यूपी के मऊ में कोरोना से ठीक हुए 70 साल के मरीज में मिला White fungus
मऊ, मई 21: कोरोना वायरस महामारी के बीच अब मरीजों में नई तरह की बीमारी ने चिंता बढ़ा दी है। कोरोना के मरीजों में ब्लैक फंगस के मामले सामने आने के बाद अब व्हाइट फंगस के केस सामने आने लगे हैं। उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में कोरोना से ठीक हुए बुजुर्ग में व्हाइट फंगस मिला है। बुजुर्ग की उम्र 70 वर्ष है। माना जा रहा है कोरोना से ठीक हुए मरीज में भारत का ये पहला मामला है।

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दिल्ली के अस्पताल में हुआ था बुजुर्ग का इलाज
कोरोना पॉजिटिव 70 वर्षीय का बुजुर्ग का बीते अप्रैल में दिल्ली के एक अस्पताल में इलाज किया गया था। ठीक होने के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई थी। 'इंडिया टुडे टीवी' से बातचीत में विट्रो-रेटिना विशेषज्ञ डॉ. क्षितिज आदित्य ने बताया कि 70 वर्षीय मरीज कोविड-19 से ठीक होने के बाद लगातार स्टेरॉयड पर थे। कुछ समय बाद उन्हें आई फ्लोटर्स (आंखों के अंदर जेली जैसा पदार्थ) विकसित हो गया और उनकी आंखों की रोशनी चली गई।
लक्षण दिखने पर तुरंत लें विशेषज्ञ से परामर्श
डॉक्टर आदित्य ने कहा, ''मरीज डिस्चार्ज होने के बाद लगातार स्टेरॉयड पर था। एक सप्ताह पहले उसकी आंखों के फ्लोटर्स विकसित हुए और आंखों की दृष्टि धीरे-धीरे कम हो गई। जब मामला मेरे पास आया तो यह अंतर्जात फंगल एंडोफ्थेलमिटिस (आंखों का संक्रमण जो रक्त के माध्यम से फैलता है) जैसा दिखता था।" डॉक्टर क्षितिज आदित्य ने कहा, "इन लक्षणों वाला कोई भी व्यक्ति, जिसका हाल ही में कोविड-19 का इलाज किया गया है, विशेष रूप से जिन्होंने स्टेरॉयड लिया है या जिन्हें मधुमेह है, उन्हें तुरंत एक नेत्र विशेषज्ञ, विशेष रूप से एक रेटिना विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।"
कमजोर इम्युनिटी वाले शुगर के मरीजों को ज्यादा खतरा
विशेषज्ञों के मुताबिक, कमजोर इम्युनिटी वाले शुगर के मरीजों में व्हाइट फंगस से संक्रमित होने की संभावना सबसे अधिक होती है। इनमें वे लोग भी शामिल हैं जो कोरोनो वायरस के इलाज के दौरान लंबे समय से स्टेरॉयड ले रहे हैं। व्हाइट फंगस आंखों, फेफड़े, मस्तिष्क, नाखून, त्वचा, निजी अंगों और गुर्दे जैसे महत्वपूर्ण अंगों में ज्यादा आसानी से फैलता है।












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