नहीं मिली तारिख पर तारिख, मर्डर केस का फैसला सिर्फ 30 मिनट में

जस्टिस प्रदीप नंदराजोग और मुक्ता गुप्ता की पीठ ने अब्बू नाम के शख्स की ओर से 2011 में दायर की गई अर्जी पर सुनवाई कर महज 30 मिनट में अपना फैसला सुना दिया। कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए मर्डर के आरोप को गैर-इरादतन हत्या में तब्दील कर दिया। कोर्ट ने अब्बू पर लगे मर्डर के आरोप को खारिज करते हुए तत्काल प्रभाव से उसकी रिहाई के भी आदेश दे दिए।
हलांकि केस का फैसला इतनी जल्दी होने का एक कारण ये भी था कि इस केस में पेंचीदगियां कम थीं। ना ही इसमें लंबी सुनवाई की जरूरत थी और नाही सबूतों के अंबार की। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद फौरन अपना फैसला सुना दिया। दरअसल 1 मई 2010 की रात को अब्बू और उसका एक दोस्त मोरी गेट इलाके पहुंचे थे। जहां वो अपने दोस्त से मिलने गए थे। अब्बू मोटा नाम के दोस्त से मिलने पहुंचे थे, लेकिन उनका दोस्त नशा कर रहा था। नशे की हालत में ही अब्बू और उसके दोस्त मोटा के बीच किसी बात को लेकर बहस हो गई जो जल्द ही झगड़े में तब्दील हो गई।
मामला इतना बढ़ा कि अब्बू ने मोटा पर पेपर कटर से हमला कर दिया। जब मोटा भागने लगा तो अब्बू और उसके दोस्त ने उसे घसीटकर कमरे में बंद कर दिया और उसकी खूब पिटाई की। पिटाई के बाद ज्यादा खून बहने की वजह से बाद में मोटा की मौत हो गई। ममला कोर्ट तक पहुंचा और ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में अब्बू को दोषी पाया और सजा सुना दी। अब्बू ने फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। ट्राइल कोर्ट के फैसले के उलट हाईकोर्ट ने पाया कि झगड़े के दौरान आरोपी अब्बू को भी गंभीर चोटें आई थीं। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अब्बू पर भी हमला किया गया था और बैंच ने इसे गैर इरादतन हत्या का मामला करार देकर अब्बू की रिहाई के आदेश दे दिए।












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