PM मोदी के साथ मंच साझा करने से क्यों घबरा रहे हैं कांग्रेसी मुख्यमंत्री
मुंबई। न जाने ऐसा क्या हो गया है कि एक के बाद एक कांग्रेसी मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मंच साझा करने से इनकार कर दिया है। एक दिन पहले हरियाणा में विधानसभा चुनावों के सिलसिले में में पीएम मोदी की सभा में मुख्यमंत्री भूपेद्र् सिंह हुड्डा ने मोदी की तरफ ही तालियों की गड़गड़ाहट और नारों से तिलमिलाकर अगली बार से मंच साझा करने से ही इनकार कर दिया तो वहीं इसके तुरंत बाद महाराष्ट्र के कांग्रेसी मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने भी पहले अंदाजा लगाकर पीएम के साथ मंच साझा करने से मना कर दिया है। इसके बाद यह सवाल तो उठने ही लगा है कि आखिर क्या भय है जो कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों को पीएम के साथ मंच साझा नहीं करने पर मजबूर कर रहा है।

लोकसभा चुनाव में करारी हार होने के बाद से इसका सीधा मतलब यह निकाला जा सकता है कि कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों को अपने पर से विश्वास उठता जा रहा है। इसका उदाहरण है कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा और पृथ्वीराज चव्हाण ने पीएम मोदी के साथ मंच साझ करने को अपने लिए नुकसान का सौदा समझ लिया है। हो न हो कांग्रेस को यह डर है कि पीएम की ओर से संबोधन के दौरान मंच साझा करने से कांग्रेस और भाजपा की तुलना लोग करने लगेंगे। यही तुलना कांग्रेस को हार की ओर धकेल सकती है।
सोलापुर में मोदी के नारे से बीच में ही रुक गए थे चव्हाण
इससे पहले सोलापुर में शनिवार को एक समारोह में प्रधानमंत्री ने चार लेन वाले राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 9 का उद्घाटन किया था। इस समारोह में चव्हाण को अपना संबोधन आधे बीच में ही रोकना पड़ा था क्योंकि उस समय कई मोदी समर्थकों ने नरेंद्र मोदी के पक्ष में नारे लगाने शुरू कर दिए थे।












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