रमुख नारा था "महिलाएं, जीवन, आजादी", जो ईरान में महिलाओं के नेतृत्व में चल रहे प्रदर्शनों का नारा है.

प्रदर्शन के आयोजक शहजादी राय ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया, "समय आ गया है कि हम लोगों को बताएं कि हम कौन हैं और हमारी क्या मांगें हैं. हम इंसान हैं और हमारे पास भी औरों के ही जैसा दिल है, जज्बात हैं."

समाज के हाशिए पर

लोकप्रिय पाकिस्तानी शास्त्रीय नृत्यांगना शीमा किरमानी ने कहा, "हमारा लिंग कोई भी हो...हमें एक जैसे अधिकार मिलने चाहिए." प्रदर्शन में भाग लेने वालों ने जोशीले भाषण दिए, डांस किया और हिंसा के शिकार हो चुके ट्रांसजेंडर लोगों के लिए सांकेतिक जनाजा भी निकाला.

इस प्रदर्शन का ऐसे समय में आयोजन किया गया जब पाकिस्तान में हाल में ही सिनेमाघरों में आई ट्रांसजेंडरों पर एक फिल्म चर्चा में है. फिल्म "जॉयलैंड" एक शादीशुदा व्यक्ति और एक ट्रांसजेंडर महिला के बीच प्रेम संबंध के बारे में है.

पाकिस्तान में हाल में आई फिल्म

कुछ इस्लामी समूहों की शिकायत के बाद फिल्म पर बैन लगा दिया गया था, लेकिन बैन के खिलाफ विरोध के बाद उसे हटा लिया गया.

दक्षिण एशिया में एक समृद्ध इतिहास के बावजूद पाकिस्तान में अधिकांश ट्रांसजेंडर समाज के हाशिए पर रहने को मजबूर हैं. मजबूरी में इन्हें अक्सर या तो भीख मांग कर गुजारा करना पड़ता है, या शादियों में नाच कर या वेश्यावृत्ति कर.

संरक्षण के बावजूद खतरा

ट्रांसजेंडर लोगों के खिलाफ भेदभाव की वजह से अक्सर कथित ऑनर किलिंग, बलात्कार और अन्य हिंसक अपराध होते हैं. ऐमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि अक्टूबर 2021 से लेकर अभी तक पाकिस्तान में 18 ट्रांसजेंडर लोगों की हत्या भी कर दी गई है. 2012 में देश के सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर लोगों को "तीसरे जेंडर" के रूप में कानूनी मान्यता भी दे दी थी.

उसके बाद काफी संघर्ष के बाद 2018 में देश में ऐतिहासिक कानून के तहत उन्हें मतदान का अधिकार, रोजगार में बराबर अवसर का अधिकार और राष्ट्रीय पहचान पत्र पर अपना लिंग इंगित कराने का अधिकार मिला.

लेकिन उस कानून पर अब खतरा मंडरा रहा है. कुछ सांसद और दक्षिणपंथी मजहबी पार्टियां कह रही हैं कि कानून पश्चिमी मूल्यों के अतिक्रमण का संकेत है और समलैंगिकता को बढ़ावा देता है.

कराची में हुए प्रदर्शन में हिस्सा ले रही एक ट्रांस महिला जरिश खानजादी ने एएफपी को बताया, "ट्रांसजेंडरों को स्वीकार करने के प्रति माहौल बना था लेकिन धार्मिक पार्टियों ने सिर्फ सीटें हासिल करने के लिए इस कानून को अपने राजनीतिक एजेंडा का हिस्सा बना लिया और हमारी लैंगिक पहचान के सम्मान को कमजोर कर दिया."

सीके/एए (एएफपी)

Source: DW

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