कश्मीर को सीरिया बनाने की चाहत में सैयद सलाउद्दीन

भारत आकर शुरू करें सिविल वॉर
सलाहुद्दीन पाकिस्तान में एक दर्जन से ज्यादा आतंकी समूहों को संचालित करता है। सलाहुद्दीन ने की एक धमकी ने भारत की नींद उड़ा दी है। उसने तालिबान आतंकियों से कहा है कि वह कश्मीर आएं और यहां पर सीरिया और इराक की तरह ही सिविल वॉर की शुरुआत करें। सलाहुद्दीन ने इराक और सीरिया में जारी हालातों को कश्मीर के साथ जोड़ने की कोशिश की है।
तालिबान और अल कायदा का स्वागत
पीओके स्थित मुजफ्फराबाद से सलाहुद्दीन ने ऐलान किया है कि कश्मीर में तालिबान या फिर अल-कायदा जैसे किसी भी संगठन का या फिर इस विचारधारा वाले किसी भी संगठन, व्यक्ति या फिर देश का स्वागत किया जाएगा।
यूनाइटेड जेहाद काउंसिल में हरकत-उल-अंसार, हिज्ब-उल-मुजाहिदीन, जमीयत-उल-मुजाहिदीन, अल-जिहाद, अल बर्क, अब बदर, इख्वान-उल-मुसलमीन और तहरीक-उल-मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठन शामिल हैं। ब्रिटिश न्यूजेपपर डेली मेल की ओर से उसकी इस खतरनाक साजिश का खुलासा किया गया है।
भारतीय सेना पर लगाया आरोप
सलाहुद्दीन ने कहा है कि अल कायदा, तालिबान या कोई भी संगठन या देश कश्मीरियों की मदद के लिए आगे आता है तो वह उनका स्वागत करेगा। सलाहुद्दीन ने इंडियन आर्मी पर आरोप लगाया और कहा कि भारतीय सेना ने
कश्मीर में आतंक का राज कायम कर दिया है।
क्या है शहीदी दिवस
सलाहुद्दीन ने ये बातें 13 जुलाई को मुजफ्फराबाद में 'शहीदी दिवस' के मौके पर कहीं। 13 जुलाई 1936 को जब घाटी में डोगरा राज कायम था, तो उस समय हुए एक आंदोलन के दौरान 20 मुस्लिम मारे गए थे। इन्हीं मुस्लिमों
की याद में हर वर्ष यहां पर 'शहीदी दिवस' का आयोजन होता है। इसी मौके पर पीओके में एक रैली का आयोजन हुआ जहां पर उसने भारत के खिलाफ जहर उगला।
नवाज शरीफ की आलोचना
हिजबुल मुजाहिदीन के सुप्रीम कमांडर रहे सलाहुद्दीन ने पीओके में कहा कि अतंराष्ट्रीय मंचों पर जाने की कोई जरूरत नहीं है। कश्मीर में हालात ऐसे हैं कि हम यहीं पर अपने दुश्मनों के खिलाफ कार्रवाई को अंजाम दे सकते हैं। सलाहुद्दीन ने कहा कि दुश्मनों के खिलाफ जो भी मदद को आगे आएगा, वह उसका तहे दिल से स्वागत करेगा।
इसके अलावा सलाहुद्दीन ने हाफिज सईद की ही तरह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को भी आड़े हाथों लिया। सलाहुद्दीन ने कहा कि नवाज शरीफ को कश्मीरियों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलना और भारत जाना कश्मीरियों को तकलीफ देने जैसा है। इस तरह का कोई भी कोई कदम उठाने से पहले सोचना चाहिए।












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