आर्टिकल 370 पर पाकिस्तान को नहीं मिला चीन और मुसलमान देशों का साथ
नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 को खत्म करने वाले भारत के फैसले को गैरकानूनी बताने वाला पाकिस्तान अब इस मसले में अंतरराष्ट्रीय समुदाय में अकेला पड़ता जा रहा है। इस मामले पर अमेरिका की तरफ से बयान आ गया है और साथ ही भारत ने यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल (यूएनएससी) के देशों को सारी स्थिति से वाकिफ करा दिया है। पाक के सबसे 'सगे' चीन ने भी इस मसले से दूर रहने का मन बना लिया है। और तो और मुसलमान देशों ने भी उसका साथ छोड़ दिया है।

अकेला पाकिस्तान ही दे रहा बयान
अभी तक सिर्फ पाकिस्तान ने ही इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया दी है। पाकिस्तान के विदेश विभाग की ओर से भारत के फैसले को गैरकानूनी करार दिया गया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि पाकिस्तान ने जब सन् 1970 में पीओके का निर्माण किया,उस समय ही उसने अपने लिए दुनिया भर की आलोचना मोल ले ली थी। साल 2009 में तत्कालीन पाक राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की तरफ से उत्तरी इलाकों को गिलगित-बाल्टीस्तान नाम दिया गया और साथ ही इन इलाकों को स्वयत्ता दे दी गईथी।

ओआईसी भी खामोश
इस पूरे मसले पर ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कंट्रीज (ओआईसी) ने भी चुप्पी साधी हुई है। ओआईसी हर मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन करता आया है। चार अगस्त को ओआईसी की ओर से जरूर बयान जारी किया गया कि वह जम्मू कश्मीर के हालातों को लेकर चिंतित है। ओआईसी ने अपने बयान में कश्मीर में अधिक सैनिकों की तैनाती का जिक्र भी किया था। लेकिन अभी तक ओआईसी की ओर से कोई भी बयान आर्टिकल 370 के हटने पर जारी नहीं किया गया है। ओआईसी में 53देश है जिसमें अफगानिस्तान, ईराक,सुडान और इंडोनेशिया जैसे देश शामिल हैं।

चीन से कहा यह हमारा आतंरिक मसला
चीन ने भी इस मामले पर पूरी तरह से चुप्पी साधी हुई है। वह भी तब जब भारत ने लद्दाख की स्थिति को बदलकर रख दिया है। चीन, लद्दाख के एक बड़े हिस्से पर कब्जा जमाए हुए है जिसमें अक्साई चिन जैसा इलाका शामिल है। साल 1963 में पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर के तहत आने वाली 6,000 स्क्वॉयर किलोमीटर की जमीन शक्जगम वैली के तौर पर चीन को सौंप दी थी। हालांकि भारत ने चीन को साफ कर दिया है कि आर्टिकल 370 उसका आंतरिक मामला है और इसमें किसी को भी दखल नहीं देना चाहिए।












Click it and Unblock the Notifications