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क्यों स्टॉक होने के बावजूद महाराष्ट्र के मुंबई जैसे कुछ शहरों में वैक्सीनेशन सेंटर बंद करने पड़े ? जानिए

मुंबई, 5 मई: अप्रैल महीने के दूसरे हफ्ते में महाराष्ट्र के मुंबई समेत कई जिलों में वैक्सीनेशन सेंटर बंद कर दिए गए थे। दावा किया गया कि वैक्सीन की किल्लत हो गई है, इसीलिए टीकाकरण अभियान जारी रख पाना संभव नहीं है। इस बात को लेकर महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री और केंद्र सरकार के बीच बहस भी छिड़ी थी। लेकिन,अब जानकारी सामने आ रही है कि इस दौरान महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे के गृह जिले जालना में वैक्सीन की इतनी डोज बेकार में पड़ी हुई थी, जिससे कम से कम 10 से 15 दिनों तक टीके दिए जा सकते थे। लेकिन, मंत्री जी के गृह जिले में स्टॉक यूं ही पड़े रहे और मुंबई जैसे शहर में भी कई सेंटर पर यह कह दिया गया कि वैक्सीन खत्म हो गई है।

मंत्री के जिले में ओवर स्टॉक और दूसरी जगहों पर कमी हो गई

मंत्री के जिले में ओवर स्टॉक और दूसरी जगहों पर कमी हो गई

31 मार्च को केंद्र से महाराष्ट्र को वैक्सीन की 26.77 लाख डोज की फ्रेश सप्लाई मिली थी। इसमें से प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री और एनसीपी नेता राजेश टोपे के जालना जिले को 17,000 डोज आवंटित की गई थी। लेकिन, असल में उसे 60,000 डोज उपलब्ध करवाई गई। सूत्रों की मानें तो टोपे ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर दबाव बनाया था कि उनके जिले का आवंटन बढ़ाकर 77,000 डोज कर दिया जाए। लेकिन, जब इंडियन एक्सप्रेस ने इस संबंध में टोपे से पूछा तो उन्होंने साफ तौर पर पल्ला झाड़ते हुए कहा कि 'किसी भी खास जिले को तरजीह नहीं दी गई' और अगर जालना को ज्यादा स्टॉक मिला तो यह 'वैक्सीनेशन को बढ़ावा देने के लिए' किया गया। जबकि हकीकत ये थी कि औसतन राज्य में 27 फीसदी लक्षित लोगों को वैक्सीन लगाई जा रही थी, लेकिन जालना में उस समय यह मुश्किल से 18.1 फीसदी ही हो पा रहा था।

राजेश टोपे के जिले पर महाराष्ट्र सरकार मेहरबान

राजेश टोपे के जिले पर महाराष्ट्र सरकार मेहरबान

वैक्सीन का स्टॉक पाने के लिए जो मापदंड निर्धारित किया गया था उसका आधार वैक्सीनेशन ड्राइव में रोज का प्रदर्शन और उस जिले में ऐक्टिव केसों की संख्या थी। जबकि, 31 मार्च को जालना में सिर्फ 773 ऐक्टिव केस थे, जो कि महाराष्ट्र के 30 जिलों से कम थे। वहां उस दौरान रोजाना 600-1,000 लोगों को वैक्सीन लग पा रही थी और इस मामले में वह प्रदेश के 10 सबसे फिसड्डी राज्यों में शामिल था। लेकिन, फिर भी राज्य के टीकाकरण अधिकारी डॉक्टर डीएन पाटिल ने 1 अप्रैल को औरंगाबाद से 60,000 वैक्सीन की डोज जालना को भेज दी। जबकि, औरंगाबाद में हर दिन 7 से 8 हजार वैक्सीनेशन को देखते हुए वहां 1.95 लाख डोज भेजी गई थी। यानी उस वक्त जालना में जिस रफ्तार से टीकाकरण हो रहा था, उसके पास 15 से 18 दिनों के लिए वैक्सीन पर्याप्त थी। जबकि,बाकि जिलों में 5 से 10 दिनों के लिए भी मुश्किल पड़ गई थी। हालांकि, ज्यादा वैक्सीन आने के बाद अप्रैल के पहले हफ्ते में वहां वैक्सीनेशन ने थोड़ी रफ्तार जरूर पकड़ी थी।

बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों की उपेक्षा हुई

बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों की उपेक्षा हुई

8-9 अप्रैल की बात है जब पूरे राज्य में कई जिलों से स्वास्थ्य विभाग को वैक्सीन की कमी होने की सूचना मिलनी शुरू हो गई, तब जाकर टोपे ने पास के जिलों में जालना से 15,000 डोज भेजने की इजाजत दी। स्वास्थ्य मंत्री के जिले पर यह अतिरिक्त मेहरबानी क्यों की गई, इसके बारे में जवाब देने के लिए टीकाकरण अधिकारी ने न तो फोन उठाया और ना ही टेक्स्ट मैसेज का जवाब दिया। जबकि, आंकड़े बताते हैं कि वैक्सीनेशन में काफी बेहतर प्रदर्शन और ज्यादा ऐक्टिव केस होने के बावजूद जालना के पड़ोसी जिलों जैसे कि बीड, लातुर, परभणी को उसकी तुलना में कम वैक्सीन सप्लाई की गई। तथ्य ये है कि 1 अप्रैल को जालना से ज्यादा वैक्सीनेशन करने वाले सिर्फ 9 जिलों को उस से ज्यादा डोज सप्लाई की गई।

8-9 अप्रैल को मुंबई में बंद हुए थे 75 सेंटर, जालना में थी 50,000 डोज

8-9 अप्रैल को मुंबई में बंद हुए थे 75 सेंटर, जालना में थी 50,000 डोज

सूत्रों के मुताबिक 31 मार्च को महाराष्ट्र को केंद्र से वैक्सीन की बहुत ज्यादा डोज मिली थी। जबकि, उससे पहले और बाद में इसकी मात्रा 5 से 14 लाख डोज तक सीमित थी। गौरतलब है कि 7 से 9 अप्रैल के बीच महाराष्ट्र के जिन जिलों और निगमों में वैक्सीन की किल्लत के चलते वैक्सीनेशन सेंटर बंद करने पड़े थे, उनमें सतारा, नवी मुंबई, मुंबई और सांगली भी शामिल हैं। नतीजा ये हुआ कि 7 अप्रैल को जालना में जहां वैक्सीन की 50,000 से ज्यादा डोज यूं ही पड़ी रह गई, मुंबई में 8 अप्रैल को 25 प्राइवेट सेंटर बंद करने पड़ गए और 9 अप्रैल को 50 सेंटर पर ताले लग गए। जब राज्य के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने टोपे समेत बाकी लोगों के सामने गुहार लगाई और तत्काल स्टॉक की मांग की तब जाकर मंत्री जी जालना से वैक्सीन दूसरे जिलों में भेजने के लिए राजी हुए।

राज्य सरकार केंद्र पर ठीकरा फोड़ रही थी

राज्य सरकार केंद्र पर ठीकरा फोड़ रही थी

गौरतलब है कि 7 और 8 अप्रैल के बीच ही राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच वैक्सीन के स्टॉक को लेकर बहुस छिड़ी हुई थी। 7-8 अप्रैल को टोपे राज्य में वैक्सीन की किल्लत का दावा कर रहे थे और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन कह रहे थे कि राज्य के पास पर्याप्त स्टॉक है और वो ठीक से उसे मैनेज नहीं कर पा रहे हैं। जालना के जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर विवेक खाटगांवकर ने कहा है कि जब वैक्सीन कम पड़ने की जानकारी मिली तो इसे दूसरे जिलों में भेजा गया।

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