मुंबई के प्राइवेट अस्पतालों में कोविड बेड की क्यों है मारामारी ? इसमें एक उम्मीद भी छिपी है

मुंबई, 10 जनवरी: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक आज सुबह तक देश में ओमिक्रॉन संक्रमण के कुल मामले 4,033 हो चुके हैं और इनमें से एक-चौथाई से भी ज्यादा केस यानी 1,216 अकेले महाराष्ट्र में हैं। हालांकि मायानगरी मुंबई के लिए राहत की खबर यह है कि रविवार को यहां शनिवार के मुकाबले कोविड के मामलों में गिरावट देखी गई है। रविवार को मुंबई में कोविड के 19,474 नए केस आए और सात लोगों की मौत हुई, जबकि एक दिन पहले वहां 20,318 कोविड संक्रमण आए थे और पांच लोगों की मौत हुई थी। लेकिन, इसके बावजूद मुंबई में निजी अस्पतालों में बेड की मारामारी मची हुई है। जबकि, बीएमसी के आंकड़े बताते हैं कि शहर में बहुत बड़ी संख्या में कोविड बेड उपलब्ध हैं। तो आखिर निजी अस्पतालों में क्यों बेड नहीं मिल पा रहे हैं? आज हम इसी की पड़ताल करते हैं।

मुंबई के निजी अस्पतालों में कोविड मरीजों की भरमार

मुंबई के निजी अस्पतालों में कोविड मरीजों की भरमार

मुंबई के निजी अस्पतालों की स्थिति ऐसी है कि वह पूरी क्षमता से साथ काम कर रहे हैं और भर्ती के लिए मरीज इंतजार में लगे हैं। कई बड़े प्राइवेट अस्पतालों मेंएडमिशन के लिए 24 घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। इसकी वजह से वहां मैन पावर की भी किल्लत शुरू हो गई है। इसके चलते नॉन-कोविड स्वास्थ्य कर्मियों को कोविड मरीजों की देखभाल के लिए शिफ्ट करना पड़ रहा है। बीएमसी ने निजी अस्पतालों को सोमवार तक की मोहलत दी हुई है कि वह अपनी बेड क्षमता को उसी स्तर पर कर लें, जितनी कोरोना की दूसरी लहर के दौरान 5 मई, 2021 को थी। लेकिन, सवाल है कि सरकारी अस्पताल खाली हैं तो निजी अस्पतालों में कोविड मरीजों को इलाज के लिए इंतजार क्यों करना पड़ रहा है?

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    हल्के लक्षण वाले मरीज भी निजी अस्पतालों में हो रहे हैं भर्ती

    हल्के लक्षण वाले मरीज भी निजी अस्पतालों में हो रहे हैं भर्ती

    जबकि, बीएमसी के मुताबिक शहर के अस्पतालों में 80 फीसदी बेड खाली पड़े हैं और अभी जितने भी संक्रमित मरीज आ रहे हैं, उनमें से महज 10-15 फीसदी को ही अस्पतालों में इलाज करवाने की जरूरत है। तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि लोग निजी अस्पतालों की ओर क्यों भाग रहे हैं। दरअसल, इसकी वजह बीमारी की गंभीरता में नहीं मेडिकल इंश्योरेंस कंपनियों की गाइडलाइंस में छिपी हुई है। जब कई लोगों से बीएमसी को निजी अस्पतालों में कोविड बेड की कमी की शिकायतें मिलीं तो निगम ने इसकी छानबीन की। मुंबई के म्यूनिसिपल कमिश्नर इकबाल सिंह चहल ने जांच में पाया कि कोविड के हल्के लक्षणों वाले मरीजों ने भी अस्पतालों में दाखिले के लिए लाइन लगवा रखी है।

    मुंबई के प्राइवेट अस्पतालों में कोविड बेड की क्यों है मारामारी ?

    मुंबई के प्राइवेट अस्पतालों में कोविड बेड की क्यों है मारामारी ?

    चहल ने जो कुछ कहा है उससे मुंबई के निजी अस्पतालों में कोविड बेड की मारामारी से पर्दा उठ गया है। उन्होंने कहा, 'वे सिर्फ एक या दो दिनों के लिए अस्पतालों में भर्ती हो रहे हैं और डिस्चार्ज हो जाते हैं। जब हमने इन अस्पतालों से कहा कि इन मरीजों का इलाज ओपीडी में करें। तो प्राइवेट अस्पताल वालों ने हमें बताया कि स्वास्थ्य बीमा कंपनियों का ये नियम है कि वह सिर्फ उन्हीं मरीजों को इंश्योरेंस का क्लेम देंगे, जो कम से कम 24 घंटे अस्पताल में एडमिट रहेंगे।'

    बीएमसी ने जगाई मेडिकल इंश्योरेंस को लेकर एक उम्मीद

    बीएमसी ने जगाई मेडिकल इंश्योरेंस को लेकर एक उम्मीद

    बीएमसी कमिश्नर ने कहा है कि ,'इसकी वजह से बेवजह विवाद पैदा हो रहा है और कम-गंभीर मरीज बेड को ब्लॉक कर रहे हैं।' इसके साथ ही उन्होंने उम्मीद की एक किरण भी दिखाई है, जिसमें सफल हुए तो लाखों लोगों को राहत मिल सकती है। उन्होंने कहा कि 'मैंने अस्पतालों से कहा है कि इस मामले में मुझे लिखें और मैंने तय किया है कि इंश्योरोंस कंपनियों से कहूंगा कि ओपीडी में इलाज करवाने वालों को भी भुगतान की अनुमति दें।' हालांकि, चहल ने जितनी बड़ी उम्मीद दिखाई है, उसे कर दिखाना बहुत ही बड़ी चुनौती है और यदि सफल हुए तो स्वास्थ्य बीमा के क्षेत्र में एक नया रास्ता खुल सकता है। बहरहाल, बीएमसी ने इसपर भी निगरानी रखने का फैसला किया है कि प्राइवेट अस्पतालों में सिर्फ उन्हीं मरीजों को दाखिला दिया जाए, जिन्हें वास्तव में अस्पताल में इलाज की जरूरत है।

    होम कोविड टेस्ट किट को लेकर परेशान हुआ बीएमसी

    होम कोविड टेस्ट किट को लेकर परेशान हुआ बीएमसी

    बीएमसी को एक और मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। वह कोविड के होम टेस्टिंग किट से परेशान है। जनवरी के पहले सात दिनों में ही मुंबई में करीब 5 लाख कोविड होम टेस्ट किट बिक चुके हैं। लेकिन, बीएमसी को दिक्कत ये हो रही है कि पॉजिटिव मरीजों के मामले में उसे कोई जानकारी ही नहीं मिल पा रही है, जिससे संक्रमितों को ट्रैक करना उसके लिए असंभव होता जा रहा है। इसलिए वह अब इस तरह की किट पर पाबंदी लगाने पर भी विचार कर रहा है। क्योंकि, लैब में जो आरटी-पीसीआर टेस्ट हो रहे हैं, उसकी रिपोर्ट तो उसे मिल जाते हैं।

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