पाक के अल्‍ताफ हुसैन, रॉ से मिले होने का आरोप और आगरा से नाता

कराची। मुताहिदा कौमी मूवमेंट (एमक्‍यूएम) के मुखिया अल्‍ताफ हुसैन ने पाकिस्‍तान को दुनिया का कैंसर करार दिया है। ब्रिटिश न्‍यूजपेपर द गार्डियन ने लिखा है, 'लंदन में बैठकर कराची की गलियों को हिलाने वाले अल्‍ताफ हुसैन।' अब आप इसी बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि हुसैन किस कदर मीलों दूर बैठकर पल भर में पाक को सुलगाने की ताकत रखते हैं।

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रॉ से मिले होने का आरोप

अल्‍ताफ हुसैन को पाकिस्‍तान में भारतीय एजेंसी (रिसर्च एंड एनालिसिस विंग) यानी रॉ का एजेंट तक माना जाता है। मंगलवार को पाकिस्‍तान में जो कुछ भी हुआ वह भले ही बहुत बड़े स्‍तर पर न हो लेकिन एक बार फिर से हुसैन ने अपनी ताकत पाकिस्‍तान प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और पाकिस्‍तान मिलिट्री के चीफ जनरल राहील शरीफ को दिखा दी है।

पाक की कोर्ट ने सुनाई 81 वर्ष की सजा

पिछले वर्ष गिलगित और बाल्टिस्‍तान की एंटी-टेररिज्‍म कोर्ट को पाकिस्‍तान की मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (एमक्यूएम) पार्टी के नेता अल्‍ताफ हुसैन को 81 वर्ष की सजा सुनाई है।

अल्ताफ हुसैन ने जुलाई 2015 में सरकार के विरुद्ध विवादास्पद भाषण दिया था। उन्‍होंंने उस समय नाटो और यूएन से कराची में सेना भेजने की अपील की थी।

24 वर्षों से रह रहे लंदन में

पाकिस्‍तान के कराची में जन्‍मे और भारत के आगरा से गहरा ताल्‍लुक रखने वाले अल्‍ताफ, पिछले 24 वर्षों से ब्रिटेन की राजधानी लंदन में निर्वासित जीवन बिता रहे हैं। उनके समर्थक उन्‍हें कराची के मुजाहिर समुदाय का नेता बताते हैं।

कुछ लोग तो उन्हें अतिवादी करार देते हैं। अल्‍ताफ हमेशा से भारत के लिए अच्‍छे विचार रखते आए हैं। अल्‍ताफ ने पाकिस्‍तान को दुनिया के लिए कैंसर और आतंकवाद को केंद्र करार दिया है।

सेना पर लगाया आरोप

उनकी पार्टी एमक्‍यूएम का कहना है कि पाक सेना पिछले कई वर्षों से पार्टी के पीछे पड़ी हुई है। वर्ष 2013 में पार्टी के कार्यकर्ताओं के खिलाफ केस दर्ज करने की शुरुआत हुई।

अब तक 1500 से ज्‍यादा कार्यकर्ताओं को जेल भेजा जा चुका है। वहीं 66 कार्यकर्ताओं की हत्‍या हो चुकी है तो 125 कार्यकर्ताओं का कुछ पता नहीं है। पाक मीडिया ने पिछले पिछले वर्ष से हुसैन की फोटोग्राफ को बैन किया हुआ था।

पाक में जान का खतरा

अल्‍ताफ वर्ष 1991 में लंदन चले गए थे और उन्‍होंने कहा था कि पाक में उनकी जान को खतरा है। इसके बाद उनके खिलाफ कई तरह की जांच शुरू हो गईं। हुसैन को वर्ष 2014 में मनी लॉड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और इसकी जांच अभी तक जारी है।

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