अगर दिल्ली-एनसीआर में 9वीं मंजिल से ऊपर रहते हैं तो हो जाएं सावधान!
नयी दिल्ली। अगर आप दिल्ली-एनसीआर में रहते है तो जरा इस खबर को गौर से पढें। ये खबर और भी खास तब हो जाती है जब आप यहां की इमारतों में 9वीं मंजिल से उपर रहते हो। दरअसल यहां कि बिल्डिंग निर्माण में धड़ल्ले से सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। [ दिल्ली की हर छोटी-बड़ी खबर के लिए यहां क्लिक करें ]

दिल्ली-एनसीआर में ऊंची-ऊंची इमारतें बन रही है, लेकिन सुरक्षा को ताख पर रखकर। सुरक्षा एजेंसियां भी धडल्ले से एनओसी बांट रही हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि नोएडा में नौवीं मंजिल से ऊपर की इमारतों में आग बुझाने के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं।
आपको गाजियाबाद के इंदिरापुरम इलाके की वो घटना याद होगी। जहां पिछले साल जुलाई में नामी बिल्डर की बनाई बिल्डिंग में आग लगी थी। आग बिल्डिंग के बेसमेंट में लगती है और धीरे-धीरे पूरी बिल्डिंग को घेर लेती है। इस आग को बुझाने में गाजियाबाद ही नहीं नोएडा, साहिबाबाद के दमकल विभाग ने पूरा दम लगा दिया। बावजूद इसके उन्हें आग बुझाने में छह घंटे लग गए।
ये कोई पहला मामला नहीं है। अगर नोएडा की बिल्डिंगों की बात करें तो आपको जानकर हैरानी होगी कि फायर ब्रिगेड के पास नौ मंजिल से ऊंची इमारत में आग बुझाने का कोई इंतजाम नहीं है। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि अगर आप नौवीं मंजिल से ऊपर रहते हैं तो भगवान के भरोसे ही रहें।
दरअसल नोएडा फायर डिपार्टमेंट के पास केवल 35 मीटर ऊंचाई तक पहुंचने वाला हाइड्रॉलिक प्लेटफॉर्म है। इससे ज्यादा ऊंचाई वाली जगह पर आग लगने पर अंदर जाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। आपको बता दें कि गुड़गांव में 90 मीटर ऊंचाई तक पहुंचने वाला हाईड्रॉलिक प्लेटफार्म है, जिसके जरिए 105 मीटर तक पानी की बौछार पहुंचाई जा सकती है। इसी तरह दिल्ली में भी 70 मीटर ऊंचाई तक पहुंचने वाला प्लेटफॉर्म है।












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