नॉर्थ ईस्ट दिल्ली दंगा: उमर खालिद का बयान आपत्तिजनक, लेकिन आतंकी कृत्य नहीं: कोर्ट

नई दिल्ली, 31 मई। जेएनयू के छात्र उमर खालिद की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि उनका भाषण सही नहीं था लेकिन इसे आतंकवादी कृत्य नहीं कहा जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र के अमरावती में दिए गए भाषण में उमर खालिद की भाषा सही नहीं थी, लेकिन इसे आतंकवादी कृत्य नहीं कहा जा सकता है और ना ही यूएपीए कानून के तहत दर्ज केस में उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता था। दरअसल 24 मार्च को निचली अदालत ने उमर खालिद की जमानत को खारिज कर दिया था, जिसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट में इसे चुनौती दी गई थी।

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जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस रजनीश भटनागर की पीठ ने कहा कि भाषण की भाषा का गलत होने इसे आतंकी कृत्य नहीं बनाता है, इसे हम समझते हैं। भाषण की भाषा को महाहानिकारक कहा जा सकता है लेकिन आतंकवादी गतिविधी नहीं कहा जा सकता है। कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपनी दलीलें दी। इस दौरान 17 फरवरी 2020 को उमर खालिद द्वारा दिए गए भाषण का जिक्र किया गया। इस मामले की अगली सुनवाई 4 जुलाई को होगी।

बता दें कि मामले की सुनवाई जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस रजनीश भटनागर की बेंच ने की। नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में फरवरी 2020 में हुए दंगों में उमर खालिद की भूमिका के चलते उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया था। सुनवाई के दौरान वकील सनाया कुमार ने गवाह के बयान पर सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि सीलमपुर में हुई बैठक गोपनीय नहीं थी, ना ही किसी सीक्रेट ऑफिस में की गई थी। बता दें कि शर्जील इमाम के खिलाफ जमानत याचिका पर कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। शरजील इमाम ने भी 27 मई को देशद्रोह मामले में कोर्ट में याचिका दायर करके जमानत की गुहार लगाई है। इस मामले में दिल्ली पुलिस को जवाब देने के लिए कोर्ट ने नोटिस जारी किया है।

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