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क्‍या बीएमसी पोल 2017 के चुनाव परिणाम शरद पवार की एनसीपी के लिए है खतरे का संकेत?

महाराष्‍ट्र में 10 नगरपालिकाओं और 25 जिला परिषदों के परिणाम शरद पवार की पार्टी एनसीपी के खतरे का संकेत है।

मुंबई। महाराष्‍ट्र में 10 नगरपालिकाओं और 25 जिला परिषदों के परिणाम शरद पवार की पार्टी एनसीपी के खतरे का संकेत है। क्‍योंकि इन चुनावों में सबसे ज्‍यादा जो पार्टी कमजोर हुई है, उसे एनसीपी ही माना जा रहा है। ऐसा इसलिए भी है कि क्‍योंकि अपने गढ़ बचाने में भी एनसीपी कामयाब नहीं हो पाई है। एनसीपी इससे पहले चार नगरपालिकाओं में काबिज थी, पर इस बार चारों नगरपालिकाएं भी उसके हाथ से निकल गई हैं। एनसीपी को पुणे और पिपंरी-चिंवाड के अलावा कांग्रेस के साथ गठबंधन वाली सोलापुर और अमरावती नगरपालिकाओं में भी चुनाव हार गई है।

क्‍या बीएमसी पोल 2017 के चुनाव परिणाम शरद पवार की एनसीपी के लिए है खतरे का संकेत?

वहीं जिला परिषद चुनावों में एनसीपी का स्‍थान पहले से हटकर तीसरे स्‍थान पर आ गया है। ग्रामीण इलाकों में अच्‍छा बेस होने के बावजूद एनसीपी को यह हार हाथ लगी है। इससे पहले वर्ष 2012 में हुए चुनावों में एनसीपी को कुल 266 सीटों पर जीत मिली थी। पर वर्ष 2017 में यह आंकड़ा घटकर 137 पर आ गया है। इसी तरह वर्ष 2012 की तुलना में जिला परिषद चुनावों में भी एनसीपी को काफी घाटा हुआ है। वर्ष 2012 में एनसीपी ने 511 सीटें जीतीं थीं और इस बार उसे 175 सीटों का घाटा हुआ है।

एनसीपी को पश्चिमी महाराष्‍ट्र में काफी नुकसान उठाना पडा है। इसके अलावा पवार परिवार का गढ़ माने जानी वाली पुणे म्‍युनसिपिल कॉरपोरेशन(पीएमसी) और पिंपरी-चिंवाड में हार भी उनकी खोती हुई साख को दिखाता है। यहां पर भी एनसीपी को 60 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा है।

महाराष्‍ट्र के राजनीतिक विश्‍लेषकों के मुताबिक मराठा आंदोलन को समर्थन देने के चलते एनसीपी का यह हाल हुआ है। इसका परिणाम यह हुआ कि दलित, ओबीसी और ब्राहामण वर्ग ने एनसीपी के खिलाफ वोट किया है।

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