उद्धव का सीएम शिंदे पर हमला, महिलाओं से पूछा- क्या गद्दारों को अपना भाई मानकर भरोसा करेंगी?
शिवसेना (यूबीटी) के नेता उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के पैठण में सत्ताधारी शिवसेना की आलोचना की है। उन्होंने सवाल किया कि क्या महिलाएं "गद्दारों" पर अपने भाई के रूप में भरोसा करेंगी, उनका इशारा उन लोगों की ओर था, जिन्होंने अपनी मूल पार्टी के साथ कथित रूप से विश्वासघात किया। ठाकरे की टिप्पणी मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार की महिलाओं के लिए मासिक वित्तीय सहायता योजना पर तंज की तरह था।
अपने संबोधन के दौरान ठाकरे ने पूछा, 'क्या आप इन लोगों पर भरोसा करेंगे जिन्होंने अपनी मूल राजनीतिक पार्टी को धोखा दिया है?' यह मुख्यमंत्री माझी लड़की बहन योजना के संदर्भ में था। यह योजना पात्र महिलाओं को प्रति माह 1,500 रुपये प्रदान करती है और विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले शुरू की गई है।

ठाकरे ने जोर देकर कहा कि न्याय में देरी न्याय से वंचित करने के समान है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में न्याय मांगने का उल्लेख किया। उन्होंने प्रतिद्वंद्वी गुट के विधायकों के खिलाफ अयोग्यता मामले में शिवसेना (यूबीटी) की अपील का जिक्र करते हुए कहा, 'हमें सर्वोच्च न्यायालय पर भरोसा है।'
पूर्व मुख्यमंत्री ने बदलापुर के एक स्कूल में दो लड़कियों के कथित यौन शोषण पर विरोध प्रदर्शन को उचित ठहराया। उन्होंने कोलकाता के एक अस्पताल में एक डॉक्टर के बलात्कार और हत्या को लेकर पश्चिम बंगाल में हुए आंदोलन का हवाला दिया। ठाकरे ने कहा कि लोगों को ऐसी घटनाओं में पुलिस की ओर से एफआईआर दर्ज करने में देरी के खिलाफ न्याय मांगने का अधिकार है।
उन्होंने कहा, 'लेकिन पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की।' ठाकरे ने यह भी कहा, 'जब हम विरोध करते हैं तो हम पर मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया जाता है। प्रदर्शनकारियों को न्याय मांगने का अधिकार है, जैसा कि बंगाल में हो रहा है।'
ठाकरे ने इस बात पर जोर दिया कि भले ही उनका गुट सत्ता में न हो, लेकिन वे लोगों से किए गए वादों को पूरा करना जानते हैं। वंशवादी राजनीति की भाजपा की आलोचना का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, 'यह वादों को पूरा करने की हमारी 'घरानेशाही' है।'
उन्होंने लोगों से शिवसेना (यूबीटी) के "जलता हुआ मशाल" चुनाव चिन्ह के बारे में जागरूकता फैलाने का आग्रह किया। ठाकरे ने पैठण और वैजापुर निर्वाचन क्षेत्रों में "गद्दारों" की जीत को हिंदुत्व पर एक धब्बा बताया, जिसका बदला आगामी विधानसभा चुनावों में लिया जाना चाहिए।












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