महाराष्ट्र चुनावः कांग्रेस के ' बागी मोहरे' भाजपा ने कांग्रेस के ही खिलाफ
मुंबई। भाजपा महाराष्ट्र सत्ता पाने के लिए दलबदलू और बागी कांग्रेसी नेताओं को टिकट देकर हल तलाश रही है। तो जिससे कांग्रेस की सारी संभावनाएं खत्म होती नजर आ रही हैं। इसका फायदा भाजपा औऱ महाराष्ट्र की क्षेत्रीय पार्टियों को मिल सकता है। क्योंकि गठबंधन की टूट, अंदरूनी कलह उजागर होने के बाद कांग्रेस के नेताओं का कांग्रेस पर ही कम हो रहा विश्वास मतदाता तक गलत संदेश पहुंचा रहा है। इसी माहौल को भाजपा भुना सकती है।

कांग्रेस की ओर से केयर टेकर मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण की जन्मभूमि करद से मैदान में उतारने की संभावनाएं है तो वहीं भाजपा चव्हाण के मुकाबले में कांग्रेस का ही मोहरा चलेगी यह तय माना जा रहा है। कभी कांग्रेस के नेता अतुल भोसले को भाजपा करद से ही मैदान में उतार जा सकता है।
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के कुछ ही दिन बचे हैं और इससे पहले विपक्षी पार्टी भाजपा-शिवसेना गठबंधन टूटा फिर सत्ताधारी कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन लड़खड़ाकर बिखर गया। क्षेत्रीय दलों को तो फायदा होगा ही, साथ ही विकल्प न होने की वजह से भाजपा का वोटबैंक मजबूत होगा।
ऐसे बिखर सकता है वोट
कांग्रेस ने पृथ्वीराज चव्हाण को करद सीट से टिकट दे दिया है। इससे करद से ही वर्तमान विधायक विलास उदालकर पाटिल ने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। संकेत हैं कि पाटिल फिर से करद से ही चुनाव में न उतारे जाने कांग्रेस से नाराज हो गए हैं। उदालकर पाटिल वरिष्ठ कांग्रेसी नेता दिलीप देशमुख के बैटे हैं। इससे करद विधानसभा क्षेत्र में पाटिल की ओर जाने वाला वोट बिखर सकता है।
यह भी विद्रोही मोहरे
कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन सरकार में मंत्री रहे और एनसीपी नेता संजय सावकरे भाजपा के टिकट से फिर से भुसावल सीट से चुनाव लड़ेंगे। वहीं पूर्व केबिनेट मंत्री बबनराव पछपुते नाराज होकर भाजपा से जुड़े। पछपुते को भाजपा की ओर से श्रीगोंदा से चुनाव लड़ाया जा रहा है।












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