राजनीतिक हत्या नहीं थी मुंडे की मौत
मुंबई। महाराष्ट्र के कद्दावर औऱ लोगों के चहेते भाजपाई नेता मुंडे की अचानक चुनाव से पहले एक दुर्घटना में मौत से कई सवाल उठने लगे थे। यह सवाल इसलिए थे क्योंकि महाराष्ट्र में मुंडे के रहते हुए अगर भाजपा की जीत हो जाती तो उसके बाद मुख्यमंत्री पद सिर्फ मुंडे को ही मिलने वाला था।

सवाल इसलिए भी उठर रहे थे औऱ हैं क्योंकि मुंडे के सामने भाजपा के पास महाराष्ट्र की गद्दी पर बैठाने के लिए कोई बराबरी का नेता ही नहीं था। मुंडे के सामने थोड़ा मुकाबला करने लायक नेता थे भी तो भाजपा के नेता औऱ वर्तमान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी।
मुंडे के रहते शिवसेना की ओर से भी मुख्यमंत्री के सीट की बात कहने में कोई दम भी नहीं आता। क्योंकि गोपीनाथ मुंडे एक ऐसा चेहरा थे महाराष्ट्र में जनता भी भाजपाई सरकार में मुख्यमंत्री भी गोपीनाथ मुंडे को ही देखना चाहती। इसके अलावा तमाम विधायक अपने दल का नेता भी गोपीनाथ मुंडे को ही चुनते।
मुंडे के जाने के बाद शिवसेना-भाजपा का गठबंधन टूट गया। शिवसेना एक दम मुखर हो गई। और भाजपा भ्रमित। भले ही सीबीआई ने यह कह दिया है कि मुंडे की मौत के पीछे कोई साजिश नहीं थी। सीबीआई ने खुलासा करते हुए कहा है कि मुंडे की मौत सिर्फ सड़क दुर्घटना के कारण आई दिमागी चोट के कारण हुई थी। लेकिन फिर भी सवाल तो उठ ही रहे हैं।
दरअसल, महाराष्ट्र भाजपा में कद्दावर नेता गोपीनाथ मुंडे की मृत्यु के बाद भाजपा में महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री की पदवी संभालने के लिए कोई बड़ा मराठी चेहरा सामने नहीं आ पा रहा है। हालांकि संकेत इस बात के भी हैं कि महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष देवेंद्र फडनवीस मुख्यमंत्री के तौर पर खुद अपने आप को प्रोजेक्ट करने के प्रयास कर रहे हैं।












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