लाखों बुजुर्गों की 'लाठी' बनेगी यह पेंशन

मुंबई। देश में गरीबी आज भी सबसे बड़ी समस्या है। एक उम्र गुजर जाने के बाद बुढ़ापे में ऐसा वक्त भी आता है जब जेब मेें पैसा नहीं होता, अपने भी पराया करने में देर नहीं करते। तब अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए कई बुजुर्ग दर-दर भटक रहे हैं। ऐसी घटनाएं भी अक्सर सामने आती रहती हैं कि पुराने दौर के कर्मचारी रहे बुजुर्ग माता-पिता की पेंशन पांच सौ रुपए तक होती है।

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ऐसे ही माता-पिता को उनके ही बच्चे घर से बाहर निकाल देते हैं या देखभाल करना बंद कर देते हैं। गौर करने वाली बात है कि देश में 32 लाख बुजुर्ग आज भी एक हजार रुपए से कम पेंशन पाते हैं।

ऐसे में पेंशन बुढ़े-मां बाप की ताकत बनती है। लेकिन बहुत पहले रिटायर हो गए लाखों कर्मचारी देश में ऐसे हैं जिनको 500-600 रुपए ही प्रतिमाह पेंशन मिल रही है। जिससे आज के समय में एक सप्ताह का भोजन भी नहीं जुटा पाना भी मुश्किल है।

लेकिन ईपीएफो की एक पहल के बाद ऐसे ही लाखों पेंशन धारकों को लाभ होगा। क्योंकि कम से कम एक हजार रुपए प्रतिमाह पेंशन की सीमा निर्धारित कर दी गई है।

केंद्र सरकार के निर्णय के तहत ईपीएफओ की कर्मचारी पेंशन स्कीम 1995 में बदलाव किया गया है। इस बदलाव के बाद बत्तीस लाख पेंशन धारकों को इसका लाभ पहुंचेगा।

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