पोरबंदर घटना के लिए भारत को जिम्मेदार बताना ISI का प्लान
इस्लामाबाद। 31 दिसंबर को पोरबंदर में हुई घटना के बाद से भारत पाकिस्तान से आई नाव से जुड़े हर सुराग को इकट्ठा करने में लगा हुआ है तो वहीं पाकिस्तान में इस पूरे मामले पर लीपापोती की तैयारी हो चुकी है।

सोमवार को ही भारत के रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर की ओर से बयान दिया गया है कि पोरबंदर में भारतीय सीमा में दाखिल हुई नाव स्मगलर्स की हरगिज नहीं थी लेकिन पाक सिर्फ इसी कोशिश में लगा हुआ है कि वह दुनिया के सामने साबित कर सके यह स्मगलर्स की नाव थी और इसमें स्मगलर्स ही सवार थे। सूत्रों की मानें तो पोरबंदर में जो कुछ भी हुआ उसके पीछे पाक नेवी नहीं आईएसआई का हाथ है।
ISI ने चलाया पूरा ऑपरेशन
इस पूरे ऑपरेशन से जुड़ी जो भी डिटेल्स मिली हैं और जिनका अध्ययन किया जा रहा है, उससे सिर्फ इसी तरफ इशारा मिलता है कि इस पूरे ऑपरेशन को आईएसआई की देखरेख में चलाया जा रहा था। हालांकि ऑपरेशन को एक पूर्व पाक नेवी अधिकारी की मदद हासिल थी। इस नेवी अधिकारी ने नाव में सवार चार लोगों को निर्देश दिए थे जिस समय वे भारत की सीमा में दाखिल हुए थे। इंटेलीजेंस ब्यूरों की मानें तो इनका मकसद पोरबंदर स्थित नौसेना बेस को ब्लास्ट करना था।
कई दिनों से चल रही थी तैयारी
- सूत्रों का दावा है कि उनके पास इस बात के सारे सुबूत हैं कि पाक से आई नाव मछली पकड़ने के मकसद से नहीं आई थी।
- नाव में सवार सभी लोगों के खुद को ब्लास्ट करने से साफ हो जाता है कि उनके पास जो भी सामान था, वह उन्होंने छिपाकर रखा था।
- 31 दिसंबर से 15 दिन पहले से ही इस बात की जानकारी थी कि इस तरह का हरकत पाक की ओर से हो सकती है।
- नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजित डोवाल की अगुवाई वाली एक टीम हर तरह के डाटा को ट्रैक कर रही थी।
- 31 दिसंबर को नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गनाइजेशन यानी एनटीआरओ की टीम ने कराची के केती बंदर से आ रही एक नाव के बारे में सूचना मुहैया कराई।
- इस सूचना के बाद से कोस्ट गार्ड ने अपना ऑपरेशन शुरू किया।
- कई घंटों तक नाव का पीछा करने के बाद वह इसे खत्म करने में सफल हो सके।
आईएसआई का ड्रामा
- सूत्रों की मानें तो इस पूरी घटना को आईएसआई की ओर से तैयार किया गया था।
- पाक नेवी का इससे कोई भी लेना देना नहीं है।
- नाव में सवार हैंडलर्स जिस व्यक्ति से बात कर रहे थे वह पूर्व पाक नौसेना अधिकारी मालूम पड़ता है।
- इस पूरे ऑपरेशन से पहले मुंबई हमलों के दौरान भी पाक के पूर्व नौसेना अधिकारियों की मदद ली गई थी।
- सूत्रों का कहना है कि आईएसआई कभी भी इस तरह की वारदातों के लिए कभी भी सेना के अधिकारियों की प्रत्यक्षतौर पर मदद नहीं लेगा।
- आईएसआई नहीं चाहेगी है कि नौसेना या फिर किसी भी संस्थान के खिलाफ कोई सुबूत हाथ लगे।
- 12 जनवरी को पोरबंदर में ही आईएनएस द्वारका का उद्घाटन समारोह होना था और उससे पहले यह घटना काफी हैरान करने वाली है।
- फिलहाल इस कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया है और एजेंसिया पूरी एतिहायत बरत रही हैं।
पाक की लीपापोती
इस पूरी घटना की जांच सिर्फ एक तरफ ही इशारा कर रही है कि पाक एक और 26/11 को अंजाम देने की तैयारी में था और अब इसकी पोल खुलने के बाद वह इसके कवर-अप में लग गया है। पाक पूरी कोशिश कर रहा है कि इस घटना को ड्रग्स स्मगलिंग से जोड़ दिया जाए। हालांकि यह कोई नई बात नहीं है और पाक 26/11 के बाद इस तरह से अक्सर ही ऐसा करता रहता है।
पाक की ओर से बयान भी आने शुरू हो गए है कि इस पूरी घटना को भारतीय एजेंसियों की ओर से अंजाम दिया गया था। पाक ने यह कदम उस समय उठाया है जब भारतीय एजेंसियां 26/11 के अहम आरोपी डेविड हेडली के हैंडलर साजिद मीर को पकड़ने की तैयारी में हैं।












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