दिल्ली के लिए सोमवार संकट का दिन

नई दिल्ली (विवेक शुक्ला) दिल्ली में सोमवार को कुछ भी हो सकता है। सोमवार रह सकता है दिल्ली के लिए भारी। दिल्ली में राज्य सरकार के एक फैसले के कारण संवैधानिक संकट पैदा सकता है। दिल्ली सरकार ने दो दिन का विधानसभा का अधिवेशन बुलाया है। इसमें दो प्रस्ताव पारित होंगे। पहला, दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग होगी। दूसरा, सदन केन्द्र के उस नोटिफिकेशन को खारिज कर सकता है,जिसमें उच्च पदों पर नियुक्तियों का अधिकार केन्द्र सरकार को मिला है।

रहेगा सड़कों पर जाम

जाहिर है, दिल्ली में हालात विस्फोटक है। शाम को केजरीवाल सरकार के कनाट प्लेस में होने वाले कार्यक्रम के कारण सड़कों पर तगड़ा जाम भी लग सकता है।

निराश किया केजरी ने

जैसा कि वन इंडिया बार-बार कह रहा है कि आम आदमी पार्टी सरकार को लेकर जो चिंताएं थी, वह साबित होने लगी हैं। पिछली फरवरी को जब दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को शपथ दिलाई थी तब लगा था कि एक फिर से इस शहर में एक नई राजनीति का मार्ग प्रशस्त हो गया है। पर बात नहीं बनी।

नहीं रखा विकास का ख्याल

माना जा रहा था कि आम आदमी पार्टी सरकार दिल्ली के विकास पर फोकस करेगी। पर वे उम्मीदें हवा हो गईं। केजरीवाल ने मुख्यमंत्री के रूप में अपनी पहली पारी में जमकर बवाल काटा था। धरने दिए थे। रातें सड़कों पर बिताईं थीं। सब कह रहे थे कि इस बार दिल्ली में उन्हें तगडा बहुमत मिला है। वे अपने काम को बेहतर तरीके से अंजाम देंगे। पर उन्होंने इस तरह का कोई कदम नहीं उठाया जिससे उनके प्रति दिल्ली वाले सम्मान का भाव रख पाते।

जंग के साथ केन्द्र

बता दें कि बीते शुक्रवार को केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने साफ कर दिया था कि दिल्ली में उप राज्यपाल नजीब जंग और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बीच चल रही तनातनी पर केन्द्र सरकार जंग के साथ है। उन्होने साफ कर दिया था कि दिल्ली में केन्द्र सरकार को और न ही दिल्ली सरकार को एक-दूसरे के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करना चाहिए।

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