पाक सरकार ने लगाया लखवी पर एक और केस, तीन माह जेल में रहेगा लखवी
इस्लामाबाद। गुरुवार को मुंबई हमलों के मुख्य अभियुक्त जकी-उर-रहमान लखवी को जमानत मिलने के बाद भारत की ओर से इसका कड़ा विरोध दर्ज कराया गया था। खुद पाक के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने माना था कि कुछ टेक्निकल गलतियों की वजह से लखवी को जमानत मिली है। लेकिन शुक्रवार को खबर आई है कि वह फिलहाल जेल से रिहा नहीं होगा।

एक दूसरे मामले में उसकी हिरासत को बढ़ा दिया गया है। अब वह तीन माह तक जेल में ही रहेगा। वहीं दूसरी ओर भारत की संसद में लखवी को मिली जमानत का विरोध करने के स्वरूप एक प्रस्ताव पेश किया गया है।
रावलपिंडी जेल भेजा गया लखवी को
मुंबई हमले की साजिश करने के आरोपी जकी-उर-रहमान लखवी को मेनटेनेंस ऑफ पब्लिक आर्डर (एमपीओ) के तहत हिरासत में लिया है। उसे शुक्रवार को हिरासत में लेकर रावलपिंडी के अडियाला जेल भेज दिया गया।
लखवी को गुरुवार को इस्लामाबाद की एक अदालत ने जमानत दी थी। पाक के न्यूजपेपर 'डॉन' की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने लखवी को मिली जमानत के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील करने का फैसला भी किया है।
इस्लामाबाद में एंटी-टेररिज्म कोर्ट ने लखवी को जमानत दे दी थी। उसके साथ सात अन्य लोग 26 नवंबर, 2008 को मुंबई में हुए आतंकवादी हमले की साजिश करने तथा हमलावरों को मदद मुहैया कराने के आरोपी हैं।
इस हमले में भारतीय एवं विदेशी नागरिकों सहित 166 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे। सूत्रों की मानें तो मुंबई हमलों के समय लखवी लश्कर ए-तैयबा का संचालन का मुखिया था।
क्या कहा है पाक में सरकारी वकील ने
वहीं इस पूरे मामले पर नजर रखने वाले पाक सरकार के वकील ने कोर्ट के फैसले पर हैरानी जाहिर की है। वकील के मुताबिक जब केस की सुनवाई अपने आखिरी दौर में थी, तो आतंकवाद निरोधी कोर्ट ने लखवी को जमानत दे दी।
सरकारी वकील ने कहा कि अभी 15 गवाहों के बयान बाकी थे, ऐसे में लखवी को जमानत देने का कोई मतलब नहीं होता। ऐसे में पाकिस्तान सरकार ने जमानत के फैसले के खिलाफ लाहौर हाईकोर्ट में अपील करने का मन बनाया है।












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