सुप्रीम कोर्ट से मिली पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को बड़ी राहत, नहीं जाएगी कुर्सी
पनामा पेपर लीक में आया फैसला और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को मिली बड़ी राहत। पांच जजों की बेंच में शामिल सिर्फ दो जजों ने कहा नवाज को पद के लिए अयोग्य करार दिया जाए।
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने पनामा पेपर लीक मामले में प्रधानमंत्री नवाज शरीफ पर फैसला दे दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया है वह प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के लिए राहत लेकर आया है। पांच जजों की बेंच जो इस मामले की सुनवाई कर रही थी, उसमें से तीन जजों ने कहा कि इस मामले में जांच की जरूरत है तो वहीं दो जजों ने ही मांग की कि प्रधानमंत्री को अयोग्य ठहरा दिया जाए।

60 दिनों के अंदर जेआईटी को देनी होगी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि मामले के लिए ज्वाइंट इनवेस्टीगेशन टीम (जेआईटी) तैयार की जाए। वहीं नवाज शरीफ की पार्टी पीएमएल-एन ने इस फैसले को पार्टी की जीत करार दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है जेआईटी को 60 दिनों के अंदर अपनी रिपोर्ट देनी होगी। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि कोर्ट ने वही कहा है जो पीएम पहले ही अपनी चिट्ठी में कह चुके हैं। पीएम ने भी इस मामले की जांच के लिए एक आयोग की बात कही थी। पिछले वर्ष पनामा पेपर लीक्स स्कैंडल सामने आया था। पनामा की मोसैक फोन्सेका फर्म ने 11.5 मिलियन सीक्रेट डॉक्यूमेंट्स रिलीज किए थे। इनमें दुनिया के कई अमीर और ताकतवर लोगों के नाम थे और नवाज शरीफ एंड फैमिली भी इसमें शामिल थी। पीएम नवाज शरीफ के चार बच्चों जिनमें उनकी बेटी और राजनीतिक विरासत की उत्तराधिकारी मरियम नवाज के साथ उनके दोनों बेटों हसन और हुसैन के नाम भी इसमें शामिल थे। इस्लामाबाद के रेड जोन जहां पर नवाज शरीफ का आधिकारिक निवास है, वहां पर रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है।
क्या था पूरा मामला
इस पूरे मसले के समाने आने के बाद पीएम नवाज शरीफ के लंदन में कई तरह के बिजनेस के बारे में पता लगा था। इस मामले में शरीफ एंड फैमिली पर विदेशों में मौजूद कंपनियों के जरिए लंदन में कई तरह की प्रॉपर्टीज को खरीदने की बातें सामने आई थीं। इस खरीदारी में जिस फंड का प्रयोग हुआ उसकी वैधता पर भी सवाल उठे थे। शरीफ की पार्टी पीएमएल-एन की ओर से कहा गया कि जो भी धन-दौलत इकट्ठा की गई वह पाकिस्तान और खाड़ी देशों में स्थित परिवारिक बिजनेस से कमाई गई है। लेकिन क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान ने आरोप लगाया कि फंड से जुड़े कोई भी कागजात उपलब्ध नहीं हैं। साथ ही उन्होंने नवाज शरीफ से मांग की कि वह यह साबित करें कि उन्होंने मनी लॉन्ड्रिंग करके इस पैसे को नहीं कमाया है। पाकिस्तान में वर्ष 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा ही फैसला दिया था। उस समय एक फैसले के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री युसूफ रजा गिलानी को तब के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से जुड़े भ्रष्टाचार केस की जांच दोबारा करने से मना करने पर उन्हें अयोग्य करार दे दिया गया था।












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