यूपी के इस सरकारी अस्पताल में तांत्रिक करते हैं मरीजों का इलाज, डॉक्टर ने कहा - मुझे कुछ पता नहीं
अंधविश्वास का नहीं करें विश्वास, अंधविश्वास कानूनी अपराध है। आपने कभी न कभी यह जरूर सुना होगा कि तंत्रमंत्र और झाड़फूँक की वजह से किसी मासूम को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा, परन्तु आज भी कई वर्ग ऐसे हैं जो जादूटोने और झाड़फूंक पर विश्वास रखते हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है। उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड से जहाँ एक जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में एक नहीं बल्कि दो तांत्रिक लोगों का इलाज कर रहे हैं। मरीज सरकारी डॉक्टरों के इलाज पर भरोसा न कर के तांत्रिको से झाड़फूंक कराने पर ज्यादा यकीन रखते हैं। डॉक्टर का इसपर कहना है कि उन्हें पता ही नहीं कि अस्पताल में तांत्रिकों ने मरीज का इलाज किया है, मगर यह बेहद ही हैरानी की बात है कि खुलेआम जिला अस्पताल के वार्ड में झाड़फूक होती रही और जिम्मेदारों को इसकी भनक तक नहीं लगी।
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आठ इंजेक्शन से भी आराम नहीं मिला
दरअसल पूरा मामला बुन्देलखण्ड के महोबा जिले के सरकारी अस्पताल का है। इमरजेंसी वार्ड में तांत्रिक द्वारा दो मरीजों का इलाज करते नजर आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया तो वहीं डाक्टरों की कार्य क्षमता पर भी सवाल उठने लगे हैं। आखिर क्यों मरीज सरकारी डॉक्टरों के इलाज पर भरोसा न कर के तांत्रिको से झाड़फूंक कराने पर ज्यादा यकीन करते है ।
आपको बता दें कि महोबा जिले के कुलपहाड़ अंतर्गत दरियार सिंह के खुड़ा निवासी गुलाब सिंह की 22 वर्षीय पुत्री संध्या यादव को कल खेत में कार्य करते समय बिच्छू ने काट लिया था। उसके परिजन इलाज के लिए जिला अस्पताल ले कर आए थे। उसे जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था, पर जब सरकारी डॉक्टरों के इलाज से कोई फायदा नही हुआ तो फिर तांत्रिको को बुला कर युवती का इलाज करवाया गया। पीड़ित महिला का कहना है कि उसे बिच्छू ने काट लिया था, वो कल यहाँ भर्ती हुई थी मगर इलाज के बाद भी उसे लाभ नहीं मिला, वो बताती है कि कल एक तांत्रिक ने उसे झाड़ा था। आज दो तांत्रिक बाबाओं ने इमरजेंसी वार्ड में आकर इलाज किया है और इससे उसे आराम भी मिला है।
वहीँ बिच्छू के काटने से चितइयन गांव निवासी रामदास भी अस्पताल पहुंचा थे। उन्होंने भी इस महिला की देखा देखी आराम न मिलने पर तांत्रिक से इलाज करा डाला। रामदास बताता है कि अस्पताल के डॉक्टर ने आठ इंजेक्शन लगाए पर उसे आराम नहीं मिला। इंजेक्शन से ज्यादा तांत्रिक की झाड़फूक से ही आराम मिला है।

तांत्रिक ने खाने के लिए दवा भी बताई है
महोबा जिले में लोग आज भी डाक्टरों से ज्यादा झाड़ फूंक करने वाले तांत्रिको पर विश्वास करते है तभी तो जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में महिला का इलाज करने एक नहीं तीन-तीन तांत्रिक पहुँच गए और तीनो ने अपने मंत्रो के साथ झड़ फूंक कर के इलाज़ शुरू कर दिया है । जिला अस्पताल में ओझाओं से इलाज कराने का मामला सामने आने के बाद से लोग स्वास्थ विभाग को लेकर तरह तरह की चर्चाएं भी कर रहे है ।
इलाज कराने आया एक तांत्रिक गोरखा गांव निवासी लखनलाल बताता है कि वो गारंटी से इलाज करता है उसके पास रोजाना इलाज कराने मरीज आते हैं। उसने जिला अस्पताल में महिला मरीज का इलाज किया है और दावा किया है कि सौ फीसदी महिला ठीक हो जाएगी। वहीँ दूसरे तांत्रिक संतोष कुमार पुजारी का दावा है कि उसकी झाड़फूंक से बिच्छू काटे के दो मरीजों का उसने इलाज किया है और उन्हें आराम भी मिल गया। यहीं नहीं तांत्रिक बाबा ने मरीज को खाने के लिए दवा भी बताई है।

ड्यूटी में तैनात डॉक्टर को भनक तक नहीं
यह पहला मौका नहीं है जब महोबा के जिला अस्पताल में तांत्रिको द्वारा मरीजों को झाड़ फूंक कर इलाज करने का मामला सामने आया है। इससे पहले भी इमरजेंसी वार्ड में महिला का तांत्रिक द्वारा इलाज करने का मामला सामने आ चुका है मगर अबकी बार तीन तांत्रिक इमरजेंसी वार्ड में मरीज का इलाज करते देखे गए है। जिससे यह साबित होता है की महोबा जिले के लोग डाक्टरों से इलाज करवाने के बजाए तांत्रिको के इलाज पर ज्यादा भरोसा करते है। वहीँ अस्पताल में मौजूद जिम्मेदार भी तांत्रिकों के प्रवेश पर चुप्पी साधे हुए है। जहाँ एक तरफ तांत्रिक मरीजों का अस्पताल के अंदर इलाज कर रहे थे, वहीँ ड्यूटी में तैनात डॉक्टर वरुण कुमार को इसकी भनक तक नहीं लगी। उनकी माने तो उन्हें नहीं पता कि अस्पताल में तांत्रिकों ने मरीज का इलाज किया है।

कानून में क्या है प्रावधान
कोई भी व्यक्ति अपने आप को किसी व्यक्ति, पशु या जीवित वस्तु पर ओझा के रूप में झाड़-फूंक या तंत्र-मंत्र का उपयोग करके उपचार करने का दावा करता है, तो यह अपराध की श्रेणी में आता है। प्रकरण दर्ज होने पर 3 से 5 वर्ष तक सजा का भी प्रावधान है। कुछ लोग होते हैं जो स्वयं किसी चमत्कारी शक्ति का स्वामी घोषित कर देते हैं। बड़े-बड़े विज्ञापन द्वारा अपना प्रचार प्रसार करते हैं। किसी के टीवी पर प्रायोजित कार्यक्रम चलते हैं तो कोई यूट्यूब पर वीडियो जारी करता है। इस प्रकार के लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता में कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है।
कुछ ऐसे भी मामले होते हैं जिसमे पुलिस थानों में FIR नहीं लिखते हैं एवं पुलिस द्वारा भी पीड़ित व्यक्ति को गुमराह किया जाता है। बोल दिया जाता है यह अपराध संज्ञेय नहीं है। ऐसे में आम व्यक्ति को कानून की जानकारी होना आवश्यक है अगर पुलिस FIR दर्ज नहीं करती है तो न्यायालय परिवाद दायर कर सकते हैं। यह नोट करना आवश्यक है कि आरोपी व्यक्ति दान में ₹100000 की मांग करें या फिर सिर्फ एक अगरबत्ती जलाने के लिए कहे, इससे केस मजबूत या कमजोर नहीं होता।












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