दिल्ली में तीनों दल जीत के लिए करेंगे कुछ भी कुर्बान
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। दिल्ली में ठंड बढ़ने के साथ ही राजनीतिक तापमान गर्म हो रहा है। भाजपा, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस को लग रहा है कि इस बार नहीं तो कभी नहीं। भाजपा में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह खुद दिल्ली के चुनाव को देख रहे हैं। दिल्ली में करीब 12,000 पोलिंग बूथ हैं। भाजपा के 150 नेताओं की पोल निगरानी टीम बनाई गई है। उसे बूथ स्तर पर पार्टी के चुनाव प्रबंधन के काम की निगरानी करने का काम सौंपा गया है। मंत्रियों को भी चुनाव का प्रभार सौंपा गया है।

किसी को नहीं मिला था बहुमत
दिसंबर 2013 में दिल्ली विधानसभा चुनावों में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था। भाजपा और उसके सहयोगी अकाली दल की एक सीट मिलाकर कुल 32 सीटें हासिल हुई थीं और वह 70 सदस्यीय दिल्ली विधानसभा में सबसे बड़़े दल के रूप में उभरी थी। आप को 28 जबकि कांग्रेस को एक सीट मिली थी।
अप्रैल-मई 2014 के आम चुनाव में भाजपा ने दिल्ली की सातों सीटों पर जीत हासिल की। इस दौरान उसे 52 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त हासिल हुई जबकि पार्टी को 47 फीसदी वोट हासिल हुए। इस फैसले के बाद पार्टी को पूरा यकीन है कि उसे अपनी नीति में कोई बदलाव करने की आवश्यकता नहीं है। हाल में दिल्ली के दो इलाकों में सांप्रदायिक तनाव देखने को मिला था और उससे भी अंदाजा मिलता है कि सत्ताधारी दल के लिए दिल्ली में चुनावी जीत हासिल करना कितना अहम है।
आप को नुकसान

आम आदमी पार्टी (आप) जो दिसंबर 2013 के चुनावों में दूसरे स्थान पर रही थी और जिसने सरकार बनाने के बावजूद यह लगने पर अपने पद से इस्तीफा दे दिया था कि उसके पास पूरा बहुमत न होने से उसे अपना एजेंडा पूरा करने में दिक्कत आएगी। हालांकि बाद में पार्टी को लगा कि उसने सत्ता छोड़कर गलती की है। उससे मिडिल क्लास वोटर दूर चला गया है।
लवली खड़ा कर पाएंगे कांग्रेस को

वहीं कांग्रेस ने अरविंदर सिंह लवली को नया प्रदेश प्रमुख बनाया है लेकिन यह देखना होगा कि पार्टी खुद को नए सिरे से खड़ा कर पाने में कामयाब होती है अथवा नहीं। जानकार मानते हैं कि सबसे अधिक नुकसान 'आप को हुआ है। पार्टी को अपना वह पुराना फैसला पलटना पड़ा है जिसमें कहा गया था कि एक चुनाव लड़ने वाले लोग दूसरा चुनाव नहीं लड़ेंगे। इस बार अरविंद केजरीवाल और राखी बिड़ला दोनों के विधानसभा चुनाव लड़ने की उम्मीद है जबकि दोनों लोकसभा चुनाव हार चुके हैं।
आप को अपने 49 दिन की सरकार के कामकाज पर गर्व है और वह उसका प्रचार भी करने लगी है। खासतौर पर करप्शन को लेकर की गई पार्टी की पहल का। बहरहाल, कांग्रेस चौंकाने वाले नतीजे ला सकती है। लवली के नेतृत्व में पार्टी में बदलाव देखने को मिल रहा है। आंतरिक स्तर पर पार्टी हकीकत के और करीब हुई है। अगर कांग्रेस 2013 के बराबर सीटें जीतती है तो यह पर्याप्त होगा, हां इससे अधिक सीटों पर जीत जरूर पार्टी के लिए बोनस का काम करेगी। दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनाव देश के सबसे रोचक चुनावों में से एक होंगे।












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