एक साल के बच्चे को लेकर ई-रिक्शा चलती है ये मां, तस्वीरें हुईं वायरल तो लोगों ने किया सलाम
एक साल के बच्चे को लेकर ई-रिक्शा चलती है ये मां, तस्वीरें हुईं वायरल तो लोगों ने किया सलाम
नोएडा, 25 सितंबर: मां अपने बच्चों के लिए पूरी दुनिया से लड़ सकती है। इसलिए मां को भगवान से भी ऊंचा दर्जा दिया गया है। मां की शक्ति का एक अद्भुत नाजार उत्तर प्रदेश के नोएडा जिले की सड़कों पर देखने को मिला। दरअसल, यहां एक महिला अपने बच्चे को गोद में बैठा कर ई-रिक्शा चलाती हुई नजर आई। इस महिला का नाम चंचल शर्मा बताया जा रहा है। जो अपने बच्चे के लिए इस तरह का जीवन जी रही है, उसके बारे में जानकर सभी लोग उसके फैन हो गए हैं।

इस भागती-दौड़ती जिन्दगी में वैसे तो लोगों का ध्यान बहुत ही कम ही जाता है। लेकिन, नोएडा की सड़कों पर ई-रिक्शा चलाती चंचल शर्मा पर हर किसी की आंखें रुक ही जाती है। The Times of India की खबर मुताबिक, 27 साल की चंचल शर्मा नोएडा की सड़कों पर ई-रिक्शा चलाती हैं। चंचल अपने एक साल के बेटे को कंधे के सहारे बंधा और स्टीयरिंग को मजबूती से थामे, चंचल मानो जिंदगी के तमाम संघर्ष को जीत लेने की जिद में आगे बढ़ती नजर आती हैं।
खबर के मुताबिक, चंचल अपने दिन की शुरूआच सुबह 6:30 बजे से करती है और नोएडा सेक्टर 62 स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजिकल्स से सेक्टर 59 स्थित लेबर चौक के बीच काम करती हैं। 6.5 किलोमीटर के इस रूट पर उनके अलावा कोई दूसरी महिला ई-रिक्शा नहीं चलाती। 27 वर्षीय चंचल शर्मा बताती है कि अंकुश के पैदा होने के 1.5 साल बाद उन्होंने नौकरी की तलाश शुरू की। लेकिन कोई काम नहीं तो आखिर में ई-रिक्शा चलाने का काम शुरू किया।
चंचल की मानें तो यह ऐसा काम था, जहां वह अपने बच्चे को भी साथ लेकर जा सकती थी। साथ रख सकती थी। चंचला कहती हैं कि मैं अपने बेटे को वह जीवन देना चाहती हूं, जो मेरे पास नहीं है। चंचल की मानें तो जो भी यात्री उनकी ई-रिक्शा में बैठता है वो उनकी तारीफ करता है। चंचल ने बताया कि वो अपने पति से अलग हो गई हैं और एक कमरे में अपनी मां के साथ रहती हैं। चंचला कहती हैं कि बेटे अंकुश को मैं घर पर नहीं छोड़ सकती, क्योंकि मेरी मां एक ठेले पर प्याज बेचती हैं।
इसलिए, जब मैं गाड़ी चलाती हूं तो मुझे अपने बेटे को साथ ले जाना पड़ता है। चंचला की तीन बहनें हैं, वे शादीशुदा हैं और अपने परिवार के साथ दूर रहती हैं। चंचल की मानें तो उन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग से 10वीं तक की पढ़ाई की है और वो एक दिन में 600 से 700 रुपए तक कमाती है। इसमें से 300 रुपये उस निजी एजेंसी को जाते हैं, जिसने उन्हें बैटरी से चलने वाले वाहन के लिए कर्ज दिया है।












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