जानिए जाली नोट छापने के लिए किस कोड वर्ड का प्रयोग करता था पाकिस्तान?
जाली भारतीय नोट बनाने के लिए पाकिस्तान करता था कोड वर्ड आरबीआई का प्रयोग और पाक सेना का एक रिटायर्ड ब्रिगेडियर करता था सारी मदद।
इस्लामाबाद। पिछले हफ्ते आठ नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1,000 रुपए के नोट को चलन से बाहर करने का फैसला किया।
देश में भले ही इस फैसले से लोगों को परेशान हो रही है लेकिन सैंकड़ों मील दूर पाकिस्तान में इस फैसले ने आईएसआई की नींद उड़ाकर रख दी है।
भारत में आतंकी साजिशों के अलावा आईएसआई जाली नोटों के जरिए भारत की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ने में लगी हुई थी।
आईएसआई को इसमें एक रिटायर्ड ब्रिगेडियर जो उसका एजेंट भी था, उसकी मदद मिलती थी। लेकिन पीएम मोदी के फैसले ने इस ऑफिसर को अब किसी काम का नहीं छोड़ा है।

आरबीआई था कोर्ड वर्ड
इंग्लिश वेबसाइट फर्स्ट पोस्ट के मुताबिक पाकिस्तान भारत के जाली नोटों का बनाने के लिए कोड वर्ड आरबीआई का प्रयोग करता था। भारत में रिजर्व बैंक की यहां की मौद्रिक नीति को नियंत्रित करता है। पाक सेना से रिटायर्ड हो चुका ब्रिगेडियर रैंक का ऑफिसर लाला फेक इंडियन करेंसी नोट को भारत में स्मगल करता था। 500 और 1,000 रुपए के नोट बेकार होने के बाद कोई भी लाला के 'आरबीआई' को लेने के लिए तैयार नहीं था।

अब क्या करेगा लाला
रावलपिंडी में मुनी रोड पर लाला के आरबीआई के बंडल बस ऐसे ही बेकार पड़े थे और कोई उन्हें लेने को तैयार नहीं था। इंटेलीजेंस ब्यूरों (आईबी) के मुताबिक पीएम मोदी के फैसले के बाद आईएसआई के रावलपिंडी हेडक्वाटर्र के एक तबके को बर्बाद करके रख दिया है।

अब पाक में आतंकी परेशान
रावलपिंडी के हेडक्वार्टर पर बब्बर खालसा, खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स और इंडियन मुजाहिदीन के कई आतंकियों ने इस फैसले के बाद आईएसआई अधिकारियों के साथ मीटिंग की। ये तीनों ही संगठन भारत की अर्थव्यवस्था को तबाह करने और आर्थिक आतंकवाद के मकसद से भारी मात्रा में जाली नोट भारत भेजते हैं।

होता था अच्छा फायदा
आईएसआई काफी आकर्षक दरों पर भारत के नोटों को बदलने का काम करती आ रही थी। 1000 के हर जाली नोट का बदलने पर उसे 300 रुपए का फायदा होता था। इस फायदे का प्रयोग लाला जैसे कई एजेंट्स को सैलरी देने के लिए किया जाता था। साथ हीअंडरवर्ल्ड के मॉड्यूल्स को भी इस फायदे का हिस्सा मिलता था। पाकिस्तान में अंडरवर्ल्ड मॉड्यूल्स को 'ऑफिस' के नाम से जानते हैं।

चीन से भी थी नोट भेजने की तैयारी
आईएसआई ने हाल ही में चीन को भी अपने तस्करी के रास्ते के लिए प्रयोग करने का मन बना लिया था। पाक चीन के गुआंगडोंग प्रांत के शेनझान के रास्ते गारमेंट के कंटेनर्स में जाली नोटों को भारत में भेजने की तैयारी कर रहा था। शेनझान हांगकांग के उत्तर में स्थित है और गारमेंट एक्सपोर्ट का मुख्य केंद्र बन गया है। यहां से पहले जाली नोटों केा नेपाल और बांग्लादेश भेजा जाना था और फिर ये नोट भारत आने वाले थे।

बांग्लादेश और नेपाल में अच्छा नेटवर्क
फर्स्टपोस्ट के मुताबिक बांग्लादेश में सुलेमान और मुल्ला और नेपाल में अंसारी नामक व्यक्ति ऑफिस संभाल रहे थे। अंसाली एक नेपाली राजनीतिज्ञ है जो ललितपुर से आता है और दाऊद इब्राहीम का करीबी है। उसे जनवरी 2014 में नेपाल की पुलिस ने गिरफ्तार किया था। कहा जाता है कि पिछले वर्ष तक अंसारी के आईएसआई अधिकारियों के साथ काफी अच्छे संबंध थे और वह अक्सर काठमांडू में पाक राजदूत आता जाता रहता था।

4,500 करोड़ की नकली मुद्रा
कितनी जाली भारतीय मुद्रा चलन में थी इसकी कोई जानकारी नहीं है लेकिन अलग-अलग एजेंसियों की ओर से आई रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 4,500 करोड़ की जाली मुद्रा अर्थव्यवस्था का हिस्सा थी। सरकारी एजेंसियों की ओर से वर्ष 2005-2007, 2008-2010 और 2011-2013 तक तीन बार भारी मात्रा में नकली मुद्रा जब्त की गई। इसमें विदेशों में 78 जब्तियां भी शामिल हैं।












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