'मैं शिवसेना का पिता हूं', कौन हैं ये भाजपा एमएलसी, जिनके ये बोलते ही शिंदे की Shiv Sena हुई आगबबूला
Maharashtra News: महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया बवाल मच गया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधान परिषद सदस्य परिणय फुके ने ऐसा बयान दे डाला है कि महायुति सरकार में सहयोगी एकनाथ शिंदे की शिवसेना आगबबूला हो गई है।
दरअसल, भाजपा के परिणय फुके ने एक कार्यक्रम में खुद को 'शिवसेना का पिता' घोषित कर दिया। भंडारा में एक जनसभा के दौरान चार अगस्त को दिए गए इस बयान पर शिवसेना (शिंदे गुट) ने कड़ी आपत्ति जताई है और इसे अपमानजनक करार दिया है।

क्या बोले थे परिणय फुके?
दरसअल, फुके ने कार्यक्र में कहा था, कि "अब मुझे पता है कि मैं भंडारा में शिवसेना का पिता हूं"! जिस पर शिंदे गुट ने फुके से 12 घंटे के भीतर माफी मांगने की मांग की है। लोकसभा प्रभारी संजय कुंभलकर ने चेतावनी दी है कि यदि माफी नहीं मांगी जाती है तो 'शिवसेना शैली' में जवाब दिया जाएगा। यह घटनाक्रम बीजेपी और उसकी सहयोगी शिवसेना के बीच सार्वजनिक तनाव का कारण बन गया है।
फुके के बयान पर भड़की शिवसेना
फुके के बयान पर शिवसेना (शिंदे गुट) के संजय कुंभलकर ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिवसेना की स्थापना बालासाहेब ठाकरे ने की थी और वही इसके एकमात्र 'पिता' हैं। कुंभलकर ने कहा, "किसी अन्य व्यक्ति को यह अधिकार नहीं है कि वह खुद को शिवसेना का जनक बताए।" उन्होंने इसे शिवसेना के इतिहास और भावनात्मक विरासत का अपमान भी बताया।
फुके ने विवाद बढ़ने पर दी क्या दी सफाई?
विवाद बढ़ने पर परिणय फुके ने अपने बयान पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनका इरादा किसी का अपमान करना नहीं था। फुके ने समझाया, "जब बेटा अच्छा करता है तो मां को श्रेय मिलता है, और गलती पर बाप को दोष मिलता है। उसी भावना में मैंने कहा कि मैं भंडारा में शिवसेना का पिता हूं।" उन्होंने दावा किया कि उनका बयान स्थानीय राजनीति में उनकी स्थिति को लेकर एक व्यंग्य था। इसके बावजूद शिवसेना (शिंदे गुट) फुके से तत्काल सार्वजनिक माफी की मांग पर अड़ी है।
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कौन हैं परिण फुके?
- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता परिणय फुके महाराष्ट्र विधान परिषद (एमएलसी) के सदस्य हैं। उन्हें नागपुर और विदर्भ क्षेत्र में भाजपा के प्रमुख नेताओं में से एक माना जाता है।
- परिणय फुके का जन्म 5 जनवरी 1981 को नागपुर, महाराष्ट्र में हुआ था। उन्होंने एमबीए और नागपुर विश्वविद्यालय से पीएचडी की डिग्री हासिल की है। उनके परिवार में उनकी पत्नी परिणीता फुके और दो बच्चे हैं।
- उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत 2007 में हुई, जब वे नागपुर महानगरपालिका में एक निर्दलीय नगरसेवक के रूप में चुने गए। बाद में वे भाजपा में शामिल हो गए। फुके पहली बार 2016 से 2022 तक भंडारा-गोंदिया से विधान परिषद सदस्य रहे। जुलाई 2024 में, उन्हें महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्यों के वोटों से दोबारा विधान परिषद के लिए चुना गया।
- 2019 में, परिणय फुके ने देवेंद्र फडणवीस सरकार में वन, आदिवासी विकास और लोक निर्माण विभाग के राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया। वे विधान परिषद में किसानों की समस्याओं, खराब सड़कों और ओबीसी अधिकारों जैसे मुद्दों को लगातार उठाते रहे हैं।
- हालांकि, फुके कुछ विवादों में भी घिरे रहे हैं। 2019 में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली में भीड़ जुटाने के लिए ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने की बात कहते हुए उनका एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसके लिए उनकी काफी आलोचना हुई। इसके अतिरिक्त, उनके खिलाफ संपत्ति विवाद और धमकी के आरोपों से संबंधित कुछ कानूनी शिकायतें भी दर्ज की गई हैं।
- चुनावी मोर्चे पर, 2019 में वे साकोली विधानसभा सीट से कांग्रेस नेता नाना पटोले से हार गए थे, लेकिन बाद में उन्होंने विधान परिषद में वापसी की। सामाजिक भूमिका के तहत, फुके ने ओबीसी जातीय जनगणना का लगातार समर्थन किया है, जिसके लिए ओबीसी महासंघ ने उन्हें सम्मानित भी किया है।












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