Morena Narasanhar: डकैत पान सिंह तोमर के गांव में फिर मौत का तांडव, 6 लोगों के खून से जमीन लाल
मुरैना के लेपा-भिड़ोसा गांव की मिट्टी खून मांगती है। यह गांव कभी बीहड़ों में कुख्यात रहे डाकू पानसिंह तोमर का गांव कहलाता है। यहां जमीन विवाद में गोलियां चलना, हत्याएं होना आम बात हो चुकी है।

Morena Narasanhar चंबल के कुख्यात डाकू पान सिंह तोमर (Paan Singh Tomar) के पुश्तैनी गांव मुरैना के लेपा-भिड़ोसा गांव की धरती एक बार फिर खून से लाल हो गई। मुरैना जिले के सिहौंनिया थाना इलाके जिस गांव में शुक्रवार सुबह छह लोगों की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई है वह गांव डाकू पान सिंह का गांव है।
बता दें कि डाकू पान सिंह तोमर चंबल के बीहड़ों पर राज करने से पहले देश का सबसे तेज एथलीट माना जाता था। पान सिंह ने भारतीय सेना में सेवाएं दी थीं। पानसिंह मूलरूप से मुरैना के भिड़ोसा गांव का रहने वाला था। यह दोनों गांव आजू-बाजू में बसे हैं और लेपा-भिड़ोसा नाम से गांव की पहचान है। यहां जमीन विवाद को लेकर दशकों से अपराध और हत्याएं आम रही हैं। डाकू पान सिंह तोमर भी जमीन विवाद और उस दौर में अधिकारियों द्वारा उसकी जमीन को फर्जी तरी के से हड़पने और फसल को उजाड़ने के बाद पानसिंह बागी हो गया था।
जमीन विवाद ही बना नरसंहार का कारण
लेपा-भिड़ोसा गांव में साल 2013 में जमीन विवाद को लेकर वीरसिंह के परिवार के लोगों की हत्या कर दी गई थी। इसी आरोप में गजेंद्र सिंह 10 साल तक जेल में रहा है। मामले में सामाजिक राजीनामा होने के बाद गजेंद्र सिंह व उसका परिवार गांव वापस आकर रहने लगा था। वहीं पुराने विवाद और आपसी रंजिश के चलते सुबह भिड़ोसा गांव में वीरसिंह परिवार के लोगों ने गजेंद्र व उसके परिवार के लोगों पर हमला कर दिया और छह लोगों को गोलियों से भून दिया।
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कौन था डाकू पान सिंह
मुरैना जिले के लेपा-भिड़ोसा गांव में पान सिंह का जन्म 1932 में हुआ था। पानसिंह ने युवा होते ही सेना ज्वाइन कर ली थी। वह मिल्खा सिंह की तरह तेज दौड़ने वाला एथलीट (धावक) था। 1950 से आगामी 10 साल तक पानसिंह ने सात दफा राष्ट्रीय स्टीपलचेंज में चैम्पियन बने थे। 1952 के एशियाई खेलों में देश का प्रतिनिधित्व भी किया था। सेना से समय से पहले रिटायरमेंट लेने के बाद पान सिंह अपने गांव में पैतृक खेती-बाड़ी देखने लगे थे। यहां उस दौर में कतिपय भ्रष्ट अधिकारियों व प्रभावशाली लोगों ने गलत तरीके से उनकी जमीन हड़प ली थी। पान सिंह तोमर के परिवार पर हमला कर उनकी मां को मार दिया था, जिसके बाद पान सिंह विद्रोही बन गए और बदला लेने के लिए चम्बल के बीहड़ों में चले गए। 1981 में पान सिंह तोमर का एनकाउंटर कर दिया गया था। पानसिंह तोमर के जीवन पर हिन्दी में फिल्म भी बन चुकी है जो काफी चर्चाओं में रही थी।












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